NIA कोर्ट ने PFI के 4 सदस्यों को शशिकुमार मर्डर केस में सुनाई उम्रकैद
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में 2016 में हिंदू मुन्नानी नेता सी. शशिकुमार की हत्या के मामले में प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के चार सक्रिय सदस्यों को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में पीएफआई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद संगठन के सदस्यों को सजा सुनाए जाने का एनआईए का यह पहला मामला है। एनआईए द्वारा जारी बयान के अनुसार, चेन्नई के पूनामल्ली स्थित विशेष अदालत ने सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
बयान में कहा गया कि हिंदू मुन्नानी के प्रवक्ता सी. शशिकुमार की 22 सितंबर 2016 को कोयंबटूर में धारदार हथियारों से वार कर हत्या कर दी गई थी। इस लक्षित हत्या का मुख्य उद्देश्य समाज के एक वर्ग में दहशत पैदा करना और क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैलाना था। इस हत्याकांड के बाद कोयंबटूर शहर और कोयंबटूर ग्रामीण सहित तमिलनाडु के छह जिलों में बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई थी, जिसके बाद राज्य पुलिस ने 300 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की थीं।
शुरुआत में मामले की जांच कोयंबटूर के थुडियालुर थाने और उसके बाद तमिलनाडु अपराध शाखा-अपराध अन्वेषण विभाग (सीबी-सीआईडी) ने की थी। इसके बाद केंद्र सरकार के आदेश पर जनवरी 2018 में मामला एनआईए को सौंप दिया गया। एनआईए की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीएफआई के सक्रिय सदस्य रहते हुए आपराधिक साजिश रची और हत्या को अंजाम दिया।
विस्तृत जांच के बाद एनआईए ने पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और दो पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। मामले की सुनवाई 2019 में शुरू हुई थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 75 गवाहों और बचाव पक्ष के दो गवाहों से सवाल-जवाब किए गए।
अदालत ने चारों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 153-ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं 16, 18 और 20 के तहत दोषी ठहराया। वहीं, विशेष अदालत ने एक सह-आरोपी अबू उर्फ सैयद अबुताहिर को बरी कर दिया। एनआईए ने कहा कि वह फैसले की समीक्षा कर रही है और बरी किए गए आरोपी के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने के सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
Earbuds छोड़ Wired Earphones और MP3 Player अपना रहे युवा, डिजिटल थकान बनी वजह
आज के आधुनिक दौर में टेक्नोलॉजी काफी बढ़ गई है। जबसे से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर चीज काफी आसान हो गई है। आजकल देखा जा रहा है कि हर वक्त कनेक्टेड रहने की यह मजबूरी से अब लोग दूर जा रहे हैं, लोगों की डिजिटल थकान बढ़ती जा रही हैं।
अब लोग टेक मार्केट के दिलचस्प ट्रेंड से दूर भाग रहे हैं। लोग स्मार्टफोन्स के हाई-टेक फीचर्स को साइड करके वापिस पुराने गैजेट्स की तरफ बढ़ रहे हैं, जो भागदौड़ की जिंदगी के बीच कुछ सुकून के पल दे रहा है।
वायर्ड ईयरफोन्स और MP3 प्लेयर्स की तरफ बढ़ रहे
आज के समय में युवा Earbuds से हटकर अब वायर्ड ईयरफोन्स की तरफ बढ़ रहे हैं। लोग अब ऑफलाइन MP3 प्लेयर को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना रहे हैं। इस बीच, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड 'बोट' (boAt) के मार्केटिंग मैनेजर राघव शाह ने बताया है कि, हाल ही के महीनों में वायर्ड ईयरफोन और डिजिटल ऑडियो प्लेयर खरीदने वाले नए ग्राहकों की तादाद लगभग 8 गुना बढ़ गई है।
इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह शांति की तलाश। लोग संगीत सुनते समय व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ई-मेल के लगातार बजने वाले नोटिफिकेशन से परेशान हो चुके है। बिना किसी डिस्टरबेंस के म्यूजिक एन्जॉय करना चाहते हैं।
बढ़ती मांग के हैरान करने वाले आंकड़े:
वायर्ड ऑडियो
इन प्रोडक्ट्स पर नए ग्राहकों में करीब 10 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है।
कॉम्पैक्ट कैमरा
आजकल कैमरों की मांग और सप्लाई का अनुपात 10:1 के स्तर पर पहुंच गया है।
शिपमेंट
इस साल 2025 में दुनिया भर में कॉम्पैक्ट कैमरा शिपमेंट में 29.6% का इजाफा देखा गया है।
नई पीढ़ी को क्यों भा रहे हैं पुराने गैजेट्स?
अक्सर लोग इन्हें नॉस्टैल्जिया मानकर खारिज कर देते हैं, लेकिन जिन युवाओं ने कभी आईपॉड या पुराने वॉकमैन देखे तक नहीं, उनके लिए यह एक फ्रेश और नया अनुभव है। वहीं, टेक्स एक्सपर्ट मानते हैं कि नई पीढ़ी का यह तकनीकी का विरोध नहीं, बल्कि उस पर अपना नियंत्रण से हटकर सोची-समझी कोशिश है।
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