दावोस में अमेरिकी मंत्री बेसेंट बोले, 'ग्रीनलैंड को यूएस का हिस्सा बनना चाहिए'
दावोस, 21 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के वित्त मंत्री और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी स्कॉट बेसेंट ने दावोस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यहीं से ग्रीनलैंड का इतिहास याद दिलाते हुए अमेरिका के दावे को अहम बताया।
उन्होंने यूरोपीय यूनियन को निशाने पर लिया और कहा कि डेनमार्क का ग्रीनलैंड पर दावा ठीक नहीं है। उन्होंने यूरोप के नियमों को दलदल समान बताया। ये प्रेस कॉन्फ्रेंस डब्ल्यूईएफ (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) सेंटर के ठीक बाहर यूएस हाउस में आयोजित की गई थी।
बेसेंट ने कहा, यूएस अपने सहयोगियों से यह समझने के लिए कह रहा है कि ग्रीनलैंड को यूनाइटेड स्टेट्स का हिस्सा बनना चाहिए। इतिहास याद दिलाते हुए बोले, अमेरिका ने पहले विश्व युद्ध में डेनमार्क से यूएस वर्जिन आइलैंड्स खरीदे थे। मैं सभी को याद दिलाऊंगा कि पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान डेनमार्क न्यूट्रल (तटस्थ) रहा था। उन्होंने असल में जर्मनों को काफी जमीन बेची थी।
जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका को इस बात की चिंता है कि यूरोप में संस्थागत निवेशक (जैसे कि डेनमार्क का पेंशन फंड) अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट से अपना पैसा निकाल सकते हैं, तो बेसेंट ने इस बात को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ट्रेजरी बॉन्ड में डेनमार्क के निवेश का आकार, डेनमार्क की तरह ही, कोई मायने नहीं रखता। यह 100 मिलियन डॉलर से भी कम है।
एनर्जी के बारे में पूछे जाने पर, स्कॉट बेसेंट ने नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन बनाने और रूसी तेल खरीदने के लिए यूरोपीय देशों की आलोचना की। बेसेंट के अनुसार खरीदे गए तेल की रकम से मास्को को पैसे मिले जिससे उसने यूक्रेन के साथ युद्ध किया।
ट्रेड डील के मुद्दे पर, बेसेंट ने कहा कि यूरोप को यूरोप के अंदर और बाहर की ट्रेड बाधाओं को खत्म करना होगा। यूरोप एक रेगुलेटरी दलदल है जो नौकरशाही और नियमों पर बना है जो आर्थिक गतिविधियों को रोकते हैं।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की कार्रवाई से बिखर जाएगा नाटो, रूस-चीन से खतरा नहीं: (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान
नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक सियासत गरमाई हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुनिया को अपना संदेश पहुंचा दिया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड लेकर ही रहेगा, इसके सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि, यूरोपीय यूनियन इस मामले में अमेरिका के खिलाफ है।
ईयू लगातार अमेरिका के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। ऐसे में (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने बताया कि अमेरिकी सरकार की ग्रीनलैंड में कार्रवाई का नाटो पर क्या असर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीनलैंड में रूस और चीन अमेरिका के लिए कितने बड़े खतरे साबित हो सकते हैं।
(रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने कहा, कल आठ देशों नार्वे, स्वीडेन, फिनलैंड, डेनमार्क, ब्रिटेन, नीदरलैंड और जर्मनी ने एक एक्सरसाइज का नाम देकर अपने ट्रूप्स भेजे हैं, वो एक्सरसाइज नहीं है, यह अमेरिका को एक संदेश देना चाहते हैं कि ग्रीनलैंड पर जो ऑपरेशन करने वाले हैं, वह आसान नहीं होगा।
ट्रंप की कार्रवाई से नाटो पर पड़ने वाले असर को लेकर उन्होंने कहा, नाटो का संगठन 32 देशों का है, वह एक तरह से बर्बाद हो जाएगा। अमेरिका नाटो का एक लीडर है, लेकिन वह दूसरे नाटो देश पर हमला कर रहा है। इसका बड़ा भारी नुकसान होगा। जो नाटो के 32 देश थे, वे लीडरशिप, कमांड एंड कंट्रोल और डिफेंस व्यापार के लिए अमेरिका पर निर्भर थे। पूरा डिफेंस का हार्डवेयर अमेरिका से आता था। ऐसे में अमेरिका की कार्रवाई के बाद पूरे यूरोपीय यूनियन को सारी चीजें फिर से रिफ्रेम करनी पड़ेंगी।
उन्होंने आगे कहा कि इन्हें सोचना पड़ेगा कि ये मिलिट्री हार्डवेयर किस देश से लेंगे, आपस में ही एक-दूसरे से लेन-देन करेंगे। इनका कमांड एंड कंट्रोल पूरी तरह से टूट जाएगा। 1951 से अमेरिका और डेनमार्क के बीच सुरक्षा समझौता है कि अगर ग्रीनलैंड को खतरा होता है, तो अमेरिका वहां पर अपने ज्यादा सैनिक भेज सकता है, अपने सैन्य बेस बढ़ा सकता है।
अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड पर रूस-चीन कितना बड़ा खतरा हो सकता है, इसे लेकर रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने कहा, रूस और चीन की तरफ से कोई भी औपचारिक खतरा नहीं है। दोनों देशों ने हमले को लेकर अब तक कोई भी चेतावनी या संकेत नहीं दिया है। वेनेजुएला में जैसे ट्रंप ने किया, उसमें मकसद ये नहीं था कि मादुरो को किडनैप करना है, उनका मुख्य मकसद तेल था। पूरे वर्ल्ड में 20 फीसदी ऑयल रिजर्व वेनेजुएला के पास है। हालांकि, उनकी रिफाइनमेंट की क्षमता 1 फीसदी ही है, लेकिन उसे बढ़ाई जा सकती है। क्योंकि अमेरिका के पास ऑयल रिफाइनरी है। ग्रीनलैंड में अमेरिका को रूस और चीन से कोई खतरा नहीं है। रेयर अर्थ मिनरल्स पर ट्रंप की नजर है। ट्रंप एक बिजनेसमैन हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
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