VIDEO: कांगो में विमान हादसा, 2 सैन्य अधिकारियों समेत 14 की मौत
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Bhadrapada Purnima 2026: भाद्रपद पूर्णिमा पर ऐसे करें सत्यनारायण पूजा, जानें पूजन सामग्री से लेकर पूरी विधि
Bhadrapada Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा करने और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
किसी भी पूजा में सही सामग्री के साथ विधि का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। ऐसे में अगर आप भी भाद्रपद पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले पूजा की सभी सामग्री जुटा लें। आइए जानते हैं भाद्रपद पूर्णिमा की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए और पूजन की पूरी विधि क्या है।
भाद्रपद पूर्णिमा पूजा के लिए जरूरी सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह तैयार कर लें। इसके लिए लकड़ी की चौकी, पीला या लाल कपड़ा, तांबे या पीतल का कलश, आम के पत्ते, नारियल, भगवान विष्णु/सत्यनारायण की प्रतिमा या चित्र और गणेश जी की मूर्ति रखी जा सकती है।
इसके अलावा पूजा में रोली, कुमकुम, हल्दी, गोपी चंदन, अक्षत, अबीर, गुलाल, मौली, धूप, घी, दीपक, रुई की बत्ती, पीले फूल, तुलसी दल, शमी पत्र, दूर्वा, सुपारी और पान के पत्ते रखें।
भोग के लिए पंचामृत तैयार करें। इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर या मिश्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ गेहूं के आटे या सूजी से हलवा अथवा पंजीरी भी प्रसाद के रूप में तैयार की जा सकती है। फलों में केला समेत मौसमी फल रखें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए तांबे का लोटा, जल, दूध, अक्षत, सफेद चंदन, सफेद फूल और मिश्री रख सकते हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा पर ऐसे करें सत्यनारायण पूजा
1. स्नान और व्रत का संकल्प:
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें।
2. पूजा की चौकी तैयार करें:
पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
3. कलश की स्थापना करें:
पूजा स्थल पर जल से भरा कलश रखें। इसके साथ गणेश जी, नवग्रह और कुलदेवता का ध्यान कर पूजा शुरू करें।
4. भगवान विष्णु का पूजन करें:
भगवान विष्णु को चंदन, अक्षत, फूल, मौली और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ भगवान सत्यनारायण की पूजा करें।
5. सत्यनारायण कथा का पाठ करें:
पूजा के बाद श्री सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ें या परिवार के साथ बैठकर कथा सुनें।
6. भोग और आरती करें:
कथा पूरी होने के बाद भगवान को पंचामृत, हलवा या पंजीरी का भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
7. चंद्रमा को अर्घ्य दें:
शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इसमें अक्षत, सफेद चंदन, सफेद पुष्प और मिश्री शामिल करने की परंपरा है। इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीहरि विष्णु को तुलसी प्रिय है, इसलिए पूजा में तुलसी पत्र अर्पित किया जाता है।
इसके अलावा भगवान विष्णु की पूजा में पीले फूल चढ़ाने की परंपरा भी है। वहीं शमी पत्र को भी शुभ माना जाता है। पूजा की शुरुआत में भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है।
ध्यान दें: पूजा-पाठ की विधि, सामग्री और धार्मिक मान्यताएं क्षेत्र, परिवार और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए स्थानीय पंचांग या परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा की विधि में आवश्यक बदलाव किया जा सकता है।
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