राजकोट नगर निगम ने ड्रोन और एआई की मदद से लगाया मच्छरों के पनपने की 4,731 संभावित जगहों की पता, किया छिड़काव
राजकोट, 25 सितंबर (आईएएनएस)। राजकोट नगर निगम (आरएमसी) ने शहर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। नगर निगम ने ड्रोन आधारित सर्वेक्षण और एआई की मदद से निगरानी करके 59.39 वर्ग किलोमीटर में मच्छरों के पनपने की 4,731 संभावित जगहों का पता लगाया है।
नगर निगम के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पहचानी गई जगहों में से 1,340 जगहों पर फील्ड स्टाफ ने कीटनाशक का छिड़काव किया है और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करने के उपाय किए हैं, जबकि ड्रोन ने कुल 40 घंटे और नौ मिनट तक कीटनाशक का छिड़काव किया है।
यह सर्वे अधिक जोखिम वाले वार्डों में किया जा रहा है, जिनमें वार्ड 11, 18, 3, 4 और 13 शामिल हैं। अब तक सर्वे किए गए इलाके नगर निगम के कुल 161.85 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का 59.39 वर्ग किलोमीटर हिस्सा है।
ड्रोन ऑपरेशन में नालियां, पानी जमा होने वाली जगहें, छोटे-बड़े गड्ढे और नदी के तल में बने गड्ढे, साथ ही ऐसी अन्य जगहें शामिल हैं, जहां मच्छर पनप सकते हैं। नगर निगम ने कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उन जगहों पर किया जा रहा है, जहां पारंपरिक तरीके से कीटनाशक का छिड़काव करना मुश्किल है या जोखिम भरा है।
ड्रोन सर्वे से मिली जानकारी संबंधित वार्डों और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के स्वास्थ्य कर्मियों को दी जा रही है, जो इन जगहों की जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर कीटनाशक का छिड़काव और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को खत्म करने का काम करते हैं।
ड्रोन-आधारित ऑपरेशन के साथ-साथ, नगर निगम के पारंपरिक कीट नियंत्रण उपाय भी 17 से 23 सितंबर के बीच जारी रहे। फील्ड वर्करों, शहरी आशा कार्यकर्ताओं और एमपीएचडब्ल्यू ने 1,50,172 घरों में लार्वानाशक गतिविधियां चलाईं, जबकि 933 घरों में फॉगिंग की गई।
अधिक मच्छरों वाले क्षेत्रों में गाड़ियों पर लगी फॉगिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, संवेदनशील सोसायटियों, सार्वजनिक सड़कों और ऐसी जगहों पर भी फॉगिंग की गई, जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों के पनपने की जगहों का पता लगाने के लिए 409 गैर-आवासीय जगहों का भी निरीक्षण किया। इनमें कंस्ट्रक्शन साइट, स्कूल, अस्पताल, होटल, इंडस्ट्रियल यूनिट, हॉस्टल, कॉम्प्लेक्स, कबाड़ के गोदाम, बेसमेंट, हॉल, वाड़ी, पार्टी प्लॉट, धार्मिक स्थल, पेट्रोल पंप और सरकारी दफ्तर शामिल थे।
मच्छरों के पनपने की जगहों को लेकर रिहायशी इलाकों में 312 लोगों और कमर्शियल इलाकों में 92 लोगों को नोटिस जारी किए गए। साथ ही, लागू नियमों के तहत प्रशासनिक शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई।
नगर निगम ने कहा कि डेंगू की रोकथाम के उपायों में आवासीय घरों, दुकानों, अपार्टमेंटों, वाणिज्यिक परिसरों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण शामिल है। खास तौर पर उन कंटेनरों की जांच की जा रही है जिनमें पानी जमा होता है और जो एडीज मच्छरों के पनपने की जगह बन सकते हैं।
इसके अलावा, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े फील्ड स्टाफ के जरिए पानी से होने वाली बीमारियों की निगरानी की। 17 से 23 सितंबर के बीच सर्वे में लगभग 3,04,556 लोगों को शामिल किया गया। इस दौरान 6,559 क्लोरीन टैबलेट और 743 ओआरएस पैकेट बांटे गए, जबकि 3,484 आरसी टेस्ट किए गए।
नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों के पनपने की जगहों को खत्म करने में स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें, पीने के पानी की साफ-सफाई का ध्यान रखें और पानी को उबालकर या ठीक से साफ करके ही पिएं। साथ ही, लोगों से यह भी अपील की गई है कि वे मच्छरों के पनपने की जगहों के ड्रोन-आधारित सर्वे के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों का सहयोग करें।
--आईएएनएस
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इंश्योरेंस कमीशन पर IRDAI का बड़ा प्रस्ताव, नई गाड़ियों से लेकर हेल्थ पॉलिसी तक बदलेगा सिस्टम
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की ओर से प्रस्तावित नए नियमों से देश के इंश्योरेंस इकोसिस्टम में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है और इससे इंश्योरेंस इंडस्ट्री में प्रोडक्ट के मुताबिक कमीशन कैप की नई व्यवस्था लागू हो सकती है. यह बयान एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया.
