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Sunita Williams: सुनीता विलियम्स ने कहां से और क्या की पढ़ाई, कैसे हुआ NASA में सलेक्शन

Sunita Williams: भारतीय मूल की अंतरक्षि यात्री सुनीता विलियम्स 31 दिसंबर, 2025 को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) से रिटायर हो गईं. सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय तक रहने वाली पहली महिला हैं. उन्होंने 608 से ज्यादा दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं. इसके अलावा भी उनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं. उनके नाम किसी महिला द्वारा सबसे अधिक समय तक स्पेसवॉक करने का भी रिकॉर्ड दर्ज है.

उन्होंने कुल 62.6 मिनट स्पेसवॉक किया है. इसके अलावा उनके नाम सबसे अधिक बार किसी महिला के स्पेसवॉक करने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. उन्होंने कुल 9 बार स्पेसवॉक किया. वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली महिला हैं इसके साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की कमांडर बनने वाली चुनिंदा महिलाओं की सूची में शामिल हैं.

कहां हुआ था सुनीता विलियम्स का जन्म, कौन हैं माता पिता?

सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहियो राज्य के यूक्लिड में 19 सितंबर 1965 को हुआ. उनके पिता का नाम डॉ. दीपक पाड्या है. जो एक न्यूरोएनाटॉमिस्ट है. उनकी मां स्लोवेनिया मूल की महिला हैं. उनका नाम उर्सुलाइन बॉनी पाड्या है. सुनीता विलियम्स ने 1983 में मैसाचुसेट्स के नीडमस हाई स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की. उसके बाद उन्होंने अमेरिकी नौसेना अकेडमी से 1987 में साइंस में बैचलर डिग्री प्राप्त की. ग्रेजुएशन में उन्होंने फिजिक्स की पढ़ाई की.

अमेरिकी नौसेना में बनी पायलट

सुनीता विलियम्स यही नहीं ठहरी इन्होंने साल 1995 में फ्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एविएशन इंजीनियरिंग में एमएससी की पढ़ाई की. उसके बाद वह अमेरिका के नेवी विभाग में शामिल हो गईं. जहां वह हेलीकॉप्टर कॉमेट स्क्वाड्रन एट की पायलट बनी. बता दें कि सुनीता ने अपनी हायर एजुकेशन यूनाइटेड स्टेट नेवल अकेडमी मैरीलैंड एना पोलिस से पूरी की. जिसकी स्थापना अक्टूबर 1845 में हुई थी. ये संस्थान अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स के अधिकारियों को प्रशिक्षक देने के लिए प्रसिद्ध है.

ऐसा रहा सुनीता विलियम्स का सफर

नासा की वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, सुनीता विलियम्स को मई 1987 में अमेरिकी नौसेना अकादमी से अमेरिकी नौसेना में एनसाइन के रूप में कमीशन प्राप्त हुआ. नौसेना तटीय प्रणाली कमान में छह महीने के अस्थायी कार्यभार के बाद, उन्हें बेसिक डाइविंग ऑफिसर के रूप में नामित किया गया. उसके बाद उन्होंने नौसेना विमानन प्रशिक्षण कमान में रिपोर्ट किया.

जुलाई 1989 में उन्हें नौसेना एविएटर के रूप में नामित किया गया. इसके बाद उन्होंने प्रारंभिक H46, सीनाइट, प्रशिक्षण के लिए हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 3 में रिपोर्ट किया. इस प्रशिक्षण के पूरा होने पर, उन्हें नॉरफ़ॉक, वर्जीनिया में हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 8 में तैनात किया गया और उन्होंने डेजर्ट शील्ड और ऑपरेशन प्रोवाइड कम्फर्ट के समर्थन में भूमध्य सागर, लाल सागर और फारस की खाड़ी में विदेशी तैनाती की.

इन अभियानों में शामिल रहीं सुनीता विलियम्स

सितंबर 1992 में वह यूएसएस सिल्वानिया पर सवार होकर मियामी, फ्लोरिडा में तूफान एंड्रयू राहत अभियान के लिए भेजे गए H-46 टुकड़ी की प्रभारी अधिकारी थीं. सुनीता विलियम्स को अमेरिकी नौसेना परीक्षण पायलट स्कूल के लिए चुना गया और उन्होंने जनवरी 1993 में अपनी पढ़ाई शुरू की.

