UNSC में UNHCR प्रमुख Barham Salih की अपील, संघर्ष रोकें ताकि 11.7 करोड़ विस्थापित लौट सकें घर
संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थी मामलों के प्रमुख बरहम सालेह ने दुनियाभर के देशों से आग्रह किया कि वे संघर्षों और संकटों को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करें ताकि अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर 11.7 करोड़ से अधिक लोग घर वापस लौट सकें और उनकी भावी पीढ़ियों को विस्थापित होकर किसी दूसरे देश में न रहना पड़े। सालेह ने पिछले साल दिसंबर में शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त चुने जाने के बाद सुरक्षा परिषद को पहली बार संबोधित किया। उन्होंने 15 सदस्यों वाली परिषद से कहा कि उन पर (सदस्य देशों पर) ‘‘शांति कायम करने में मदद करने की विशेष जिम्मेदारी’’ है।
वर्ष 2018 से 2022 तक इराक के राष्ट्रपति रहे सालेह स्वयं भी शरणार्थी रह चुके हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक महासभा से इतर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (यूएनएचसीआर) जैसे मानवीय सहायता संगठनों के कर्मी संघर्षों के दुष्परिणामों से हर दिन निपटते हैं, लेकिन वे शांति स्थापित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने का दायित्व संभालने वाली सुरक्षा परिषद को सौंपी गई है।
सालेह ने उन विभिन्न संघर्षों का उल्लेख किया जिनके कारण लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि सूडान में युद्ध दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन संकट बना हुआ है और देश के भीतर एवं बाहर कुल 1.2 करोड़ लोग विस्थापित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक यह युद्ध जारी रहेगा, लोग पलायन करते रहेंगे।’’ सालेह ने कहा कि कांगो में ‘‘कई पीढ़ियां संघर्ष और हिंसा के दौर से गुजर चुकी हैं’’ और अब इबोला के बढ़ते संकट ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण देश के भीतर लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि लाखों अन्य लोगों को दूसरे देशों में शरण लेनी पड़ी है। शरणार्थी मामलों के प्रमुख ने माना कि लंबे समय से विस्थापित और मानवीय सहायता पर निर्भर शरणार्थियों की संख्या 2035 तक आधी करने का उनका लक्ष्य ‘‘महत्वाकांक्षी’’ है। उन्होंने कहा कि यूएनएचसीआर का लक्ष्य होना चाहिए कि ‘‘जहां संभव हो, वहां विस्थापन को रोका जाए, जहां लोग विस्थापित हो चुके हैं वहां ऐसी परिस्थितियां बनाई जाएं कि लोग सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।
India US Trade Agreement पर 90 फीसदी काम पूरा, अमेरिकी अधिकारी बोले जल्द हो सकता है समझौता
(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 26 सितंबर अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को ‘‘एक नयी ऊंचाई’’ पर ले जाएगा। अधिकारी ने कहा कि व्यापार समझौते पर दोनों देश ‘90 प्रतिशत से अधिक’ काम पूरा कर चुके हैं और अब केवल कुछ अंतिम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। ‘पीटीआई’ की ओर से यह पूछे जाने पर कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कब तक होने की उम्मीद है, अधिकारी ने कहा, ‘‘मैं यही कहूंगा कि इंतजार कीजिए, हम बहुत करीब हैं।
90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और अब केवल कुछ अंतिम चीजों पर काम किया जा रहा है इसलिए उम्मीद है कि आपको बहुत जल्द इस पर कुछ देखने को मिलेगा।’’ अधिकारी ने कहा, ‘‘यह समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को, खासकर व्यापार के क्षेत्र में वास्तव में एक नयी ऊंचाई पर ले जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अब हम समझौते के बहुत करीब हैं और जब यह समझौता हो जाएगा, तो यह निश्चित रूप से बहुत बड़ी और उत्साहजनक उपलब्धि होगी।’’ अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अक्टूबर में होने वाली भारत यात्रा के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, ‘‘यह यात्रा भारत-अमेरिका साझेदारी में लगातार हो रही प्रगति और दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्क का हिस्सा है।’’ अमेरिका के फ्लोरिडा में दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। इस बारे में अधिकारी ने कहा कि उस दौरान कुछ बड़े ऐलान भी हो सकते हैं। अधिकारी ने कहा कि इस साल क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) से संबंधित विदेश मंत्रियों की बैठक तीसरी बार होने जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अभूतपूर्व है। इससे पहले विदेश मंत्रियों की एक वर्ष में इतनी बार बैठक नहीं हुई। मुझे लगता है कि इससे साफ होता है कि हम इस राजनयिक समूह को कितना महत्व दे रहे हैं।
भारत के साथ-साथ जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसे काफी अहमियत देते हैं इसलिए इस संबंध में आगे होने वाले घटनाक्रम पर भी नजर रखिए।’’ भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के बारे में पूछे जाने पर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह अमेरिका और भारत दोनों की ‘‘बहुत बड़ी प्राथमिकता’’ है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी घटनाओं के कारण आईएमईसी की प्रगति को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है, लेकिन अगर क्षेत्र में स्थिरता आती है तो परियोजना फिर तेजी से आगे बढ़ सकती है। अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत और अमेरिका, दोनों आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सामने आई चुनौतियों के कारण इसमें रुकावट आई।
प्रशासन की शुरुआत से ही हम इजराइल-गाजा संघर्ष से जुड़ी स्थिति से जूझ रहे थे, जिससे निश्चित रूप से यह प्रक्रिया रुक गई।’’ उन्होंने कहा,‘‘असल में यह पूरा मामला पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर निर्भर है। जब वहां स्थिरता आएगी, तब आप आईएमईसी को तेजी से आगे बढ़ते हुए देखेंगे।
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