CEC Gyanesh Kumar पर कांग्रेस के आरोप, Supreme Court से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद के बीच शनिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया। रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किया गया बदलाव “पूरी तरह अवैध” है और निर्वाचन आयोग के पास इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि जुलाई, 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के बदलाव किया गया और उसमें एक नया अनिवार्य खंड जोड़ा गया, जिसमें आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल थे या नहीं। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह प्रावधान खासकर पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए बाधा पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-6 में संशोधन करने की शक्ति निर्वाचन आयोग के बजाय केंद्र सरकार के पास है और ऐसा बदलाव संबंधित नियमों में संशोधन के बिना नहीं किया जा सकता।
रमेश ने ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ का हवाला देते हुए दावा किया कि फॉर्म में बदलाव के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन और संसद को इसकी सूचना दिया जाना जरूरी था। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस बदलाव को “अवैध और अनधिकृत” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी, ताकि युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले लोग बिना परेशानी के अपना पंजीकरण करा सकें। रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में संवैधानिक परंपराओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन हुआ है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
PCOS and Sleep: पीसीओएस से बिगड़ सकती है नींद, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
PCOS and Sleep: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की समस्या और इससे जुड़े लक्षणों के बारे में तो कई महिलाएं जानती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि इसका असर आपकी नींद पर भी पड़ सकता है?
अगर पीसीओएस की समस्या के साथ तेज खर्राटे आते हैं, रात में बार-बार नींद खुलती है, सोते समय सांस लेने में परेशानी होती है या पर्याप्त नींद के बाद भी सुबह थकान बनी रहती है, तो इन संकेतों को महज थकान समझकर नजरअंदाज न करें।
ये स्लीप एपनिया जैसी समस्या की ओर इशारा करते हैं, जो पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं में अधिक देखी जाती है।
हो सकती हैं नींद से जुड़ी समस्याएं
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। इस स्थिति में सोते समय सांस की नली कुछ समय के लिए संकरी या बंद हो जाती है, जिससे सांस लेने में रुकावट आती है। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर व्यक्ति की नींद बार-बार खुलने लगती है, ताकि सांस सामान्य हो सके।
पीसीओएस-अनिद्रा का कनेक्शन
पीसीओएस और नींद में परेशानी के बीच संबंध को समझना भी जरूरी है। पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं कॉमन हैं। वहीं, लंबे समय तक अनिद्रा और स्लीप एपनिया की समस्या, शरीर में तनाव हार्मोन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकती है।
इस तरह दोनों स्थितियां एक-दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं और समस्या को बढ़ा सकती हैं। नींद की कमी का असर महिलाओं के हार्मोनल और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। लगातार अपर्याप्त या बाधित नींद से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
जिन महिलाओं में पहले से ही अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी पीसीओएस से जुड़ी परेशानियां हैं, उनके लिए खराब नींद इन समस्याओं को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
कब करें डॉक्टर से कंसल्ट
यह समझना भी जरूरी है कि नींद में खर्राटे लेना, स्लीप एपनिया का संकेत नहीं होता है। लेकिन यदि खर्राटे बहुत तेज और नियमित हैं, सोते समय आप सांस रुकने की समस्या महसूस करती हैं, रात में घुटन होती है या सांस की गति बढ़ जाती है, सुबह उठने पर सिरदर्द रहता है या पर्याप्त नींद लेने के बाद भी दिन भर नींद और थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
बैलेंस्ड डाइट-अच्छी नींद जरूरी
पीसीओएस को मैनेज करने के लिए केवल पीरियड्स को नियमित करना या वजन कम करना ही पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव का बेहतर प्रबंधन भी इसके प्रभावों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि किसी महिला में स्लीप एपनिया के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार ट्रीटमेंट करते हैं।
समझने वाली बात यह है कि अच्छी नींद केवल आराम के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल, मेटाबॉलिक और समग्र स्वास्थ्य का भी अहम हिस्सा है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों और संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
पीसीओएस लंबे समय तक चलने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जीवनशैली और चिकित्सकीय देखभाल के जरिए इसके प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. आस्था गुप्ता (सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट)
प्रस्तुति: निकिता चौहान
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