इंदौर में अवैध दवा गोदाम पर छापा,10 हजार से ज्यादा गर्भपात किट बरामद, 9 हजार किट पहले ही बिकने का दावा
इंदौर के धार कोठी इलाके में ड्रग विभाग और पुलिस ने गुरुवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए गर्भपात में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का बड़ा जखीरा जब्त किया है। दरअसल टीम ने सेंट रेफियल स्कूल के पास स्थित क्वालिटी फार्मा से जुड़े गोदाम पर छापा मारा जहां 10 हजार से ज्यादा गर्भपात किट के अलावा दूसरी दवाएं भी मिलीं है। वहीं शुरुआती जांच में जब्त दवाओं की कीमत 52 लाख रुपए से अधिक बताई गई है।
वहीं जांच के दौरान अधिकारियों को गोदाम में दवाओं के भंडारण और बिक्री से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। विभाग के अनुसार फर्म के पास लाइसेंस है, लेकिन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने के कारण पूरी खेप को जब्त कर लिया गया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां से आईं और किन लोगों या संस्थानों तक पहुंचीं।
9 हजार गर्भपात किट बिकने की जानकारी मिली
दरअसल छापेमारी के दौरान सबसे अहम जानकारी यह सामने आई है कि संबंधित फर्म से करीब 9 हजार गर्भपात किट पहले ही बेची जा चुकी हैं। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिक्री का पूरा रिकॉर्ड अभी जांच के दायरे में है और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही अंतिम तस्वीर सामने आएगी। अधिकारियों ने संबंधित पक्ष से स्टॉक रजिस्टर, बिल, सप्लाई रिकॉर्ड और बिक्री से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। जांच अब इस दिशा में भी बढ़ रही है कि दवाओं की सप्लाई अधिकृत मेडिकल स्टोर और अस्पतालों तक हुई या कहीं नियमों के खिलाफ वितरण किया गया। कार्रवाई के दौरान सिडेनफिल साइट्रेट और ‘सेफ्टी पिल’ ब्रांड की दवाएं भी बरामद हुईं जिन्हें भी जांच के लिए अलग रखा गया है। विभाग का कहना है कि जब्त दवाओं के बैच नंबर और सप्लाई चैन की भी जांच की जाएगी।
अवैध दवा भंडारण पर कार्रवाई
वहीं ड्रग विभाग के मुताबिक इस मामले में जावेद खान और अजय सवडतकर नामक व्यक्तियों से जुड़ी दवाएं जब्त की गई हैं। जांच पूरी होने के बाद दोनों की भूमिका स्पष्ट होगी और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। विभाग ने जानकारी दी कि गर्भपात संबंधी दवाओं की बिक्री तय चिकित्सकीय प्रक्रिया और वैध प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही की जा सकती है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जब्त दवाओं और दस्तावेजों की विस्तार से जांच जारी है। यह पूरी कार्रवाई ड्रग इंस्पेक्टर सारिका अग्रवाल, योगेश गुप्ता और लोकेश गुप्ता की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर की।
MP में किसानों के नाम पर करोड़ों का पॉलीहाउस लोन घोटाला, उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा जवाब
मध्यप्रदेश में किसानों के नाम पर पॉलीहाउस निर्माण के लिए लिए गए करोड़ों रुपये के लोन घोटाला मामले में कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर सवाल किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि किसानों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पॉलीहाउस निर्माण के लिए लोन लिया गया और फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाणपत्रों के आधार पर निजी फर्मों को भुगतान कराया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा कि जब खेतों में पॉलीहाउस बने ही नहीं, तो सरकारी रिकॉर्ड में इन्हें पूरा किस आधार पर दिखाया गया।
क्या है मामला
खरगोन में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलीहाउस निर्माण के लिए किसानों के नाम पर लिए गए लोन में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। योजना अंतर्गत 33 किसानों के नाम पर 7.80 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि कई जगह पॉलीहाउस बने ही नहीं, लेकिन फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्रों के आधार पर निजी फर्मों को भुगतान कर दिया गया।
जांच में कुछ प्रमाण-पत्र लोन स्वीकृत या राशि जारी होने से पहले की तारीख के पाए गए। मामले की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू कर रहा है। जांच के बाद बैंक अधिकारियों और निजी फर्मों से जुड़े 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। एक अलग 1.90 करोड़ रुपये के ऋण में कथित अनियमितता को मिलाकर मामले में करीब 9.70 करोड़ रुपये की संभावित बैंक क्षति बताई गई है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने कहा कि किसानों के नाम पर हुए इस फर्जीवाड़े में सरकारी सिस्टम की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब खेतों में पॉलीहाउस मौजूद नहीं थे तब उनके निर्माण को कागजों पर पूरा कैसे दिखाया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूछा कि किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये के इस खेल में किसकी मिलीभगत थी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।
किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा और सरकारी सिस्टम बेखबर!
राष्ट्रीय बागवानी मिशन में पॉलीहाउस बनाने के लिए 33 किसानों के नाम पर ₹7.80 करोड़ से ज्यादा के लोन का गबन, लेकिन कई जगह पॉलीहाउस बने ही नहीं। फर्जी पूर्णता प्रमाण-पत्रों के जरिए निजी फर्मों को किया गया भुगतान। EOW ने बैंक…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 25, 2026
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