Renault Duster हाइब्रिड 17 अक्टूबर 2026 को होगी लॉन्च, डीजल की छुट्टी करने आ रही SUV
Renault Duster Hybrid को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. कंपनी ने इसका दमदार टीजर जारी करते हुए डीजल को अलविदा कहने का इशारा किया है. E-Tech स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ आने वाली Duster की कीमत 17 अक्टूबर को सामने आएगी. इसमें करीब 160 hp पावर और 1,000 km तक की कंबाइंड रेंज का दावा है. जानिए इसकी कीमत, माइलेज, पावरट्रेन और बुकिंग से जुड़ी पूरी जानकारी.
रिपोर्ट- सऊदी ने परमाणु बम बनाने का विकल्प खुला रखा:अमेरिका परमाणु बिजली बनाने की तकनीक दे रहा, इजराइल कर चुका विरोध
सऊदी अरब ने परमाणु बम बनाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक गोपनीय रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट अमेरिकी संसद को दी गई है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि सऊदी ने अभी परमाणु बम बनाने का फैसला नहीं किया है। यह रिपोर्ट अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नए परमाणु समझौते के बाद सामने आई है। जुलाई में हुए इस समझौते के तहत सऊदी अरब में परमाणु बिजली का ढांचा तैयार किया जाएगा। इजराइल इस समझौते का विरोध कर चुका है। ईरान ने बम बनाया तो सऊदी भी ऐसा कर सकता है सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले ही कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा। अमेरिकी अधिकारी भी लंबे समय से मानते रहे हैं कि सऊदी परमाणु हथियार बनाने में दिलचस्पी रखता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी ने बम बनाने का फैसला कर लिया है। परमाणु बिजली बनाने वाली तकनीक से हथियार का रास्ता खुल सकता है परमाणु बिजली बनाने के लिए यूरेनियम को एक खास प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। इसे यूरेनियम एनरिचमेंट कहते हैं। नए समझौते के तहत सऊदी अरब यूरेनियम को करीब 20% तक एनरिच कर सकेगा। यह परमाणु बम के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है। लेकिन समस्या यह है कि एक बार किसी देश के पास यूरेनियम को 20% तक एनरिच करने की क्षमता आ जाए, तो उसे हथियार बनाने लायक स्तर तक ले जाने में कम समय लग सकता है। इसी वजह से अमेरिकी सांसदों को डर है कि सऊदी अरब भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ सकता है। सांसदों का सवाल- सऊदी को अपने देश में एनरिचमेंट क्यों चाहिए? अमेरिकी सीनेटर एड मार्की और जेफ मर्कली समेत छह डेमोक्रेट सांसदों ने इस समझौते का विरोध किया है। उनका सवाल है कि अगर सऊदी अरब का मकसद सिर्फ परमाणु बिजली बनाना है, तो वह अपने देश में यूरेनियम एनरिच करने की सुविधा क्यों चाहता है? सांसदों ने सऊदी नेताओं के उन पुराने बयानों का भी हवाला दिया है, जिनमें ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने पर सऊदी के भी ऐसा करने की बात कही गई थी। अमेरिका बोला- समझौता परमाणु हथियार बनाने के लिए नहीं अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि समझौते का मकसद सऊदी अरब में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा विकसित करना है। अमेरिका के मुताबिक, इससे क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी और परमाणु हथियारों को फैलने से रोकने के नियमों का पालन होगा। अमेरिका और सऊदी का समझौता 30 साल का अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुआ यह समझौता 30 साल का है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में परमाणु बिजली से जुड़ा ढांचा तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। अमेरिकी संसद इस समझौते की समीक्षा कर रही है। इसके लिए संसद के पास 90 दिन का समय है। अगर इस दौरान संसद समझौते को रोकने के लिए प्रस्ताव पास नहीं करती, तो यह अपने आप लागू हो सकता है।
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