आईफोन 18प्रो दुबई में भारत से ₹33,000 सस्ता:फ्लाइट और वीजा खर्च के बाद भी पैसे बच जाएंगे, जानें पूरा गणित
आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स को खरीदने का क्रेज कितना है, इसका अंदाजा तो आपने भारत में एपल स्टोर पर लाइन में लगे लोगों को देखकर लगा सकते हैं। यही नहीं, इस बार एपल फैंस के लिए यह शॉपिंग ट्रिप इंटरनेशनल बन गई है। लोग आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स खरीदने के लिए दुबई जा रहे हैं, क्योंकि भारत और UAE की कीमतों में बड़ा अंतर है। खरीदारों का कहना है कि फ्लाइट टिकट और वीजा का खर्च जोड़ने के बाद भी दुबई से आईफोन खरीदना सस्ता पड़ रहा है। भारत में आईफोन प्रो की शुरुआती कीमत 1.65 लाख रुपए है, जबकि फ्लाइट टिकट और वीजा जोड़ने के बाद भी पड़ रहा सस्ता 18 सितंबर को जब दुबई मॉल के एपल स्टोर पर नए आईफोन की बिक्री शुरू हुई, तब भारतीय खरीदारों ने यही कैलकुलेशन लगाया। आईफोन दुबई में क्यों सस्ता है? दुबई में आईफोन सस्ता होने की मुख्य वजह टैक्स का अंतर है। UAE में स्मार्टफोन्स पर सिर्फ 5% का वैट लगता है, जबकि भारत में भारी टैक्स और इंपोर्ट-ड्यूटी की वजह से कीमतें काफी बढ़ जाती हैं। ₹1.5 लाख से महंगे प्रीमियम फोन्स पर यही टैक्स का अंतर सीधे ₹30,000 से ₹40,000 तक की बचत बन जाता है। खास बात यह है कि यह अंतर किसी पुराने मॉडल का नहीं, बल्कि दोनों देशों में बिक रहे बिल्कुल एक जैसे नए प्रो मॉडल्स का है। क्रॉस-बॉर्डर प्राइसिंग का खरीदारों पर असर एयरटेल डिजिटल के मार्केटिंग मैनेजर अभिषेक थॉमस के मुताबिक, कीमतों का यह अंतर दिखाता है कि दाम केवल यह तय नहीं करते कि लोग क्या खरीदेंगे, बल्कि यह भी तय करते हैं कि वे खरीदारी कहाँ से करेंगे। उन्होंने बताया कि अगर कोई घूमने के साथ-साथ दुबई से आईफोन भी खरीद लाता है, तो यह फायदे का सौदा बन जाता है। हालांकि, भारत लाते समय कस्टम्स नियमों और टैक्स छूट की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है। आईफोन 18-प्रो और प्रो-मैक्स में अब तक की सबसे बड़ी बैटरी एपल ने 9 सितंबर को अपने पहले फोल्डेबल फोन के साथ आईफोन 18-प्रो, आईफोन 18-प्रो मैक्स भी लॉन्च किए थे। ये आईफोन के पहले प्रीमियम फोन हैं जिनमें 48 मेगापिक्सल के तीन कैमरा दिए गए हैं, इनमें मेन कैमरा, टेलीफोटो कैमरा और अल्ट्रावाइड कैमरा है। एपल ने दावा किया कि सिंगल चार्जिंग में 18-प्रो 24 घंटे और 18-प्रो मैक्स 30 घंटे तक चलेगा। यह अब तक का सबसे ज्यादा बैटरी बैकअप है। फोन सिर्फ 15 मिनट में 50% चार्ज हो जाएगा। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… बिना इंश्योरेंस पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा: नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम का ट्रायल शुरू होगा; पंप पर कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करेंगे अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं है तो जल्द करा लें, नहीं तो आपको पंप पर पेट्रोल या डीजल भरवाने में दिक्कत हो सकती है। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार जल्द ही नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत पेट्रोल पंप पर कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। अगर गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं मिला, तो फ्यूल नहीं दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
बिना इंश्योरेंस पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा:नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम का ट्रायल शुरू होगा; पंप पर कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करेंगे
अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं है तो जल्द करा लें, नहीं तो आपको पंप पर पेट्रोल या डीजल भरवाने में दिक्कत हो सकती है। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार जल्द ही नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत पेट्रोल पंप पर कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। अगर गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं मिला, तो फ्यूल नहीं दिया जाएगा। देश में बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों पर रोक लगाने के लिए बीमा नियामक IRDAI जल्द ही कुछ शहरों में इसका ट्रायल शुरू करेगा। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस देश में अनिवार्य इस ट्रायल का मकसद यह देखना है कि पेट्रोल भरवाते समय तुरंत बीमा का पता लगाया जा सकता है या नहीं। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस देश में कानूनन अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद आधे से अधिक वाहन चालक इसे रिन्यू नहीं कराते। नए नियम का मुख्य मकसद लोगों से थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियम का सख्ती से पालन करवाना है। पंपों को गाड़ियों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके तहत पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा। अगर किसी गाड़ी का बीमा वैलिड नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप पर उसे पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा। जब तक गाड़ी मालिक बीमा नहीं करा लेता, तब तक गाड़ी को फ्यूल नहीं मिलेगा। नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब… सवाल 1: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होता क्या है? जवाब: जब आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति (तीसरे पक्ष), उसकी गाड़ी या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो बीमा कंपनी उस नुकसान की भरपाई करती है। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 146 के तहत भारत में हर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसमें आपकी अपनी गाड़ी के नुकसान का कवर शामिल नहीं होता। सवाल 2: नई गाड़ी के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियमों में क्या बदलाव होगा? जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय खरीदे जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जरूरी समयसीमा को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है… 2018 में कारों के लिए 3 साल और बाइक्स के लिए 5 साल का नियम लागू किया गया था, लेकिन 8 साल बाद भी करोड़ों गाड़ियां बिना बीमा के चल रही हैं। इसीलिए यह समयसीमा बढ़ाई गई है। सवाल 3: बिना बीमा वाली गाड़ियों के क्या नुकसान? जवाब: मोटर व्हीकल एक्ट (MVA) की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसे के शिकार लोगों को तुरंत आर्थिक मुआवजा दिलाना है। जब गाड़ी का बीमा नहीं होता, तो पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजे और जिम्मेदारी तय कराने के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। खासकर उन परिवारों के लिए स्थिति भयावह हो जाती है, जहां हादसे में कमाने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है। सवाल 4: क्या वाहन मालिकों को बीमा के लिए अतिरिक्त विकल्प या कस्टमाइजेशन की सुविधा मिलेगी? जवाब: हां, सुप्रीम कोर्ट ने IRDA को निर्देश दिया है कि वह प्राइवेट वाहन मालिकों को अलग-अलग पॉलिसी ऑप्शन उपलब्ध कराए। इसमें बेस थर्ड-पार्टी कवर के साथ-साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एड-ऑन और ओन-डैमेज कवर चुनने के कई विकल्प मिलने चाहिए, ताकि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से बीमा चुन सकें। सवाल 5: सड़क पर चेकिंग के दौरान पुलिस कैसे पता लगाएगी कि इंश्योरेंस है या नहीं? जवाब: वर्तमान में राज्यों की पुलिस के पास मौके पर तुरंत इंश्योरेंस चेक करने का कोई एक समान सिस्टम नहीं है। इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइसेज या मोबाइल एप्स दिए जाएं। ये डिवाइसेज VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से सीधे जुड़े होंगे। इससे पुलिस तुरंत गाड़ियों का रियल-टाइम बीमा स्टेटस चेक कर सकेगी और ई-चालान काट सकेगी। सवाल 6: इंश्योरेंस सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर? जवाब: अगर यह नियम सख्ती से लागू होता है, तो जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम कलेक्शन में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
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