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Mental Health सुधारने में मददगार है Color Therapy, तनाव और डिप्रेशन से दिलाती है राहत

हमारे जीवन में रंगों का खास महत्व होता है। कपड़ों से लेकर हमारे आसपास मौजूद सभी चीजें रंग-बिरंगी होती हैं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप एक ऐसी दुनिया में पहुंच गए हैं, जो ब्लैक एंड व्हाइट है, जहां पर रंग ही नहीं है। ऐसा होने पर और रंगों के अभाव में ऐसा लगता है, जैसे हमारे जीवन में भी उदासी भर जाएगी। यही कारण है कि इन रंगों का उपयोग मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मेंटल हेल्थ पर कलर थेरेपी क्या असर डालती है और किस तरह के फायदे देखने को मिलते हैं।

जानें क्या है कलर थेरेपी

कलर थेरेपी को क्रीमोथेरेपी भी कहा जाता है। यह एक ऐसा ऑप्शन है, जो रंगों और रोशनी की मदद से मानसिक और शारीरिक सेहत को ठीक करने में सहायता करता है। माना जाता है कि इसके उपयोग से तनाव कम करके मूड को ठीक किया जा सकता है। जिसमें हरे और नीले रंग को मन को राहत और सुकून देने वाला माना जाता है। यहां पर हम आपको 5 ऐसे रंगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि फिजिकल और मेंटल हेल्थ को ठीक करने में मदद करते हैं।

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नीला

वहीं नीला रंग डिप्रेशन कम करने और दर्द में राहत देने में मदद कर सकता है। अगर गहरे नीले रंग का इस्तेमाल किया जाए, तो यह नींद संबंधी समस्या को ठीक किया जा सकता है।

ऑरेंज

ऑरेंज रंग मेंटल एक्टिविटी को बढ़ाने के अलावा मन में खुशी की भावना को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। जिन लोगों को पेट संबंधी समस्याएं रहती हैं, उन लोगों के लिए यह रंग फायदेमंद होता है।

हरा

हरा रंग प्रकृति का होता है, जोकि हमारे मन को सुकून और शांति का एहसास कराता है। माना जाता है कि हरे रंग की क्रीमोथेरेपी तनाव को कम करने के साथ-साथ मन को भी रिलैक्स करती है।

पीला

अगर कोई व्यक्ति ज्यादातर निराशा में डूबा रहता है और उसको अधिक खुश और आशावादी रहने की जरूरत है, तो इसके लिए पीले रंग की क्रोमोथेरेपी के बारे में सोचा जा सकता है।

लाल

कई बार जिंदगी में इतनी ज्यादा भागदौड़ होती है, जिस कारण तन-मन थकान की वजह से टूट जाता है। जिसके बाद कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती है। ऐसे में लाल रंग हमारे दिमाग को फौरन एनर्जेटिक और एक्टिव होने का सिग्नल देता है।

जानिए कलर थेरेपी के फायदे

बता दें कि अभी तक फिलहाल इस बात की पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो सकी है कि वाकई में कलर थेरेपी इतनी असरदार है भी या नहीं। लेकिन साइकोलॉजी में रंगों से जुड़े फायदे देखे गए हैं। वहीं यह कई तरह की फिजिकल और मेंटल समस्याओं से भी छुटकारा दिला सकता है।

गुस्सा और चिड़चिड़ापन

नींद से जुड़ी समस्याएं

स्किन इन्फेक्शन

हाई ब्लड प्रेशर

एंग्जायटी

डिप्रेशन

तनाव

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मणिपुर में उग्रवादियों ने 4 नगा लोगों की हत्या की:आरोपी म्यांमार से आए थे; बाजार बंद का ऐलान, इस साल अब तक 44 मौतें

मणिपुर के कामजोंग जिले में गुरुवार शाम चार नगा नागरिकों की हत्या कर दी गई। स्थानीय लोगों ने हत्या का आरोप कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) के उग्रवादियों पर लगाया है। पुलिस के मुताबिक, हथियारों से लैस उग्रवादियों ने पिलोंग नगा गांव में ग्रामीणों पर गोलीबारी की थी। पिलोंग नगा गांव कामजोंग जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर है। मृतकों की पहचान फामी जाजो, निंगथेम कसाक, बेटरसन जाजो और वरेइशिम जाजो के रूप में हुई है। इनमें वरेइशिम जाजो और फामी जाजो पिता-पुत्र थे। चारों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए कामजोंग जिला मुख्यालय लाए गए हैं। घटना के बाद तांगखुल नागा लॉन्ग (TNL) ने हत्याओं की निंदा करते हुए शुक्रवार सुबह 7 बजे से 24 घंटे के आपातकालीन बंद का ऐलान किया। स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी में शुरू हुई हिंसा के बाद इस साल अब तक 44 लोगों की मौत हो चुकी है। जरूरी सेवाएं बंद से बाहर, अंतिम संस्कार की आवाजाही पर भी रोक नहीं तांगखुल नागा लॉन्ग (TNL) ने कहा कि बिजली, चिकित्सा और दमकल जैसी जरूरी सेवाओं को बंद से बाहर रखा जाएगा। अंतिम संस्कार और शोक सभा में जाने वाले लोगों की आवाजाही पर भी बंद लागू नहीं होगा। वहीं, तांगखुल नागा युवाओं के संगठन खानुइथोट-खोन ने सीएम युमनाम खेमचंद सिंह के 28 सितंबर को उखरुल के होने वाले दौरे का विरोध किया है। संगठन के मुताबिक, हाल की हत्याओं और नागा बहुल इलाकों में हिंसा के बाद सुरक्षा स्थिति को देखते हुए उन्हें अपने दौरे पर दोबारा विचार करना चाहिए। संगठन ने राज्य और केंद्र सरकार से नागा नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाने, हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और नगा बहुल इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

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  Sports

सचिन तेंदुलकर का वो राज, जो बहुत कम लोग जानते हैं! 13 की उम्र में पाकिस्तान के लिए की थी फील्डिंग

Sachin Tendular vs Pakistan: सचिन तेंदुलकर ने साल 1989 में भारत के लिए अपना डेब्यू किया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के लिए खेलने से पहले मास्टर-ब्लास्टर पाकिस्तान की टीम के लिए मैदान पर उतर चुके थे? ब्रेबोर्न स्टेडियम में हुए प्रदर्शनी मैच में 13 साल के सचिन सब्स्टीट्यूट फील्डर बन गए थे, जब जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर लंच के लिए बाहर थे. Fri, 25 Sep 2026 16:39:33 +0530

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