Butter Naan Recipe: तंदूर के बिना लोहे के तवे पर बनाएं स्वादिष्ट Butter Naan और Garlic Naan, नोट करें Recipe
रेस्टोरेंट या ढाबे पर जाने पर गर्मागर्म और मक्खन से लिपटी नान खाने का भला किसका मन नहीं होता है। पनीर की सब्जी, दाल मखनी और छोले के साथ बटर नान मिले, तो खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है। लेकिन अधिकतर लोग सोचते हैं कि घर पर परफेक्ट और सॉफ्ट नान नहीं बनाया जा सकता है, यह सिर्फ रेस्टोरेंट में ही मिलता है। लेकिन आप बिना किसी झंझट के कम समय में घर पर रेस्टोरेंट स्टाइल गर्मागर्म और मुलायम नान बनाकर तैयार कर सकती हैं और इसको आसानी से लोहे के तवे पर बनाया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको घर पर स्वादिष्ट बटर नान बनाने के बारे में बताने जा रहे हैं।
सामग्री
मैदा - 2 कप
दही - 1/2 कप
चीनी - 1 छोटी चम्मच
नमक - 1/2 छोटी चम्मच
बेकिंग सोडा - एक चुटकी
बेकिंग पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच
तेल - 2 छोटी चम्मच
गुनगुना पानी - आटा गूंथने के लिए आवश्यकतानुसार
मक्खन
बारीक कटा हरा धनिया
बारीक कटा लहसुन
ऐसे बनाएं स्वादिष्ट बटर नान
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा, चीनी, नमक, बेकिंग सोडा, बेकिंग पाउडर को अच्छे से मिला लें। फिर इसमें दही और तेल डाल दें और गुनगुने पानी से मैदा को नरम गूंथ लें। जब आटा गूंथ जाए, तो ऊपर से थोड़ा तेल लगाकर चिकना कर लें। आटे को करीब 1-2 घंटे के लिए रेस्ट पर छोड़ दें, जिससे कि यह फर्मेंट हो जाए और नॉन सॉफ्ट बने। समय पूरा होने के बाद आटे को मसल लें। फिर छोटी-छोटी लोइयां बना लें और लोई को मैदे की मदद से लंबा या अंडाकार बेल लें।
अगर गार्लिक नान बनाना चाहती हैं, तो ऊपर से धनिया और कटा लहसुन लगाकर बेलन से चिपका दें। अब नान के पिछले हिस्से पर पानी लगाएं और तवा को तेज आंच पर रखें। इसको बनाने के लिए लोहे के तवे का इस्तेमाल करें। पानी लगी साइड वाली नान को गर्म तवे पर चिपका दें कुछ ही सेकेंड में आप देखेंगे की नान से बुलबुले उठ रहे हैं। फिर तवा को उल्टा करें और आंच पर घुमा-घुमा कर सेंके।
इस पर जब ब्राउन-गोल्डन और तंदूरी स्पॉट्स आ जाएं, तो सावधानी से उतारें और फौरन बटर लगा दें। इस आसान तरीके से आपका रेस्टोरेंट स्टाइल सॉफ्ट बटर नान तैयार हो जाएगा। इसको आप अपनी पसंदीदा सब्जी के साथ खा सकते हैं।
खास टिप्स
आटा गूंथने के दौरान हमेशा गुनगुन पानी का यूज करें। इससे खमीर उठने में आसानी होती है।
आटे को गूंथकर कम से कम 1 घंटे का रेस्ट दें।
नान सेंकने के दौरान हमेशा लोहे के तवे का इस्तेमाल करें।
नान उतारते ही उस पर बटर लगाएं। इससे नान लंबे समय तक मुलायम बनी रहती है।
IND vs JPN T20I: Umpire के फैसले पर विवाद, जानिए क्या है Reverse Hit का Wide Rule
सानो में बारिश की वजह से छोटे किए गए इकलौते T20I मैच में, जापान के खिलाफ़ भारत आखिरी ओवर में अंपायर के फैसले में सुधार के बाद मुश्किल से जीत पाया। इस सुधार से भारत की दो रन से जीत पक्की हुई और T20 क्रिकेट में सबसे कम स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव करने का रिकॉर्ड भी बना। खास बात यह है कि जापान को चार गेंदों पर आठ रनों की ज़रूरत थी, तभी अलेक्जेंडर शिराई-पैटमोर ने अक्षर पटेल की गेंद पर रिवर्स-हिट मारने की कोशिश की। गेंद उस तरफ से गुज़री जो उनके शुरुआती स्टांस के हिसाब से लेग-साइड होती, इसलिए स्ट्राइकर-एंड के अंपायर क्रिस थर्गेट ने इसे वाइड करार दिया।
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इस फैसले पर भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और खिलाड़ियों ने इस पर सवाल उठाए, क्योंकि पिछले लगभग एक दशक से लिमिटेड-ओवर्स इंटरनेशनल मैचों में इस तरह की गेंदों को वाइड नहीं माना जाता रहा है। विवाद तब और बढ़ गया जब अगली गेंद पर भी वैसी ही गेंद को वाइड करार दिया गया। उस फ़ैसले के बाद जापान को चार गेंदों पर छह रन की ज़रूरत रह गई। हालाँकि, खेल आगे बढ़ने से पहले लेग अंपायर क्रिस ब्राउन ने दखल दिया और थरगेट को दूसरे वाइड फ़ैसले में सुधार करने का निर्देश दिया। थरगेट ने अपना फ़ैसला बदल दिया, जिससे जापान को तीन गेंदों पर सात रन की ज़रूरत पड़ गई। आख़िरकार जापान लक्ष्य हासिल नहीं कर सका और भारत ने दो रन से जीत दर्ज की।
इस बीच, वाइड कॉल से जुड़े नियम रिवर्स-हिट और स्विच-हिट के लिए खास दिशा-निर्देश देते हैं। जब कोई बल्लेबाज़ इनमें से कोई भी स्टांस अपनाता है, तो वाइड तय करने के लिए विकेट के दोनों तरफ़ के हिस्से को 'ऑफ़ साइड' माना जाता है। इसलिए, वाइड करार दिए जाने के लिए गेंद को बाहरी स्टंप से 75 सेंटीमीटर दूर से गुज़रना ज़रूरी होता है। यह नियम तब भी लागू होता है जब बल्लेबाज़ बिना ग्रिप बदले 'रिवर्स-हिट' करे या ग्रिप बदलकर 'स्विच-हिट' करे। इसमें यह भी कहा गया है कि स्टांस बदलने का समय नियम को नहीं बदलता; यानी गेंदबाज़ के गेंद छोड़ने के बाद बल्लेबाज़ की हरकत से यह नियम खत्म नहीं होता।
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दिलचस्प बात यह है कि मैच में न तो टीवी अंपायर था और न ही DRS। फिर भी, ICC के नियमों के मुताबिक, ऑन-फील्ड अंपायर अगली गेंद फेंके जाने से पहले दूसरे अंपायर से सलाह करके अपना फ़ैसला बदल सकता है। आखिरकार, पहला 'वाइड' फ़ैसला बदला नहीं गया, शायद इसलिए क्योंकि खेल जारी रहने से पहले शुरुआती फ़ैसले में दखल देने का बहुत कम मौका था। बाद में किए गए सुधार ने मैच के आखिरी दौर में उसी गलती को असर डालने से रोक दिया।
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