10 दिन पहले अचानक बिगड़ी थी मुश्ताक खान की तबीयत:4 सितंबर तक की शेरा के बेटे की फिल्म की शूटिंग, लंग कैंसर से हुआ निधन
वेलकम, आशिकी, हेरा फेरी जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में नजर आ चुके पॉपुलर एक्टर मुश्ताक खान का गुरुवार को निधन हो गया। वह 75 साल के थे और पिछले एक साल से उनका लंग कैंसर का इलाज चल रहा था। अब उनके बेटे फिल्ममेकर मोहसिन खान ने बताया है कि मुश्ताक खान 4 सितंबर तक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में मोहसिन ने कहा, "मेरे पिता एक साल से ज्यादा समय से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था। इलाज का उन पर अच्छा असर हो रहा था, लेकिन पिछले 10 दिनों में हालात बिगड़ गई थी।" आगे उन्होंने कहा, "वह ठीक हो रहे थे, लेकिन आखिरकार अल्लाह की यही मर्जी थी। उन्होंने बहुत अच्छी जिंदगी जी और अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वह मुस्कुराते हुए इस दुनिया से विदा हो गए।" मोहसिन के मुताबिक, मुश्ताक खान ने आखिरी बार 4 सितंबर को मुंबई के मड आइलैंड में शूटिंग की थी। उन्होंने कहा, "उन्होंने शेरा (सलमान खान के बॉडीगार्ड) के बेटे टाइगर (अबीर सिंह) की डेब्यू फिल्म 'टार्जन' के लिए रजत बेदी सर, चंकी पांडे सर और राजपाल यादव सर के साथ शूटिंग की थी।" कई फिल्मों में नजर आएंगे मुश्ताक खान अभिनेता की कुछ अन्य फिल्में भी रिलीज के इंतजार में हैं। मुश्ताक खान ने तेलुगु फिल्म ‘दादा’ में भी काम किया था। इस फिल्म को गोपीचंद मालिनेनी ने डायरेक्ट किया है। इसके दिसंबर में रिलीज होने की संभावना है। उन्होंने मोहसिन खान की एक हिंदी-मराठी फिल्म में भी काम किया था। फिल्म का नाम अभी तय नहीं हुआ है। इसमें एक्टर प्रथमेश परब भी नजर आएंगे। फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है। इसे आने वाले कुछ महीनों में रिलीज करने की तैयारी है। मोहसिन ने बताया कि उनके पिता ने इस फिल्म में पहली बार उनके लिए अहम भूमिका निभाई थी। मुश्ताक ने फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली थी, लेकिन डबिंग पूरी नहीं कर पाए। 250 से ज्यादा फिल्मों में किया काम मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे में जन्मे मुश्ताक खान ने अभिनय की शुरुआत थिएटर से की थी। साल 1980 में फिल्म अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1990 के दशक में वे आशिकी, सड़क, साथी, हम हैं राही प्यार के, क्रांतिवीर, राजा, मेजर साब और मन जैसी फिल्मों में नजर आए। आशिकी में दर्जी रफू मास्टर और हम हैं राही प्यार के में भगवती प्रसाद मिश्रा का उनका किरदार काफी चर्चित हुआ। इसके बाद हेरा फेरी, मुझसे शादी करोगी, गदर: एक प्रेम कथा, जोड़ी नं. 1 और राउडी राठौर जैसी फिल्मों में उन्होंने कॉमिक और सपोर्टिंग रोल निभाए। 2007 की फिल्म वेलकम में मजनू भाई के साथी बल्लू के किरदार से उन्हें खास पहचान मिली। जिसमें उनका डायलॉग 'मेरी एक टांग नकली है, मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था। एक दिन उदय भाई...' काफी मशहूर हुआ। इसके बाद वेलकम बैक, स्त्री और स्त्री 2 जैसी फिल्मों में भी वे नजर आए। फिल्मों के साथ-साथ मुश्ताक खान ने टीवी पर भी काम किया। वे अदालत, चाचा चौधरी, टेढ़े-मेढ़े सपने और कुछ रंग प्यार के ऐसे भी जैसे शोज का हिस्सा रहे। हाल के वर्षों की बात करें तो साल 2025 में वे फिल्म जाट में इंस्पेक्टर मुश्ताक के किरदार में नजर आए। इसी साल उदयपुर फाइल्स में वीरेंद्र कुमार मीणा का रोल निभाया। इसके अलावा किस किसको प्यार करूं 2 में भी काम किया। साल 2026 में वे भाभीजी घर पर हैं! फन ऑन द रन, हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं और कोकिन में नजर आए। मुश्ताक खान का हुआ था अपहरण नवंबर 2024 में मुश्ताक खान को अवॉर्ड फंक्शन के बहाने बुलाकर किडनैप कर लिया गया था। उन्हें मेरठ में एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनाने की बात कही गई थी। भरोसा जीतने के लिए बदमाशों ने उन्हें 25 हजार रुपए एडवांस भेजे और मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट टिकट भी बुक कराई। 