बिना इंश्योरेंस पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा:नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम का ट्रायल शुरू होगा; पंप पर कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करेंगे
अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं है तो जल्द करा लें, नहीं तो आपको पंप पर पेट्रोल या डीजल भरवाने में दिक्कत हो सकती है। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार जल्द ही नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत पेट्रोल पंप पर कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। अगर गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं मिला, तो फ्यूल नहीं दिया जाएगा। देश में बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों पर रोक लगाने के लिए बीमा नियामक IRDAI जल्द ही कुछ शहरों में इसका ट्रायल शुरू करेगा। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस देश में अनिवार्य इस ट्रायल का मकसद यह देखना है कि पेट्रोल भरवाते समय तुरंत बीमा का पता लगाया जा सकता है या नहीं। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस देश में कानूनन अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद आधे से अधिक वाहन चालक इसे रिन्यू नहीं कराते। नए नियम का मुख्य मकसद लोगों से थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियम का सख्ती से पालन करवाना है। पंपों को गाड़ियों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके तहत पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा। अगर किसी गाड़ी का बीमा वैलिड नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप पर उसे पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा। जब तक गाड़ी मालिक बीमा नहीं करा लेता, तब तक गाड़ी को फ्यूल नहीं मिलेगा। नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल नियम से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब… सवाल 1: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होता क्या है? जवाब: जब आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति (तीसरे पक्ष), उसकी गाड़ी या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो बीमा कंपनी उस नुकसान की भरपाई करती है। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 146 के तहत भारत में हर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसमें आपकी अपनी गाड़ी के नुकसान का कवर शामिल नहीं होता। सवाल 2: नई गाड़ी के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के नियमों में क्या बदलाव होगा? जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय खरीदे जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जरूरी समयसीमा को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है… 2018 में कारों के लिए 3 साल और बाइक्स के लिए 5 साल का नियम लागू किया गया था, लेकिन 8 साल बाद भी करोड़ों गाड़ियां बिना बीमा के चल रही हैं। इसीलिए यह समयसीमा बढ़ाई गई है। सवाल 3: बिना बीमा वाली गाड़ियों के क्या नुकसान? जवाब: मोटर व्हीकल एक्ट (MVA) की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसे के शिकार लोगों को तुरंत आर्थिक मुआवजा दिलाना है। जब गाड़ी का बीमा नहीं होता, तो पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजे और जिम्मेदारी तय कराने के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। खासकर उन परिवारों के लिए स्थिति भयावह हो जाती है, जहां हादसे में कमाने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है। सवाल 4: क्या वाहन मालिकों को बीमा के लिए अतिरिक्त विकल्प या कस्टमाइजेशन की सुविधा मिलेगी? जवाब: हां, सुप्रीम कोर्ट ने IRDA को निर्देश दिया है कि वह प्राइवेट वाहन मालिकों को अलग-अलग पॉलिसी ऑप्शन उपलब्ध कराए। इसमें बेस थर्ड-पार्टी कवर के साथ-साथ पर्सनल एक्सीडेंट कवर, एड-ऑन और ओन-डैमेज कवर चुनने के कई विकल्प मिलने चाहिए, ताकि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से बीमा चुन सकें। सवाल 5: सड़क पर चेकिंग के दौरान पुलिस कैसे पता लगाएगी कि इंश्योरेंस है या