मौत से पहले देव आनंद ने जताई थी ये आखिरी ख्वाहिश, 103वीं बर्थ एनिवर्सरी पर जानिए क्या चाहते थे एवरग्रीन स्टार
Dev Anand Last Wish: आज यानी 26 सितंबर 2026 को हिंदी सिनेमा के सदाबहार एक्टर देव आनंद (Dev Anand) की 103वीं बर्थ एनिवर्सरी है. उनका जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था, उन्हें हिंदी सिनेमा का एवरग्रीन स्टार कहा जाता है. इसकी वजह सिर्फ उनका हमेशा जवान नजर आना नहीं था, बल्कि उनका जिंदादिल अंदाज, काम के लिए जुनून और अपनी लाइफ को जीने का नजरिया भी था. आज उनके जन्मदिन पर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से लेकर उनके चाहने वाले याद कर रहे हैं. बताया जाता है कि उनके अंदर 88 साल की उम्र में भी 18 साल के लड़के जैसा जोश नजर आता था. उन्होंने करीब 15 साल पहले 2011 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उनका लंदन में निधन हुआ था. लेकिन उन्होंने अपनी मौत से पहले एक ख्वाहिश जाहिर थी. आइए उस बारे में जानते हैं.
आखिरी वक्त तक काम करने का था जुनून सवार
देव आनंद बॉलीवुड के ऐसे सुपरस्टार रहे हैं, जिनके लिए कभी भी उम्र काम के रास्ते में रुकावट नहीं बनी. उनका ऐसा मानना था कि जब तक शरीर में सांस है, तब तक इंसान को काम करते रहना चाहिए. वह अक्सर कहते थे, 'रिटायरमेंट नाम का शब्द मेरी डिक्शनरी में नहीं है. जिस दिन मैं काम करना बंद कर दूंगा, उस दिन मैं सचमुच मर जाऊंगा.' यही वजह थी कि उन्होंने बढ़ती उम्र के बावजूद फिल्मों से खुद को दूर नहीं किया.
अपनी मौत से कुछ महीने पहले सितंबर 2011 में उनकी फिल्म 'चार्जशीट' रिलीज हुई थी. उस समय उनकी उम्र 88 साल थी. इससे समझा जा सकता है कि वह इस उम्र में भी फिल्मों में काम कर रहे थे. उन दिनों वह फिल्में लिख रहे थे, उन्हें डायरेक्ट कर रहे थे और एक्टिंग भी कर रहे थे. जब उनसे पूछा जाता था कि इतनी ज्यादा उम्र भी वह इतनी भाग-दौड़ कैसे कर लेते हैं, तो उनका जवाब होता था कि उनके दिमाग में आइडियाज का एक समंदर है, जो उन्हें कभी बैठने नहीं देता.
मौत से पहले क्या थी देव आनंद की आखिरी ख्वाहिश
देव आनंद की सोच का सबसे खास पहलू उनकी आखिरी ख्वाहिश में नजर आता है. देव आनंद की मौत से कुछ समय पहले उनसे इंटरव्यूज में पूछा गया था कि अगर उन्हें अगला जन्म मिले, तो वह क्या बनना चाहेंगे. इस सवाल पर उन्होंने कहा था, 'मैं अगले जन्म में भी सिर्फ और सिर्फ देव आनंद बनकर ही पैदा होना चाहता हूं.' उनकी यह ख्वाहिश बताती है कि उन्हें अपनी लाइफ और अपने काम से कितना प्यार था. देव आनंद ने कहा था कि उनके पास कहानियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन समय कम पड़ रहा है. वह दोबारा देव आनंद बनकर उन अधूरी दास्ता और प्रोजेक्ट्स को पूरा करना चाहते थे, जिन्हें इस जन्म में टाइम की कमी के कारण पर्दे पर नहीं उतार पाए.
जिंदगी को जीने का कैसा था देव आनंद का नजरिया
देव आनंद की सोच को उनकी फिल्म 'हम दोनों' के फेमस गाने से भी समझा जा सकता है. 'मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया.' यह लाइनें उनकी लाइफ जीने के अंदाज से काफी मेल खाती थीं. वह बीते हुए समय में अटके रहने के बजाय आगे की बढ़ने में विश्वास रखते थे. फिल्म फ्लॉप हो या लाइफ में किसी बड़े नुकसान के बाद भी वह लंबे समय तक उसका शोक नहीं मनाते थे. उनके करीबियों के मुताबिक, किसी फिल्म के फ्लॉप होने के बाद वह अगले ही दिन नई फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम शुरू कर देते थे. उनके लिए बीता हुआ कल चला गया और वह आने वाले दिन पर फोकस करते थे.
