Bhadrapada Purnima 2026 Daan: भाद्रपद पूर्णिमा पर करें ये दान, धार्मिक मान्यता के अनुसार मिल सकता है पुण्य लाभ
Bhadrapada Purnima 2026 Daan: भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन अन्न, शंख, चांदी और कौड़ियों का दान करने की धार्मिक मान्यता है. जानिए ज्योतिष और धर्म में इन वस्तुओं के दान का महत्व और पूर्णिमा पर किए जाने वाले अन्य शुभ कार्य.
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समुद्र मंथन से जुड़ी है Anant Chaturdashi की परंपरा, पंचामृत में भगवान को खोजने की रीत
हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 'अनंत चतुर्दशी' का पर्व मनाया जाता है। इस बार पर्व 25 सितंबर 2026, शुक्रवार यानी आज मनाया जा रहा है।
इस दिन जगत के पालनहर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त विधिवत रुप से पूजा करने के साथ ही भगवान से सुख, शांति, धन और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। इतना ही नहीं, आज के दिन रेशम, कुशा सूती के सूत्र में 14 गांठें लगाई जाने की परंपरा भी मुख्य रुप से निभाई जाती है।
इसके साथ ही अनंत चतुर्दशी का संबंध भगवान गणेश जी से भी है, क्योंकि इस दिन 10 दिवसीय गणोशोत्सव का भी समापन होता है और श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा का विधिपूर्वक विसर्जन करते हैं।
वैसे अनंत चतुर्दशी के मौके पर लंबे समय से कई परंपराएं चली आ रही है, जिनमें पंचामृत में अनंत भगवान को ढूंढने की परंपरा भी शामिल है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं-
अनंत चतुर्दशी पर भगवान को खोजने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का व्रत समुद्र मंथन की पौराणिक मान्यताओं से संबंधित मानी जाती है। इस दिन पूजा के समय अनंत भगवान को खीरे में बांधकर दूध, दही, घी, शहद और चीनी से बने पंचामृत में रखकर खोजने की परंपरा निभाई जाती है।
साधक इस दौरान भगवान अनंत को खोजते हैं। इस परंपरा को समुद्र मंथन की घटना से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि समुद्र मंथन के समय देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र को मथा था, जिससे अमृत और विष निकला और अन्य अमूल्य चीजें बाहर निकली थी।
असल में समुद्र मंथन का संबंध भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि मंथन से निकले विष को शिव ने धारण किया था। इसलिए उन्हें 'नीलकंठ' के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अनंत चतुर्दशी के मौके पर भगवान विष्णु अनंत रूप में प्रकट हुए थे और भक्तों की रक्षा की थी। इस परंपरा के कारण सदियो से अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा करने की परंपरा है।
अनंत चतुर्दशी 2026 डेट
भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि का आरंभ - 24 सितंबर 2026, रात 11 बजकर 18 मिनट से
भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि का समापन - 25 सितंबर 2026, रात 11 बजकर 6 मिनट तक
अनंत चतुर्दशी 2026 पूजा मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी पूजन मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 28 मिनट से रात्रि 11 बजकर 06 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 24 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर को 12 बजकर 37 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 14 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 6 बजकर 15 मिनट से शाम 6 बजकर 39 मिनट तक
रवि योग- सुबह 6 बजकर 12 मिनट से सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक
गणेशोत्सव का समापन
आज ही के दिन भक्तजन भगवान विष्णु की विधिवत रुप से पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान 14 गांठों वाला अनंत सूत्र पहना जाता है। इन गांठों को भगवान विष्णु के अनंत स्वरुप और जीवन में स्थिरता और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। धार्किम मान्यता के अनुसार, अनंत सूत्र पहनने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में आने वाले संकट भी दूर हो जाते हैं। वहीं, 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन भी गणेश विर्सजन के साथ होता है।
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