Sawan Somvar Vrat Katha: सावन सोमवार व्रत के दिन जरूर पढें माता पार्वती और भोलेनाथ की यह व्रत कथा
Sawan Somvar Vrat Katha: भगवान शिव को समर्पित मास सावन का प्रारंभ हो चुका है. आज श्रावण 2026 का पहला सोमवार है. इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ती के साथ उनकी पूजा करेंगे और व्रत रखेंगे. बता दें कि सावन महीने के सोमवारों की महत्वता बहुत अधिक होती है. जो लोग अपने जीवन में परेशानियों और तकलीफों का सामना कर रहे हैं, उन्हें सावन मास में सोमवार के दिन उपवास जरूर करना चाहिए. धन की कमी, मनाचाहा वरदान, मानसिक शांति और करियर में रुकावटों आदि को दूर करने के लिए आप सोमवार के व्रत रख सकते हैं. मान्यता है कि जो भी साधक सावन सोमवार के व्रत रखते हैं उन्हें इसकी कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है. आइए पढ़ते हैं सावन सोमवार की व्रत कथा.
पढ़ें सावन सोमवार व्रत कथा
बहुत समय पहले की बात है जब एक नगर में एक धनी व्यापारी रहा करता था. उसके पास धन-दौलत आदि की कोई कमी कभी नहीं थी. मगर संतान सुख न मिलने की वजह से वह हमेशा अंदर ही अंदर दुखी रहता था. अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए वह प्रत्येक सोमवार को व्रत करता था और माता पार्वती और शिव जी की पूजा करता था. व्यापारी की सच्ची भक्ति देख माता पार्वती का मन प्रसन्न हो गया और उन्होंने शिव जी से भक्त की इच्छा पूर्ण करने के लिए कहा. तब शिवजी ने समझाया की हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होते हैं. उसके भाग्य में जो होगा, उसे वही मिलेगा. फिर भी माता पार्वती के आग्रह को देख भगवान शिव जी ने व्यापारी को वरदान दे दिया. मगर साथ ही यह भी कहा कि उसके बच्चे की आयु मात्र 12 वर्ष ही होगी.
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व्यापारी के घर जन्मा पुत्र
कुछ समय बीतने के बाद व्यापारी के घर पर एक सुंदर पुत्र ने जन्म लिया. जब बालक लगभग 11 साल का हुआ, तो उसे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया गया. व्यापारी ने बालक को उसके मामा के साथ भेज दिया और जाते समय निर्देश दिया कि मार्ग में जहां भी संभव हो, धार्मिक यज्ञ कराएं और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करते हुए आगे बढ़ें.
राजकुमारी का विवाह और सत्य की जीत
मामा-भांजे की यात्रा के दौरान वे दोनों एक नगर में पहुंचे, जहां वहां की राजकुमारी के विवाह की तैयारियां चल रही थीं. जिस राजकुमार से राजकुमारी का विवाह तय हुआ था, वह एक आंख से कमजोर था. राजकुमार के पिता ने इस बात को छिपाने के लिए एक छल रचा- उन्होंने व्यापारी के सुंदर और गुणवान पुत्र को दूल्हा बनाकर विवाह के मंडप में बैठा दिया और राजकुमारी से उसका विवाह करवा दिया.
व्यापारी का पुत्र अत्यंत सत्यवादी और ईमानदार था. उसने अवसर पाते ही राजकुमारी की ओढ़नी पर सच्चाई लिख दी कि उसका वास्तविक पति एक आंख से कमजोर राजकुमार है और वह सिर्फ छलावे के कारण इस मंडप में बैठा था. जब राजकुमारी और उसके परिवार को यह सत्य पता चला, तो उन्होंने राजकुमारी को विदा करने से इनकार कर दिया और बारात बिना दुल्हन के ही लौट गई.
काशी यात्रा और शिवजी की कृपा
इसके बाद बालक अपने मामा के साथ काशी पहुंच गया. वहां उसने नियमपूर्वक अपनी शिक्षा प्रारंभ की और साथ ही यज्ञ-अनुष्ठान भी जारी रखे. समय का चक्र चलता रहा और जिस दिन बालक की आयु 12 वर्ष पूरी हुई तो अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसके प्राण चले गए. अपने भांजे को मृत देखकर मामा भी शोक में डूब गए और बिलख-बिलख कर रोने लगे.
उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहां से गुजर रहे थे. माता पार्वती से उस व्यक्ति का करुण रोदन सहन नहीं हुआ और उन्होंने भगवान शिव से बालक को पुनः जीवित करने का आग्रह किया. महादेव ने प्रारंभ में विधि का विधान बताते हुए कहा कि इसकी आयु पूर्ण हो चुकी है, किंतु माता पार्वती के अपार वात्सल्य और करुणा को देखकर उन्होंने बालक को नवजीवन प्रदान कर दिया.
घर वापसी और स्वप्न दर्शन
शिक्षा पूर्ण करने के बाद, जब वह बालक अपने मामा के साथ पुनः अपने नगर की ओर लौटा. मार्ग में वे उसी नगर में ठहरे जहां उसका विवाह हुआ था. राजकुमारी के पिता ने उसे तुरंत पहचान लिया और अत्यंत आदर-सत्कार के साथ अपनी पुत्री को उसके साथ विदा कर दिया.
जब वह अपने माता-पिता के पास पहुंचा, तो पुत्र को जीवित और सर्वगुण संपन्न बहू के साथ देखकर उनकी प्रसन्नता की सीमा नहीं. उसी रात्रि भगवान शिव ने व्यापारी को स्वप्न में दर्शन दिए और कहा- तुम्हारे सोमवार व्रत के निष्ठापूर्वक पालन और सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारे पुत्र को नया जीवन और दीर्घायु प्रदान की है.
कथा का सार
इस कथा से शिक्षा मिलती है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की उपासना करते हैं, महादेव उनके जीवन के समस्त कष्टों को हर लेते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
शिव जी की आरती (Lord Shiva Aarti Lyrics in Hindi)
ऊं जय शिव ओंकारा भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध आरती है। यह प्रसिद्ध आरती भगवान शिव से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों पर गायी जाती है। आरती के समय दीपक द्वारा भगवान शिव की पूजा करते हुए सभी भक्तों द्वारा इस प्रार्थना को गाया जाता है।
ऊं जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्येये तीनों एका॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंगा बहत है,गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरतीजो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥
ऊं जय शिव ओंकारा॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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