20 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद एक कैब उन्हें मेरठ लेकर निकली। रास्ते में उन्हें दूसरी गाड़ी में बैठाया गया। इसके बाद बंदूक दिखाकर उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें बिजनौर के एक घर में ले जाकर करीब 12 घंटे तक बंधक रखा गया। बदमाशों ने 1 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी। घटना के बाद पुलिस ने मुश्ताक खान के पीए की शिकायत पर मामला दर्ज किया और जांच में लवी पाल और सार्थक सहित इस गिरोह के कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अगली सुबह अपहरणकर्ता नशे में थे और कुछ सो रहे थे। इसी दौरान मुश्ताक खान वहां से भाग निकले। पास की मस्जिद पहुंचकर उन्होंने स्थानीय लोगों से मदद मांगी। लोगों ने उनके परिवार और पुलिस से संपर्क कराया। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने उनके बैंक खाते से करीब 2.2 लाख रुपए भी निकाल लिए थे। मामले में पुलिस ने गिरोह के कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने शक्ति कपूर और राजेश पुरी समेत दूसरे कलाकारों को भी इसी तरह फंसाने की कोशिश की थी। शुक्रवार को जनाजे में शामिल हुए कई सितारे शुक्रवार दोपहर को जुमे की नमाज के बाद जनाजे की नमाज की गई। फिर यारी रोड कब्रिस्तान में मुश्ताक को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मुश्ताक खान के निधन के बाद सनी देओल, अनुपम खेर समेत फिल्म इंडस्ट्री के कई लोगों ने दुख जताया। वहीं, राजपाल यादव ने कहा कि वे निधन से करीब 2 घंटे पहले ही उनसे मिलकर आए थे।
UN में Pakistan की जबरदस्त फजीहत, Terrorism पर पूछा गया सवाल तो भाग खड़े हुए Shehbaz Sharif, Jaishankar ने पाकिस्तान को चारों खाने किया चित
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आतंकवाद को लेकर सीधे सवाल किए गए, लेकिन उन्होंने जवाब देने की बजाय वहां से भाग जाना ही बेहतर समझा। इसके एक दिन बाद संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सामने जब पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया, तो जयशंकर ने पलटकर ऐसा करारा जवाब दिया कि सवाल पूछने वाला ही कठघरे में खड़ा हो गया। जयशंकर ने दो टूक कहा, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” उधर, जयशंकर के बयान से गर्म हुए माहौल के बीच ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर एक और करारा हमला कर डाला।
हम आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को एक ‘‘कठपुतली शासन’’ करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में उसके ‘‘झूठ’’ और ‘‘छल’’ पर तीखा प्रहार किया तथा चेतावनी दी कि इस्लामाबाद की ओर से लगातार जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मामले को उठाया और 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ को दिया। शहबाज शरीफ के संबोधन के बाद भारत ने शुक्रवार रात ‘जवाब के अपने अधिकार’ का इस्तेमाल किया।
इसे भी पढ़ें: 'पाकिस्तान को आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे', संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने शहबाज़ शरीफ़ को दिया करारा जवाब
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने कहा, ‘‘हमने एक ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर कुछ पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी को अपने ही लोगों से बचाने के लिए इसी समय किलेबंद किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है। उसकी कठपुतलियां आती-जाती रह सकती हैं, लेकिन इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन करता है। पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संविधान संशोधन और उसके असली शासक को दी गई आजीवन कानूनी छूट से जाहिर होती है।’’ गहलोत ने पिछले साल नवंबर में शहबाज शरीफ सरकार द्वारा पारित उस 27वें संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए यह बात की जिसके तहत पाकिस्तान के ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी मुकदमे से आजीवन छूट दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखेगी, न कि उस रूप में जैसे उसके प्रतिनिधि झूठे तरीके से पेश करते हैं। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।’’ हम आपको बता दें कि शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में ट्रंप को उनके ‘‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ ने दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बचाई। शहबाज शरीफ ने करीब 23 मिनट के अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान जरूरी है कि दक्षिण एशिया फिर कभी 2025 के संघर्ष जैसी स्थिति में न पहुंचे।
