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Parenting Tips: बच्चा छोटी-छोटी बातों के लिए करता है जिद? डांटने के बजाय अपनाएं ये आसान तरीके

Parenting Tips: बच्चों का अपनी पसंद की चीज के लिए जिद करना आम व्यवहार है। खिलौना चाहिए, मोबाइल चाहिए, बाहर जाना है या पसंद का खाना खाना है, मन की बात पूरी न होने पर कई बच्चे रोने या जिद करने लगते हैं। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन अगर बच्चा हर छोटी बात पर जिद करने लगे तो माता-पिता के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो सकती है।

बच्चे की जिद को सिर्फ डांटकर या सजा देकर खत्म करने की कोशिश करने के बजाय उसके व्यवहार को समझना जरूरी है। कई बार बच्चा ध्यान पाने, अपनी बात मनवाने या किसी भावना को व्यक्त करने के लिए जिद करता है। ऐसे में माता-पिता का शांत रहना, स्पष्ट नियम बनाना और बच्चे को विकल्प देना धीरे-धीरे इस आदत को कम करने में मदद कर सकता है।

पहले समझें जिद की वजह
बच्चा किस स्थिति में सबसे ज्यादा जिद करता है, इस पर ध्यान दें। भूख, थकान, नींद पूरी न होना, बोरियत या माता-पिता का पर्याप्त ध्यान न मिलना भी बच्चे के चिड़चिड़े व्यवहार की वजह बन सकता है। बार-बार जिद करने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पैटर्न समझने की कोशिश करें।

हर जिद पूरी न करें
अगर बच्चा रोने या जिद करने के बाद अपनी पसंद की चीज हासिल कर लेता है तो उसे यह समझ आ सकता है कि जिद करने से उसकी बात मान ली जाती है। इसलिए हर बार उसकी मांग पूरी करने के बजाय प्यार से स्पष्ट बताएं कि क्या संभव है और क्या नहीं।

नियम बनाने के बाद माता-पिता को उस पर लगातार कायम रहना भी जरूरी है। एक दिन मना करने और दूसरे दिन जिद के बाद वही चीज दे देने से बच्चा भ्रमित हो सकता है।

बच्चे को दो विकल्प दें
छोटे बच्चों को सीधे आदेश देने के बजाय दो सीमित विकल्प देना उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, पूछ सकते हैं कि वह लाल टी-शर्ट पहनना चाहता है या नीली। इससे बच्चे को अपनी पसंद चुनने का अवसर मिलता है और हर बात पर नियंत्रण करने की जरूरत कम महसूस हो सकती है।

जिद के समय खुद शांत रहें
बच्चे के गुस्सा करने पर माता-पिता का भी चिल्लाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। बच्चे के शांत होने तक धैर्य रखें और कम शब्दों में अपनी बात समझाएं। उस समय लंबी बहस करने के बजाय बाद में शांत माहौल में बात करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

अच्छे व्यवहार की तारीफ करें
जब बच्चा बिना जिद किए अपनी बात समझता है या किसी नियम का पालन करता है तो उसकी तारीफ जरूर करें। उदाहरण के लिए, कह सकते हैं कि आज उसने अपनी बात बहुत अच्छे तरीके से बताई। इससे बच्चे को सकारात्मक व्यवहार दोहराने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

स्क्रीन टाइम और दिनचर्या पर रखें नजर
अनियमित नींद, ज्यादा स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि की कमी कुछ बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ा सकती है। बच्चे के लिए सोने, खाने, खेलने और पढ़ाई का एक नियमित रूटीन बनाने की कोशिश करें। उम्र के अनुसार पर्याप्त खेल और आउटडोर गतिविधियों के लिए भी समय दें।

बच्चे की बात सुनना भी जरूरी
हर मांग पूरी करना जरूरी नहीं है, लेकिन बच्चे की भावना को समझना जरूरी है। अगर वह किसी चीज के लिए परेशान है तो पहले

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लेखक: (कीर्ति)

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