Gautam Gambhir ने गृह मंत्री Amit Shah से की मुलाकात, मार्गदर्शन के लिए जताया आभार
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और अपना समय और मार्गदर्शन देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। गंभीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के साथ एक सुखद मुलाकात। उनके समय और मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ। उनके अच्छे स्वास्थ्य और कुशलता की कामना करता हूँ।
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इसके अलावा, युवा मामले और खेल मंत्रालय (MYAS) के एक सूत्र ने पुष्टि की कि भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम जापान के खिलाफ अपने ऐतिहासिक वन-ऑफ T20 इंटरनेशनल मैच के लिए BCCI की जर्सी पहनेगी। टीम को टूर्नामेंट के बाकी मैचों के लिए अपनी आधिकारिक एशियाई खेल किट भी मिल गई है। 20वें एशियाई खेल जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक हो रहे हैं, जिसमें भारत 36 खेलों में हिस्सा ले रहा है। पिछले संस्करण में स्वर्ण पदक जीतने वाला भारत, इन खेलों में अपना पहला मैच 28 सितंबर को क्वार्टर-फाइनल चरण में खेलेगा।
MYAS के सूत्र ने स्पष्ट किया कि 22 सितंबर को तोचिगी प्रान्त के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में जापान के खिलाफ होने वाला मैच एक फ्रेंडली मैच है और एशियाई खेलों की प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं है। सूत्र ने कहा कि टीम जापान के खिलाफ मैच अपनी सामान्य किट में खेलेगी क्योंकि यह मैच एशियाई खेलों का हिस्सा नहीं है; यह एक फ्रेंडली मैच है। लेकिन बाकी टूर्नामेंट के लिए, साइज़ की समस्या सुलझा ली गई है और उन्हें टूर्नामेंट के लिए अपनी किट मिल गई है।
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यह स्पष्टीकरण एशियाई खेलों के अभियान से पहले भारतीय टीम की आधिकारिक किट की उपलब्धता और साइज़ को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद आया है। जापान T20I और एशियाई खेलों के लिए भारत की टीम में श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उप-कप्तान), अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, वैभव सूर्यवंशी, यश ठाकुर और विपराज निगम शामिल हैं।
Varaha Jayanti पर पंचामृत से करें श्रीहरि का अभिषेक, 13 सितंबर को बन रहा पूजा का शुभ संयोग
भगवान विष्णु की पूजा सृष्टि के पालनहार के रूप में की जाती है। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और सृष्टि का संतुलन बिगड़ता है, तब-तब भगवान विष्णु अलग-अलग रूपों में अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं और अधर्म का नाश करते हैं। भगवान विष्णु के इन्हीं अवतारों में वराह अवतार है। भगवान विष्णु ने समुद्र में डूबी पृथ्वी को बाहर निकालने के लिए और असुर हिरण्याक्ष का वध करने के लिए वराह अवतार लिया था। इस बार 13 सितंबर 2026 को वराह जयंती मनाई जा रही है। भगवान श्रीहरि के इस स्वरूप में साहस, शक्ति और संरक्षण का संगम देखने को मिलता है। तो आइए जानते हैं वराह जंयती की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और पौराणिक कथा के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरूआत 13 सितंबर 2026 की सुबह 07:08 मिनट पर हो रहा है। वहीं अगले दिन यानी की 14 सितंबर 2026 की सुबह 07:08 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। वहीं उदयातिथि के आधार पर 13 सितंबर 2026 को वराह जयंती मनाई जा रही है।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें और फिर व्रत और पूजा का संकल्प लें। अब सू्र्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की प्रतिमा को पूजा स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद जल से भरा कलश रखें और भगवान श्रीहरि के वराह स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान वराह को पीले फूल, फल और पीले वस्त्र आदि अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर श्रीहरि की आरती करें। पूजा के दौरान 'ॐ वाराहाय नमः' मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में श्रीहरि विष्णु से परिवार की सुख-शांति व समृद्धि के लिए कामना करें।
पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक हिरण्याक्ष नामक एक शक्तिशाली असुर तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। उसके अत्याचार से देवता, ऋषि-मुनि और अन्य प्राणी परेशान थे। वहीं हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र के गहरे जल में ले जाकर छिपा दिया। पृथ्वी के जल में समा जाने से सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और चारों तरफ संकट पैदा होने लगा। तब पृथ्वी की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया और वह गहरे समुद्र में उतरे। भगवान वराह ने अपने दांतों पर पृथ्वी को उठाया और जल से बाहर ले आए।
फिर हिरण्याक्ष के लिए भगवान विष्णु का भयंकर युद्ध हुआ। अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस कारण से भगवान विष्णु के वराह अवतार को उन रूपों में गिना जाता है, जिन्होंने सृष्टि की रक्षा और अधर्म का विनाश किया।
धार्मिक महत्व
वराह जयंती श्रीहरि विष्णु की शक्ति और उनके रक्षक स्वरूप की याद दिलाने वाला पर्व है। जो भी व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान वराह की पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन में आने वाले सभी दोष और परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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