उधर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को याद दिलाया कि शहबाज शरीफ ने ये ‘‘विचित्र टिप्पणियां’’ ऐसे समय में की हैं जब महज दो सप्ताह पहले न्यूयॉर्क और दुनिया ने 11 सितंबर के भीषण आतंकवादी हमले की 25वीं बरसी मनाई थी। गहलोत ने कहा, ‘‘इस संदर्भ को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल पास रह रहा था।’’ गहलोत ने शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने को लेकर उनकी आलोचना करते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। लेकिन अगर हमें कश्मीर की ही बात करनी है तो आइए, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान देते हैं। रावलाकोट के लोगों से बेमतलब की उन हत्याओं, बर्बर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछिए जिनका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं।’’
हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विवादित सीट को लेकर पिछले कई महीनों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे लेकर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई भी की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। गहलोत ने सीमा पार आतंकवाद की पाकिस्तान की ‘‘लंबे समय से बरकरार नीति’’ की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने पिछले साल दिखा दिया था कि ‘‘आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘हम आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद जारी रहने के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठेंगे, जिनकी बुनियाद मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी।’’ उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ द्वारा व्यक्त किए गए विचार ‘‘ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रहा है।’’ गहलोत ने कहा, ‘‘इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता पर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी व्यवस्था का एक प्रमुख आधार ईशनिंदा कानून हैं। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी दिखावटी खोखली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।’’
दूसरी ओर, जयशंकर के बयान की बात करें तो आपको बता दें कि मामला शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उस समय गरमा गया, जब जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यान्ती समुद्री परिवहन और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ की जानकारी दे रहे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से सवाल किया कि भारत पाकिस्तान में कथित आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगा? सवाल पूरा होते ही जयशंकर ने पलटवार किया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। चलिए भी।” भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वतनेनी ने भी साफ कर दिया कि जवाब सुना जा चुका है और वह बिल्कुल स्पष्ट है।
उधर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में बड़ी बड़ी बातें करने वाले शहबाज शरीफ से आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल हुआ तो वह भाग खड़े हुए। हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकारों ने उनसे सीधे पूछा— “प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?” इस पर शहबाज शरीफ ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में बाहर निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस सवाल पर भी उन्होंने चुप्पी साधी और भाग खड़े हुए। बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान भारत पर आतंकवाद के आरोप लगाने पहुंचा, लेकिन सवाल जब उसके अपने दरवाजे पर पहुंचा तो जवाब गायब हो गया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
prabhasakshi










