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Hindi News | CEC Gyanesh Kumar पर घमासान.. Rahul Gandhi के आरोपों पर Arjun Singh का करारा जवाब

Hindi News | मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। Special Intensive Revision यानी SIR और Election Commission की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और ‘Vote Chori’ के अपने आरोपों को दोहराते हुए चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल के चुनावों में Anti-Incumbency का पारंपरिक पैटर्न दिखाई नहीं दे रहा है। #gyaneshkumar #rahulgandhi #cecrow #sirrow #sircontroversy #votechori #electioncommission #bjp #timesnownavbharat You can Search us on YouTube by- NBT, NBT TV Live, Navbharat Times, Times Now, TNN, TNNB, Navbharat TV, Hindi News, Latest news and @timesnownavbharat About Channel: Times Now Navbharat देश का No.1 Hindi news है। यह चैनल भारत और दुनिया से जुड़ी हर Latest News और Breaking News , राजनीति, मनोरंजन और खेल से जुड़े समाचार आपके लिए लेकर आता है। इसलिए सब्सक्राइब करें और बने रहें टाइम्स नाउ नवभारत के साथ Times Now Navbharat is India's fastest growing Hindi News Channel with 24 hour coverage. Get Breaking news, Latest news, Politics news, Entertainment news and Sports news from India & World on Times Now Navbharat. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Watch Live TV : https://www.timesnowhindi.com/live-tv Subscribe to our other network channels: Times Now: https://www.youtube.com/TimesNow Zoom: https://www.youtube.com/zoomtv ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- You can also visit our website at: https://www.timesnowhindi.com Download our App for Breaking News: https://tinyurl.com/bde8rv84 Like us on Facebook: https://www.facebook.com/Timesnownavbharat Follow us on Twitter: https://twitter.com/TNNavbharat Follow us on Instagram: https://www.instagram.com/timesnownavbharat

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Ajit Doval से क्या मांग रहे राहुल गांधी? क्यों पीछे पड़ी कांग्रेस, हैरान कर देगी वजह!

पीएम मोदी को लेकर कांग्रेस ने अब लगता है मानो अपनी स्ट्रैटर्जी को छोड़ा बदल दिया है। पहले तक राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के नेताओं की ओर से पीएम मोदी पर डायरेक्ट अटैक किया जाता रहा था। लेकिन ये स्ट्र्टर्जी कांग्रेस को बैकफायर कर रही थी। चाहे वो चौकीदार चोर है से लेकर मौत के सौदागर तक के स्लोगन रहे हो। इन सभी का कांग्रेस को चुनाव में खामियाजा ही उठाना पड़ा था। हर चुनाव से पहले कांग्रेस इस तरह के कोई बयान दे देती थी और सहानुभूति बीजेपी और पीएम मोदी को मिल जाती थी। आम लोगों के मन में धारणा बनी कि प्रधानमंत्री के कोई बाल बच्चे नहीं हैं, परिवार से इतर वो देश सेवा में  लगे हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार के आरोप चुनावी एजेंडा हैं।  इस बात को लेकर देश में एक राय है कि यह चोरी नहीं करेंगे। ऐसे में अब कांग्रेस ने स्ट्रेटजी या या फिर कहें कि गोल पोस्ट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की ओर शिफ्ट कर दिया है। कांग्रेस पार्टी की तरफ से या कह ले राहुल गांधी ने बीते दिनों एनएसए डोभाल पर खूब निशाना साधा है। बीते दिनों की बात है महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि विदेश मंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं जबकि NSA एक गैर-निर्वाचित अधिकारी हैं और मोदी सरकार ने डोभाल को कैबिनेट रैंक देकर उनकी शक्तियां बढ़ा दी हैं।

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आखिर कांग्रेस अजीत डोभाल के पीछे क्यों पड़ी है


चव्हाण ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की विदेश नीति किसके नियंत्रण में है, विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर या NSA अजीत डोभाल के? मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान NSA का पद हमेशा जूनियर स्तर का होता था। उस समय NSA आंतरिक सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर विदेश मंत्री और गृह मंत्री को रिपोर्ट करते थे। लेकिन मोदी सरकार ने अजित डोभाल को कैबिनेट रैंक दे दिया है। पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अब गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और NSA अजीत डोभाल सभी कैबिनेट रैंक रखते हैं और तीनों सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं, एक-दूसरे को नहीं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले अजित डोभाल ने चीन का दौरा किया, जबकि एस जयशंकर ने रूस गए थे। ऐसे में सरकार देश को बताए कि क्या विदेश मंत्रालय से संबंधित कामकाज का कोई आंतरिक बंटवारा हुआ है।

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क्यों अजीत डोभाल पर हमला करना कांग्रेस को सूट करता है?


भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर नया नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक खास पैटर्न देखने को मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर निशाना साधने में विफल रहने के बाद, अब रणनीति के तहत उनके मंत्रिमंडल के प्रमुख मंत्रियों और महत्वपूर्ण सलाहकारों को एक-एक कर घेरा जा रहा है। इस सिलसिले की शुरुआत केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े मामलों से हुई। कुछ महीने पहले गडकरी के बेटों के व्यावसायिक उपक्रमों और कंपनियों को लेकर सोशल मीडिया पर अचानक विवाद खड़ा किया गया। जांच और रिपोर्टों में यह दावा भी सामने आया कि इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पार से विदेशी बॉट्स और सोशल मीडिया हैंडल्स का सहारा लिया गया था। इसके तुरंत बाद पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ आ गई। गाड़ियों के माइलेज गिरने, इंजन खराब होने और यहां तक कि कारों में चींटियां लगने तक के दावे किए गए। दिलचस्प बात यह है कि जितनी तेजी से यह अभियान शुरू हुआ, उतनी ही तेजी से शांत भी हो गया। आज वही गाड़ियां सड़कों पर सामान्य रूप से दौड़ रही हैं और सोशल मीडिया से यह पूरा मुद्दा अचानक नदारद हो चुका है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह तरीका काफी हद तक आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर की उस राजनीति से मेल खाता है, जब अरविंद केजरीवाल ने नितिन गडकरी और अरुण जेटली जैसे वरिष्ठ नेताओं पर तीखे आरोप लगाए थे। हालांकि, मानहानि के मुकदमों के बाद केजरीवाल को अदालत में लिखित माफी मांगनी पड़ी थी।

मोदी सरकार के प्रमुख चेहरों को घेरने की सियासत


मंत्रियों के बाद अब विपक्ष और सोशल मीडिया अभियानों का रुख मोदी सरकार के सबसे मजबूत रणनीतिक स्तंभों विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की ओर मुड़ गया है। अजीत डोभाल, जिन्हें आज सरकार का रणनीतिक आधार माना जाता है, उनका करियर किसी एक दल तक सीमित नहीं रहा है। डोभाल के प्रशासनिक इतिहास पर नजर डालें तो वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर राष्ट्र सेवा के लिए जाने जाते रहे हैं। 1972 के दौर में जब केरल के मलप्पुरम में सांप्रदायिक तनाव बढ़ा, तब तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल को स्थिति नियंत्रण में करने की जिम्मेदारी दी गई थी। सिक्किम के भारत में शांतिपूर्ण एकीकरण के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में डोभाल ने बेहद संवेदनशील और अहम भूमिका निभाई थी। वहां विदेशी खुफिया एजेंसियों के प्रभाव को निष्प्रभावी करने और सिक्किम को मुख्यधारा से जोड़ने में उनके काम ने उन्हें देश के शीर्ष खुफिया अधिकारियों की कतार में ला खड़ा किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंदिरा गांधी से लेकर मोदी सरकार तक देश की सुरक्षा धुरी रहे अजीत डोभाल और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सशक्त आवाज बने एस. जयशंकर पर उठते सवाल यह स्पष्ट करते हैं कि राजनीति अब केवल नीतिगत विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के मुख्य रणनीतिक तंत्र को दबाव में लाने का सुनियोजित प्रयास बन चुकी है।

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  Sports

वनडे में सबसे तेज अर्धशतक जड़ने वाले 5 बल्लेबाज, 11 साल से टूटने की बाट जोह रहा विश्व कीर्तिमान

5 batsman Fastest fifties in ODI: वनडे क्रिकेट के इतिहास में कई बल्लेबाजों ने अपने आक्रामक तेवरों से मैच का पासा पलटा है, लेकिन एबी डिविलियर्स, मैथ्यू फोर्ड , सनथ जयसूर्या , कुसल परेरा और मार्टिन गप्टिल की पारियां सबसे खास हैं. इन 5 धुरंधरों ने न सिर्फ महज कुछ ही गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक ठोकने का कारनामा किया, बल्कि अपनी तूफानी बल्लेबाजी और चौके-छक्कों की बरसात से विरोधी टीम के गेंदबाजों को पूरी तरह पस्त कर दिया. Sat, 26 Sep 2026 22:36:28 +0530

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