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कर्नाटक का लक्ष्य: मातृ मृत्यु दर 70 से नीचे लाना, रोकी जा सकने वाली मौतों को जीरो करने का रोडमैप तैयार

बेंगलुरु, 25 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शुक्रवार को राज्य में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाने की प्रतिबद्धता को दोहराया। विभाग ने इस दौरान मातृ मृत्यु को शून्य तक पहुंचाने के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से एक रोडमैप का अनावरण किया।

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) कार्यक्रम के तहत सुमन रोडमैप 2030 पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में इस रोडमैप पर चर्चा की गई। कार्यशाला का विषय था रोडमैप से परिणाम तक: रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को शून्य तक पहुंचाने की दिशा में कर्नाटक की यात्रा को गति देना।

स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कार्यशाला का उद्घाटन किया और अध्यक्षीय भाषण दिया। उन्होंने राज्य भर में गुणवत्तापूर्ण, समय पर और सम्मानजनक मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, 2022-24 के नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) अनुमान के मुताबिक, कर्नाटक में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 73 है। राज्य ने इस अनुपात को 70 से नीचे लाने का तत्काल लक्ष्य निर्धारित किया है और साथ ही रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है।

इस रोडमैप का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा कवरेज से गुणवत्ता, जोखिम पहचान से समय पर हस्तक्षेप, कार्यक्रम कार्यान्वयन से मापने योग्य परिणाम और राज्य स्तरीय प्रगति से जिला स्तरीय जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करना है।

राज्य मातृ स्वास्थ्य देखभाल के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाएगा, जिसकी शुरुआत गर्भधारण पूर्व देखभाल से होगी और गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक जारी रहेगी। गर्भावस्था से पहले एनीमिया, पोषण संबंधी कमियों, गैर-संक्रामक रोगों और अन्य जोखिम कारकों की पहचान और प्रबंधन पर अधिक जोर दिया जाएगा।

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए, विभाग पहचान और जोखिम वर्गीकरण से लेकर रेफरल, उपचार, फॉलो-अप और सुरक्षित प्रसव तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की योजना बना रहा है।

रोडमैप में प्रसवोत्तर रक्तस्राव (पीपीएच), उच्च रक्तचाप आपात स्थिति और सेप्सिस सहित प्रसूति आपात स्थितियों के लिए तैयारियों पर भी जोर दिया गया है। स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक दवाओं, उपकरणों, प्रशिक्षित कर्मियों, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन परिवहन और रेफरल प्रणालियों से मजबूत किया जाएगा।

मातृ मृत्यु निगरानी और प्रतिक्रिया (एमडीएसआर) प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा। विभाग ने कहा कि मातृ मृत्यु समीक्षाओं में केवल दस्तावेजीकरण से परे जाकर मूल कारणों की पहचान पहचानना, सुधारात्मक कार्रवाई शुरू करना और इसी तरह की मौतों को रोकने के लिए अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करना शामिल होना चाहिए।

--आईएएनएस

एमएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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उत्तराखंड में मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट, CM धामी की अपील- चेतावनियों का पालन करें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 एवं 27 सितंबर को प्रदेश के विभिन्न जनपदों में मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट को गंभीरता से लेते हुए प्रदेशवासियों एवं पर्यटकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि रेड अलर्ट की अवधि में अनावश्यक यात्रा से बचें और बहुत जरूरी होने पर ही मौसम एवं सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद यात्रा करें. उन्होंने पर्यटकों से भी अपील की कि मौसम की स्थिति को देखते हुए संवेदनशील एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें.

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के दौरान नदी-नालों, गाड़-गदेरों, बरसाती धाराओं एवं जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास न जाएं और तेज बहाव में प्रवेश करने का प्रयास न करें. पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए संवेदनशील सड़कों एवं स्थानों पर विशेष सावधानी बरतें. उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि बच्चों को नदी-नालों एवं अन्य जोखिम वाले स्थानों के आसपास न जाने दें.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभागों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहते हुए संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें, इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से दुरुस्त रखी जाएं. राहत एवं बचाव दल, आवश्यक उपकरण, जेसीबी एवं अन्य मशीनरी को रणनीतिक स्थानों पर तैयार रखने के साथ ही सभी संबंधित विभागों के बीच निरंतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए.

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से नदी-नालों के जलस्तर, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, पर्वतीय मार्गों, चारधाम यात्रा मार्गों एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि मौसम की स्थिति को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी पहले से सुनिश्चित रखी जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. उन्होंने आमजन से अपील की कि घबराएं नहीं, लेकिन पूरी सतर्कता बरतें तथा मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों एवं दिशा-निर्देशों का पालन करें. किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन को तत्काल सूचित करें और स्वयं भी सुरक्षित रहें तथा दूसरों को भी सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करें.

 

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