इंश्योरेंस रेगुलेटर ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़े सुधारों का प्रस्ताव दिया है. इसमें एक आसान तीन-स्तरीय ढांचा शामिल है, जिसका उद्देश्य पॉलिसीहोल्डर्स के लिए लागत कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करना है. जानकारों के मुताबिक, इस कदम से निश्चित रूप से ग्राहकों को फायदा होगा, लेकिन इससे बैंक-एश्योरेंस पार्टनर और एनबीएफसी जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स के मार्जिन पर तुरंत दबाव भी पड़ेगा.
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा, "आखिरकार, इस प्रस्ताव का मकसद डिजिटल तरीकों को अपनाना, पॉलिसी को लंबे समय तक बनाए रखना और एक ऐसा मार्केट बनाना है जो टिकाऊ हो और ग्राहकों को प्राथमिकता दे. जैसा कि कहा जाता है, 'जरूरत ही आविष्कार की जननी है', और ये बदलाव कंपनियों को नए तरीके सोचने और अपनाने के लिए मजबूर करेंगे." 'बीमा वितरण के अर्थशास्त्र को फिर से तय करने' पर आईआरडीएआई के कंसल्टेशन पेपर में नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस के लिए कमीशन या भुगतान की सीमा तय करने का प्रस्ताव है. इसके तहत थर्ड-पार्टी प्रीमियम के लिए यह भुगतान शून्य और खुद के नुकसान व उससे जुड़े कवर के लिए 5 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया गया है.
इससे "टेक्नोलॉजी, जागरूकता और उससे जुड़े खर्च" भी कमीशन की सीमा के दायरे में आ जाएंगे, और मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (एमआईएसपी) सिस्टम की जगह एक व्यापक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (आईडीई) सिस्टम ले लेगा. शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल ने कहा, "इन बदलावों का ऑटोमोबाइल डीलरों, ओईएम से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मोटर इंश्योरेंस बेचने वाले अन्य लोगों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा. नई गाड़ियों की पॉलिसी से होने वाली शुरुआती कमाई कम होने और डीलर से जुड़े समझौतों के कड़े होने से, डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन और कम हो सकता है."
इन प्रस्तावों का मकसद इंश्योरेंस की बिक्री को डीलर के साथ अन्य रिश्तों से अलग करना है. डीलरों को सिर्फ इसलिए कैशलेस रिपेयर से इनकार करने की इजाजत नहीं होगी क्योंकि ग्राहक ने इंश्योरेंस कहीं और से खरीदा है. साथ ही, आईआरडीएआई ग्राहकों को 'बीमा सुगम' जैसे वैकल्पिक डिजिटल चैनलों तक ज्यादा पहुंच देने का प्रस्ताव दे रहा है, और डीलरों के लिए जरूरी होगा कि वे गाड़ी बेचते समय ग्राहकों को इस विकल्प के बारे में साफ तौर पर बताएं. लाल ने कहा, "इन सुधारों से डीलर-आधारित पारंपरिक मॉडल बदल सकता है, जिसमें इंश्योरेंस की बिक्री, गाड़ी की फाइनेंसिंग और बिक्री के बाद की सर्विसिंग आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं. आय का दबाव डिस्ट्रीब्यूटर्स को रिन्यूअल, सर्विसिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य मंजूर किए हुए वैल्यू-एडेड सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकता है."
हालांकि, जानकारों का कहना है कि इसका अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आईआरडीएआई आखिरकार कौन से नियम अपनाता है और उनके साथ कैसा ट्रांजिशन फ्रेमवर्क लागू करता है. कंसल्टेशन पेपर में सभी तरह के जनरल इंश्योरेंस कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव है. इसमें हेल्थ इंश्योरेंस के लिए पहली बार के कमीशन को 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच तय करने और रिन्यूअल व पोर्टिंग पेआउट को सिर्फ 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक सीमित करने की बात कही गई है.
ड्राफ्ट पेपर में डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए पहले साल के कमीशन को अवधि के आधार पर 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच सीमित किया गया है. यह पहले मिलने वाले उन ज्यादा प्रभावी पेआउट से कम है, जो प्रमोशनल खर्च और रिवॉर्ड्स को मिलाकर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे.
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