दिसंबर 1993 में स्नातक होने के बाद, उन्हें रोटरी विंग एयरक्राफ्ट टेस्ट डायरेक्टोरेट में एच-46 प्रोजेक्ट ऑफिसर और टी-2 में वी-22 चेज़ पायलट के रूप में नियुक्त किया गया. इस दौरान उन्होंने स्क्वाड्रन सेफ्टी ऑफिसर के रूप में काम किया. जहां उन्होंने SH-60B/F, UH-1, AH-1W, SH-2, VH-3, H-46, CH-53 और H-57 में परीक्षण उड़ानें भरीं.

3000 घंटे से ज्यादा उड़ान भर चुकी हैं सुनीता

दिसंबर 1995 में, वह रोटरी विंग विभाग में प्रशिक्षक और स्कूल की सेफ्टी ऑफिसर के रूप में नेवल टेस्ट पायलट स्कूल में वापस आ गईं, जहां उन्होंने UH-60, OH-6 और OH-58 से उड़ान भरी. वहां से, उन्हें यूएसएस साइपन (LHA-2), नॉरफ़ॉक, वर्जीनिया में एयरक्राफ्ट हैंडलर और असिस्टेंट एयर बॉस के रूप में नियुक्त किया गया. सुनीता विलियम्स यूएसएस साइपन पर तैनात थीं जब उनका चयन अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम के लिए हुआ. उन्होंने 30 से अधिक विभिन्न विमानों में 3000 हजार घंटों से  ज्यादा की उड़ान भरी.

सुनीता विलियम्स का नासा में कब और कैसे हुआ चयन?

बता दें कि नासा में चयन के लिए उम्मीदवार का विज्ञान, इंजीनियरिंग या गणित विषय में मास्टर डिग्री के साथ अच्छी अनुभव होना जरूरी है. सुनीता विलियम्स के वह सभी अनुभव और प्रशिक्षण थे, जिन्हें नासा को जरूरत थी. इसी आधार पर जून 1998 में सुनीता विलियम्स का चयन नासा में अंतरिक्ष यात्री के रूप में हो गया. चयन के बाद उन्होंने अगस्त 1998 में प्रशिक्षण लेना शुरू किया. जहां उन्होंने अंतरिक्ष से जुड़े तमाम प्रशिक्षण और अभ्यास सत्रों में भाग लिया और उन्हें पूरा किया.

ये भी पढ़ें: ISS: अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है, सवाल पर सुनीता विलियम्स ने दिया ये जवाब

नासा में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सुनीता विलियम्स ने मॉस्को में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ अंतरिक्ष स्टेशन में रूसी योगदान और प्रथम अभियान दल के साथ काम किया.  जहां से वापसी के बाद उन्हें रोबोटिक्स शाखा में स्टेशन के रोबोटिक आर्म और उसके बाद विकसित किए जाने वाले विशेष प्रयोजन कुशल मैनिपुलेटर पर काम करना शुरू किया. वह नासा की NEEMO2 मिशन की एक क्रू सदस्य रहीं.

उन्होंने एक्वेरियस हैबिटेट में 9 दिन तक पानी के भीतर बिताए. उन्होंने नासा के कई मिशन में अहम भूमिका निभाई. नासा में अपने कार्यकाल के दौरान सुनीता विलियम्स तीन बार अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर गईं. उनका पहला मिशन 2006-2007 में हुआ. उसके बाद उन्होंने 2012 में आईएसएस की यात्रा की वह तीसरी और आखिरी बार जून 2024 में स्पेश में गईं. जहां वह करीब नौ महीने तक फंसी रहीं. जहां से मार्च 2025 में वह वापस लौट पाईं.

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Free Gas Cylinder In Holi: होली पर दिल्ली सरकार का महिलाओं को तोहफा, मिलेगा मुफ्त सिलेंडर

Free Gas Cylinder In Holi: दिल्ली की राजनीति में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिलाओं से किया गया बड़ा चुनावी वादा पूरा कर दिया है. दिल्ली कैबिनेट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. खास बात यह है कि सरकार अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने से पहले ही इस योजना को लागू करने जा रही है. मार्च में होली के अवसर पर पहली बार पात्र महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा.

कैबिनेट की मुहर, त्योहारों पर मिलेगा फायदा

बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस अहम प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई. फैसले के मुताबिक, दिल्ली सरकार होली और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर ईडब्ल्यूएस परिवारों की महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेंडर उपलब्ध कराएगी. इसके साथ ही, कम आय वर्ग के परिवारों को 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर देने की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे महंगाई के बोझ से राहत मिल सके.