नहीं? जवाब: वर्तमान में राज्यों की पुलिस के पास मौके पर तुरंत इंश्योरेंस चेक करने का कोई एक समान सिस्टम नहीं है। इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राज्य पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइसेज या मोबाइल एप्स दिए जाएं। ये डिवाइसेज VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से सीधे जुड़े होंगे। इससे पुलिस तुरंत गाड़ियों का रियल-टाइम बीमा स्टेटस चेक कर सकेगी और ई-चालान काट सकेगी। सवाल 6: इंश्योरेंस सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर? जवाब: अगर यह नियम सख्ती से लागू होता है, तो जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के प्रीमियम कलेक्शन में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
AI के ‘गॉडफादर’ की चेतावनी:अगले 10 साल में AI से इंसानी सभ्यता खत्म हो सकती है, जानें कैसे इंसानों को धमका रहा AI
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यानी AI अगले 10 साल में इंसानी सभ्यता को खत्म कर सकती है। नोबेल प्राइज विनर और AI को विकसित करने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल जेफ्री हिंटन ने यह चेतावनी दी है। हालांकि, वे इसकी 10% आशंका जताते हैं। हिंटन ने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा- AI के इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान होने की स्थिति पहली बार सामने आ रही है, इसलिए खतरे का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। दरअसल, हालिया टेस्ट में कुछ AI मॉडल्स ने बिना इंसानी मदद के सुरक्षा घेरा तोड़कर सर्वर तक पहुंच बनाई। वहीं, एक टेस्ट में AI ने खुद को बंद होने से बचाने के लिए अधिकारी के निजी अफेयर की जानकारी लीक करने की धमकी भी दी। पहले 30-50 साल दूर लगता था खतरा, अब समय 10 साल तक सिमटा हिंटन की चिंता नई नहीं है, लेकिन समय-सीमा को लेकर उनका अनुमान बदलता रहा है। दिसंबर 2024 में हिंटन ने कहा था कि अगले 30 साल में AI के कारण इंसानी सभ्यता खत्म होने की 10% से 20% आशंका हो सकती है। अब उनके ताजा बयान में सवाल अगले 10 साल का है। यानी उनकी चिंता सिर्फ यह नहीं है कि AI कभी खतरनाक हो सकती है, बल्कि यह भी है कि यह स्थिति पहले सोचे गए समय से काफी जल्दी आ सकती है। AI को लेकर हिंटन की 3 अहम बातें... AI की दुनिया में क्या चल रहा है और इसका हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा, 4 सवालों के जरिए समझिए … सवाल-1: ‘2030 तक AI हम सबको मार सकता है’, इस दावे का मतलब क्या है? जवाब: 1 नवंबर 2023 को भारत समेत 28 देशों और यूरोपीय संघ ने भी AI से जुड़े साइबर हमले, गलत सूचना और नियंत्रण खोने जैसे गंभीर खतरों को माना था। संघ ने कहा था कि खतरा तब होगा, जब भविष्य की बेहद शक्तिशाली AI इंसानों के कंट्रोल से बाहर होकर इतना बड़ा नुकसान करे कि मानव सभ्यता के अस्तित्व पर ही संकट आ जाए। माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने 2023 में लिखा था, ‘AI इंसानों को कंट्रोल कर सकता है। अगर उसे लगा कि इंसान उसके लिए खतरा है, तो वो हमारी बात सुनना बंद कर देगा।’ सवाल-2: AI की दुनिया में ऐसा क्या चल रहा, जिससे सभी डरे हुए हैं? जवाबः ऐसी आशंकाओं के पीछे दो बड़े आधार हैं… 1. AI अब सुपरइंटेलिजेंट बन रहा है 2. इंसानों को चकमा देने लगा है AI सवाल-3: तो क्या AI को कंट्रोल नहीं किया जा सकता? जवाब: कोशिशें हो रही हैं, लेकिन अभी इन्हें पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। सवाल-4: AI अगले कुछ सालों में हमारी जिंदगी कैसे बदल सकता है? जवाब: डारियो अमोदेई का दावा है कि अगले 1 से 5 साल में AI की वजह से एंट्री लेवल की आधी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। अगले 5 सालों में दुनिया में बेरोजगारी दर 20% तक पहुंच जाएगी। हालांकि, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग का कहना है कि AI से नए तरह के काम और नौकरियां भी पैदा होंगी। वहीं, भारत में हुए AI समिट के दौरान डारियो अमोदेई ने दावा किया था, ‘जिन बीमारियों का इलाज सालों से नहीं मिला, AI उसका इलाज ढूंढने में काबिल है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 






