Supreme Court ने GST अधिकारियों को वकील के जब्त डेटा का विश्लेषण 28 सितंबर तक रोकने का दिया निर्देश
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों से कहा कि वे वकील पुनीत बत्रा के कार्यालय से जब्त किए गए डेटा का विश्लेषण 28 सितंबर तक नहीं करें। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने अधिकारियों की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से कहा कि जब तक अदालत वकील की याचिका पर सुनवाई नहीं कर लेती, तब तक कोई कार्रवाई न करें। बत्रा ने दिल्ली उच्च न्यायलय के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि अगर इस बात के प्रथमदृष्टया साक्ष्य हों कि किसी वकील ने कोई अपराध किया है, तो कानून लागू करने वाली एजेंसियां उसके दफ्तर की तलाशी ले सकती हैं।
शुरुआत में ही न्यायमूर्ति दत्ता ने साफ किया कि उन्होंने केस फाइल नहीं देखी हैं, जो उन्हें देर रात मिली थीं। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की सुनवाई 28 सितंबर को की जाए। बत्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने बताया कि जांच एजेंसी ने बत्रा को 28 सितंबर के लिए समन भेजा है।
उन्होंने पीठ से मामले की सुनवाई करने का आग्रह किया। हरिहरन ने कहा, उन्होंने सोमवार के लिए समन भेजा है। आप आदेश दे सकते हैं कि कोई सख़्त कार्रवाई न की जाए।
पीठ ने राजू से कहा कि सोमवार तक कोई सख़्त कार्रवाई न करें। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एजेंसी सिर्फ़ डेटा का विश्लेषण कर रही थी और यह वकील-मुवक्किल के रिश्ते का मामला नहीं है। पीठ ने कहा, आप तथ्य जानते हैं; हम नहीं।
सोमवार तक कुछ न करें। बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ वकील विकास सिंह और एन. हरिहरन की दलीलों पर ध्यान दिया और दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें बत्रा के कार्यालय में जीएसटी अधिकारियों की तलाशी और उनके कंप्यूटर को ज़ब्त करने को सही ठहराया गया था। सिंह ने ज़ब्त किए गए कंप्यूटर से बत्रा के मुवक्किलों के बारे में गोपनीय जानकारी वाले डेटा तक अधिकारियों की पहुंच को लेकर चिंता जताई।
सिंह ने कहा था, कंप्यूटर ज़ब्त कर लिए गए हैं। उनमें दर्ज सामग्री देखी जाएगी। इससे गोपनीयता का उल्लंघन होगा।
मणिपुर में फिर 6 महीने AFSPA, नागालैंड के 9 जिले अशांत क्षेत्र घोषित, MHA ने जारी की अधिसूचना
केंद्र सरकार ने अशांत हालात को देखते हुए नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर के कुछ खास इलाकों में 'आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट' (AFSPA) को 1 अक्टूबर से अगले छह महीनों के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) की गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर इसे पहले वापस नहीं लिया गया, तो ये कानून इन इलाकों में 1 अक्टूबर से छह महीने तक लागू रहेगा।
मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में AFSPA बढ़ाया गया
मणिपुर में पांच ज़िलों के 13 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों को छोड़कर पूरे राज्य में AFSPA लागू किया गया है। जिन इलाकों को इससे बाहर रखा गया है, वे इम्फाल वेस्ट ज़िले के इम्फाल, लैम्फेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई और वांगोई पुलिस स्टेशनों; इम्फाल ईस्ट के पोरोमपट, हेइंगांग और इरिलबुंग पुलिस स्टेशनों; थोउबल ज़िले के थोउबल पुलिस स्टेशन; बिष्णुपुर ज़िले के बिष्णुपुर और नामबोल पुलिस स्टेशनों; और काकचिंग ज़िले के काकचिंग पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। नागालैंड में AFSPA को नौ ज़िलों तक बढ़ा दिया गया है: दीमापुर, न्यूलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफायर, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी। नोटिफ़िकेशन के अनुसार, इस एक्ट की धारा 3 के तहत इन्हें "अशांत क्षेत्र" घोषित किया गया है। इस नोटिफ़िकेशन में नागालैंड के पाँच अन्य ज़िलों - कोहिमा, मोकोकचुंग, लॉन्गलेन्ग, वोखा और ज़ुनहेबोटो - के 21 पुलिस स्टेशनों के अंतर्गत आने वाले इलाके भी शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश में, AFSPA को तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों में बढ़ा दिया गया है।
अगले साल नॉर्थ-ईस्ट से AFSPA हटाया जाएगा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले कहा था कि आर्म्ड फोर्सेस (स्पेशल पावर्स) एक्ट, यानी AFSPA, को अगले साल एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे नॉर्थ-ईस्ट से हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा मुझे पूरा भरोसा है कि एक-दो राज्यों को छोड़कर, हम अगले साल पूरे नॉर्थ-ईस्ट से AFSPA को पूरी तरह हटा पाएंगे। आज भी, नॉर्थ-ईस्ट का 80 प्रतिशत से ज़्यादा इलाका AFSPA से मुक्त हो चुका है। इस MoU (समझौता ज्ञापन) पर साइन करने को एक ऐतिहासिक पल बताते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित नॉर्थ-ईस्ट के विज़न में आ रही आखिरी रुकावट को दूर कर दिया है। इस MoU का मकसद असम-नागालैंड बॉर्डर पर मौजूद विवादित इलाके (DAB) में तेल और खनिजों की खोज करना है।
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मणिपुर में गोलियों से छलनी चार शव मिले
शुक्रवार तड़के मणिपुर के कामजोंग ज़िले से चार लोगों के गोलियों से छलनी शव बरामद किए गए। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए लोगों वारेइशिम जाजो, फामी जाजो, बेटरसन जाजो और निंगथेम काशक -- का संबंध तंगखुल नागा समुदाय से था। मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने इस हत्या की निंदा करते हुए कहा कि "हमारे समाज में हिंसा की ऐसी घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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