इटली में स्कूलों में बुर्का-नकाब पर बैन:नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपए तक जुर्माना; कुछ विदेशी छात्रों की संख्या 30% तक सीमित
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने स्कूलों के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है। इसके तहत स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे पूरे चेहरे को ढकने वाले कपड़ों पर रोक लगा दी गई है। नियम तोड़ने पर 1000 यूरो यानी करीब 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ विदेशी छात्रों की संख्या एक क्लास में 30% तक सीमित की गई है। हालांकि, हिजाब यानी सिर और बाल ढकने वाले स्कार्फ पर यह रोक लागू नहीं होगी। अगर चेहरा ढकने वाला छात्र नाबालिग है तो जुर्माना उसके माता-पिता पर लगाया जा सकता है। नए नियमों को 60 दिन के भीतर संसद से पास कराना जरुरी नए नियम फिलहाल डिक्री-लॉ यानी अस्थायी कानून के तौर पर लागू होंगे।इन्हें स्थायी कानून बनाने के लिए 60 दिनों के अंदर संसद की मंजूरी लेनी होगी। सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद विदेशी छात्रों को इटली की स्कूल व्यवस्था में बेहतर तरीके से घुलने-मिलने और इटैलियन भाषा सीखने में मदद करना है। हर विदेशी छात्र पर 30% की सीमा नहीं सरकार ने साफ किया है कि 30% की सीमा हर गैर-इटालियन छात्र पर लागू नहीं होगी। यह उन कुछ विदेशी छात्रों के लिए है, जिन्हें इटैलियन भाषा या स्कूल व्यवस्था में पर्याप्त अनुभव नहीं है। प्राइमरी स्कूलों में उन बच्चों को इस गिनती में शामिल किया जाएगा, जो इटली में पैदा नहीं हुए हैं या जिन्होंने इटली की शिक्षा व्यवस्था में कम से कम 2 साल प्री-स्कूल नहीं किया है। सेकेंडरी स्कूलों में उन गैर-इटालियन छात्रों को गिना जाएगा, जिन्होंने इटली की राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था में कम से कम 3 साल की पढ़ाई पूरी नहीं की है। इटली में पैदा हुए बच्चों और वहां की स्कूल व्यवस्था में पर्याप्त समय से पढ़ रहे छात्रों को 30% की सीमा में नहीं गिना जाएगा। इटली में मेलोनी से भी ज्यादा दक्षिणपंथी नेता की एंट्री इटली में अगले साल 2027 में आम चुनाव होने हैं। इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से आने वाले लोगों का मुद्दा वहां पहले से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) को अब नेशनल फ्यूचर (FN) से चुनौती मिल रही है। यह पार्टी मेलोनी की पार्टी से भी ज्यादा सख्त इमिग्रेशन नीति की मांग करती है। FN ने इसी साल जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की मांग की थी। यानी जिस मुद्दे पर अब मेलोनी सरकार कानून लाने जा रही है, उस पर उनसे भी ज्यादा सख्त रुख रखने वाली पार्टी पहले ही दबाव बना रही थी। इटली में 50 साल से चेहरा ढकने पर प्रतिबंध इटली में चेहरा ढकने को लेकर 1975 से कानून है। इसके तहत सार्वजनिक जगहों पर इस तरह चेहरा ढकना मना है, जिससे किसी व्यक्ति की पहचान न हो सके। हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है। 2008 के एक कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक या सांस्कृतिक वजह से चेहरा ढकता है, तो सिर्फ इसी वजह से उसे कानून तोड़ने वाला नहीं माना जाएगा। मामले की परिस्थितियों को भी देखा जाएगा। अब मेलोनी सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब पर अलग से रोक लगाने की तैयारी कर रही है। सरकार की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कानून बनाने के लिए संसद में भेजा जाएगा। इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी मिलना जरूरी होगा। यूरोपीय अदालत ने बुर्का पर बैन को सही ठहराया यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स फ्रांस और बेल्जियम में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का-नकाब पर रोक को सही ठहरा चुका है। फ्रांस में 2014 और बेल्जियम में 2017 के फैसले में अदालत ने कहा था कि लोगों के बीच मेलजोल बनाए रखना ऐसी रोक का आधार हो सकता है। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इसका विरोध किया है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें… गाजा में 2 बोरी आटे के बदले बेटी की शादी:UN रिपोर्ट- रेप पीड़िताओं की आरोपियों से शादी, बाल विवाह 123% बढ़े संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी 2 बोरी आटे के बदले कर दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
जंग खत्म करने को ईरान का 7 दिन का प्लान:सभी मोर्चों पर लड़ाई रुके, तेल पर प्रतिबंध हटे, 7वें दिन होर्मुज खोलने पर बात
ईरान ने अमेरिका के सामने जंग रोकने का 7 दिन का प्लान रखा है। ईरान का कहना है कि सबसे पहले लड़ाई बंद हो और ईरान के तेल बेचने पर लगी पाबंदियों में राहत दी जाए। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत शुरू होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। जंग रोकने का प्रस्ताव ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को भेजा है। पजशकियान बोले- समझौते के बाद हमला हुआ पजशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि जून में दोनों देशों के बीच एक समझौते का आधार तैयार हो गया था और ईरान आगे बढ़ने के लिए राजी था। उन्होंने कहा कि उस समय होर्मुज खुला था और बातचीत का रास्ता भी खुला था, लेकिन इसके बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। पजशकियान के मुताबिक, ईरान अब भी बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी हमले रुकने जरूरी है। ट्रम्प की चेतावनी के बाद आया प्रस्ताव ईरानी प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को 'पूरी तरह तबाह' कर सकता है। अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ----------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ईरान बोला-फिर हमला हुआ तो युद्ध हिंद महासागर तक फैलेगा: इससे भारत-चीन पर असर ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
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