दुनिया को अलविदा कहने से पहले दिमाग में थी फिल्म
बताया जाता है कि अपनी लाइफ के आखिरी दिनों में देव आनंद फिजिकली कुछ कमजोर जरूर हुए, लेकिन उनका हौसला और काम करने का इरादा कभी कम नहीं हुआ. वह अपनी हेल्थ में सुधार के लिए लंदन में आराम के लिए गए थे. वहां भी उनका दिमाग फिल्मों में लगा रहता था. वह अपनी अगली फिल्म की प्लानिंग कर रहे थे, जिसका नाम उन्होंने 'फॉरेन रिटर्न' सोचा था और वह इसकी स्क्रिप्ट पर काम भी कर रहे थे.लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था. 3 दिसंबर 2011 को लंदन के एक होटल में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. बताया जाता है कि वह सोते-सोते ही इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहकर चले गए. जिससे लाखों- करोड़ों का दिल टूट गया था.
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उमंग सिंघार का सरकार से सवाल, आदिवासी बच्चों को उनका अधिकार कब मिलेगा? नितिन गडकरी के बयान पर भी साधा निशाना
मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पर निशाना साधा है, उन्होंने आदिवासी बच्चों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाये हैं साथ ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर किये गए इशारे पर भी निशाना साधा है।
उमंग सिंघार ने आज अपने सोशल मीडिया एकाउंट X पर प्रदेश की भाजपा सरकार को अलग अलग मुद्दों पर घेरा है, उन्होंने इंदौर में एकलव्य स्कूल की बिल्डिंग 8 साल में भी पूरी नहीं होने पर तंज कसा है वहीं प्रदेश की डबल इंजन सरकार को लेकर भी सिंघार ने निशाना साधा ने, नेता प्रतिपक्ष ने केंद्रीय मंत्री गडकरी के बयान पर प्रदेश में भ्रष्टाचार एक आरोप लगाये।
सिंघार ने पूछा, आदिवासी बच्चों को उनका अधिकार कब मिलेगा?
उमंग सिंघार ने लिखा- आदिवासी बच्चों के अधिकारों के साथ यह कैसा अन्याय है? इंदौर में आदिवासी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए घोषित एकलव्य स्कूल 8 साल बाद भी अधूरा है। 2018 में जमीन आवंटन के बाद ₹27 करोड़ की लागत से बनने वाले स्कूल का निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ और बनी हुई बिल्डिंग भी जर्जर हो रही है, उन्होंने कहा भाजपा सरकार को अपने प्रचार की नहीं, आदिवासी बच्चों के भविष्य की चिंता करनी चाहिए। मुख्यमंत्री जी, आदिवासी बच्चों को उनका अधिकार कब मिलेगा? स्कूल की बदहाली और देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
गडकरी के बयान पर भ्रष्टाचार को लेकर उठाये सवाल
उमंग सिंघार ने लिखा- विकास का नहीं, भ्रष्टाचार का डबल इंजन है, मध्यप्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार है। एक इंजन दिल्ली में और दूसरा भोपाल में। फिर भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी खुद कह रहे हैं कि RTO अफसर नोट देखकर गलत बसों को पास करते हैं और पर ठप्पा मार देते हैं। जब आपकी अपनी सरकार के मंत्री ही सिस्टम में भ्रष्टाचार की यह तस्वीर बता रहे हैं, तो डबल इंजन सरकार आखिर कर क्या रही है? RTO में भ्रष्टाचार रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? परिवहन व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी किसकी है? जनता की जान से खिलवाड़ करने वाली गलत बसों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है?
आदिवासी बच्चों के अधिकारों के साथ यह कैसा अन्याय है?
इंदौर में आदिवासी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए घोषित एकलव्य स्कूल 8 साल बाद भी अधूरा है। 2018 में जमीन आवंटन के बाद ₹27 करोड़ की लागत से बनने वाले स्कूल का निर्माण आज तक पूरा नहीं हुआ और बनी हुई बिल्डिंग भी जर्जर हो रही है।…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 26, 2026
विकास का नहीं, भ्रष्टाचार का डबल इंजन है!
मध्यप्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार है। एक इंजन दिल्ली में और दूसरा भोपाल में। फिर भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी खुद कह रहे हैं कि RTO अफसर नोट देखकर गलत बसों को पास करते हैं और पर ठप्पा मार देते हैं।
जब आपकी अपनी सरकार के मंत्री ही…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 26, 2026
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