गरीब महिलाओं पर सरकार का फोकस

सूत्रों के अनुसार, राशन कार्ड धारक गरीब परिवारों की महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि त्योहारों के समय किसी भी गरीब परिवार को रसोई गैस की कमी का सामना न करना पड़े. इस योजना पर दिल्ली सरकार को करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, लेकिन सरकार इसे सामाजिक कल्याण में एक जरूरी निवेश मान रही है.

पहले भी पूरे हुए हैं कई वादे

बीजेपी सरकार ने सत्ता में आने के बाद कई अहम चुनावी वादों को लागू करना शुरू कर दिया है. इनमें आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज शामिल है. इसके अलावा, गरीब और जरूरतमंद लोगों को सिर्फ पांच रुपये में भोजन उपलब्ध कराने के लिए अटल कैंटीन की शुरुआत की गई है. दिल्ली में कुल 100 अटल कैंटीन खोलने की योजना है, जिनमें से 50 से ज्यादा का उद्घाटन 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर किया जा चुका है.

अन्य राज्यों से मिलता-जुलता मॉडल

दिल्ली से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाओं को साल में दो मुफ्त गैस सिलेंडर देने की व्यवस्था लागू है. इसके अलावा प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत महिलाओं को गैस सिलेंडर पर सब्सिडी और अतिरिक्त रियायत भी मिलती है. कई योजनाओं में पहले सिलेंडर की पूरी राशि महिलाओं के बैंक खाते में वापस की जाती है, जिससे सीधा आर्थिक लाभ मिलता है.

महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कदम

दिल्ली सरकार का मानना है कि मुफ्त गैस सिलेंडर योजना से न सिर्फ महिलाओं की आर्थिक बचत होगी, बल्कि स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा. यह पहल महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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  Sports

T20 World Cup 2026: बांग्लादेश विवाद में पीसीबी का ICC को पत्र, भारत में खेलने से इनकार पर समर्थन

आईसीसी के एक अहम फैसले से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने 2026 पुरुष टी20 विश्व कप को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम में अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की दखलअंदाजी से मामला और पेचीदा हो गया है।

मंगलवार को पीसीबी ने आईसीसी को पत्र लिखकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के उस रुख का समर्थन किया, जिसमें बांग्लादेश ने मौजूदा क्षेत्रीय और राजनीतिक हालात का हवाला देते हुए भारत में खेलने से इनकार किया है। यह पत्र आईसीसी के साथ-साथ उसके बोर्ड सदस्यों को भी भेजा गया है।

इसी बीच आईसीसी ने बुधवार को एक विशेष बैठक बुलाई है, जिसमें यह तय होना है कि 2026 टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी और उसके मैचों के वेन्यू को लेकर क्या फैसला लिया जाए। हालांकि जानकारों का मानना है कि आईसीसी अपने पहले से तय रुख से पीछे हटने की संभावना कम है। आईसीसी पहले ही साफ कर चुकी है कि टूर्नामेंट का शेड्यूल नहीं बदलेगा और बांग्लादेश को भारत में ही अपने मैच खेलने होंगे।

बताया जा रहा है कि इस फैसले के पीछे बांग्लादेश सरकार का समर्थन है, जिस कारण बीसीबी भारत आने को तैयार नहीं है। इसे सुलझाने के लिए आईसीसी और बीसीबी के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। इस बीच समय का दबाव भी बढ़ रहा है, क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में ज्यादा वक्त नहीं बचा है।

पाकिस्तान की देर से हुई एंट्री को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश के मैच अपने यहां कराने का प्रस्ताव रखा था और यह भी संकेत दिया गया कि अगर बांग्लादेश को छूट मिलती है तो पाकिस्तान अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सकता है। हालांकि पीसीबी ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

इस विवाद की जड़ भारत-बांग्लादेश के बिगड़ते राजनीतिक संबंधों से जुड़ी मानी जा रही है, जिसका असर अब क्रिकेट पर साफ दिख रहा है। कुल मिलाकर मामला अब खेल से आगे निकलकर राजनीति और कूटनीति से जुड़ गया है। अब सभी की नजरें आईसीसी की बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि आगे रास्ता किस दिशा में जाता है।
Wed, 21 Jan 2026 22:00:47 +0530

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