IND vs WI 1st ODI: वेस्टइंडीज के खिलाफ कैसी होगी टीम इंडिया की प्लेइंग-11, जानिए किसे मिलेगा मौका और कौन होगा बाहर?
IND vs WI 1st ODI : टीम इंडिया और वेस्टइंडीज के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जाने वाली है. इस सीरीज की शुरुआत 27 सितंबर से होगी, जबकि 3 अक्टूबर को तीसरा मैच खेला जाएगा. इस सीरीज में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे. टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर इस सीरीज के लिए गिल के साथ मिलकर तय करेंगे कि तीन मैचों के लिए टीम इंडिया की प्लेइंग-11 में किया ग्याहरा खिलाड़ियों को चुना जाएगा और कौन से 4 खिलाड़ी प्लेइंग-11 से बाहर होंगे. आइए टीम इंडिया की संभावित प्लेइंग-11 के बारे में जानते हैं.
A new ODI chapter, new combinations and plenty to look forward to as #TeamIndia gets set for the challenge ahead.
— Star Sports (@StarSportsIndia) September 24, 2026
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इन बल्लेबाजों के मिलेगा प्लेइंग-11 में चांस
वेस्टइंडीज के खिलाफ शुभमन गिल और रोहित शर्मा भारत के लिए पारी की शुरुआत करेंगे. तीसरे नंबर पर विराट कोहली खेलने के लिए आएंगे. नंबर-4 पर रुतुराज गायकवाड़ खेलेंगे क्योंकि श्रेयस अय्यर इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं. ऐसे में भारत के टॉप-4 बल्लेबाज शुभमन गिल, रोहित शर्मा, विराट कोहली और रुतुराज गायकवाड़ होंगे.
The last time #RuturajGaikwad walked out in Blue, he delivered a masterclass ????
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How will he fare on his return?#INDvWI ???? 1st ODI ???? SUN, 27th SEP, 1 PM pic.twitter.com/ixcVwccpTW
भारत के लिए केएल राहुल बतौर विकेटकीपर खेलेंगे और नंबर-5 पर बल्लेबाजी करेंगे. छठवें बल्लेबाज के लिए माथापच्ची होगी. यशस्वी जायसवाल, ध्रुव जुरेल और नमन धीर में से किसे मौका मिलेगा. इसमें से चांस है कि, यशस्वी जायसवाल को मौका दिया जाए और उन्हें नए रोल में खिलाया जाए. वो टीम में नंबर 6 पर बल्लेबाजी करते हुए नजर आएं.
#KLRahul’s class on full display. ????
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Will we see more of this brilliance in the upcoming West Indies series?
Watch him in action, #INDvWI, 1st ODI ???? SUN, 27th SEP, 1 PM pic.twitter.com/rwQ2dtrk92
किन गेंदबाजों को मिलेगा प्लेइंग-11 में चांस
टीम इंडिया में बतौर स्पिनर रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव को शामिल किया जाएगा. टीम इंडिया 2 प्रमुख स्पिन गेंदबाजों के साथ खेलेगी. ऐसे में ये दोनों प्लेइंग-11 का हिस्सा होंगे. वहीं प्लेइंग-11 में शामिल होकर तीसरे स्पिन गेंदबाज का ऑप्शन देंगे. यशस्वी जासवाल लेग स्पिन बॉलिंग करने के लिए जाने जाते हैं.
तेज गेंदबाजी की बात करें तो, गुरनूर बराड़ अनुभवी पेसर मोहम्मद सिराज के साथ प्लेइंग-11 में शामिल हो सकता है. वहीं तीसरे तेज गेंदबाज की भूमिका में ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को शामिल किया जा सकता है. वो बैटिंग के साथ-साथ टीम को पेस बॉलिंग का ऑप्शन देंगे और कुछ ओवर यशस्वी डालकर टीम को मजबूती देंगे.
???????? ???????????????????????????????? ???????????????????????? ???????? ????????????????????????????????????! ????#TeamIndia’s historic run against the Windies stands as a testament to absolute consistency and power! ????????#INDvWI ???? 1st ODI ???? SUN, 27th SEP, 1 PM pic.twitter.com/BRN4crMFv7
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इन खिलाड़ियों को होना पड़ेगा बाहर
भारत और वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले पहले वनडे मैच से युवा बल्लेबाज नमन धीर को बाहर होना पड़ सकता है. उनके बाद ध्रुव जुरेल को भी बाहर बैठना पड़ सकता है क्योंकि केएल राहुल बतौर विकेटकीपर टीम में मौजूद होंगे. वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और आकिब नबी का भी टीम से बाहर होना तय है क्योंकि उनको तब मौका मिल सकता है, जब सिराज और गुरनूर खराब प्रदर्शन करेंगे.
वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की संभावित प्लेइंग-11
रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, रुतुराज गायकवाड़, यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल (उपकप्तान), नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, गुरनूर बराड़, मोहम्मद सिराज.
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UP Elections 2027: गोरखपुर जिले में बिछी सियासी बिसात
पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक केंद्र में बसा गोरखपुर जिला केवल अपनी विश्वप्रसिद्ध गीता प्रेस, टेराकोटा शिल्प और महायोगी गुरु गोरखनाथ की पवित्र तपोभूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला यूपी की सियासत में 'सत्ता का सिरमौर' तय करने वाला सबसे शक्तिशाली गढ़ माना जाता है. जहां अन्य जिले अपने क्षेत्रीय प्रभाव के लिए जाने जाते हैं, वहीं गोरखपुर को पूर्वांचल की राजनीतिक दिशा तय करने और राज्य की सत्ता के सबसे बड़े केंद्र होने का गौरव प्राप्त है. महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की यह कर्मभूमि और संतों-क्रांतिकारियों की यह पावन माटी समूचे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिज़ाज को स्पष्ट दिशा देती है. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील इस जिले में सभी प्रमुख दलों ने अपनी शतरंजी बिसात बिछानी शुरू कर दी है.
गोरखपुर न केवल राज्य का एक प्रमुख आध्यात्मिक व शैक्षणिक केंद्र है, बल्कि राप्ती नदी के तट, ऐतिहासिक धरोहरें और उम्दा टेराकोटा कला इसकी विशिष्ट पहचान हैं. गीडा (GIDA) के तेजी से उभरते औद्योगिक हब से लेकर गोलघर के ऐतिहासिक बाज़ारों तक, और बांसगांव के ग्रामीण अंचलों से लेकर कैंपियरगंज व सहजनवा के कृषि बेल्ट तक, गोरखपुर की सजग जनता का हर राजनीतिक फैसला लखनऊ की सत्ता के समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है.
‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात गोरखपुर जिले की...
गोरखपुर की राजनीति का मिज़ाज राज्य के अन्य जिलों की तुलना में बेहद कद्दावर, विकास-केंद्रित और चुनावी दृष्टि से अत्यंत निर्णायक माना जाता है. 9 विधानसभा सीटों (गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, कैंपियरगंज, सहजनवा, खजनी, बांसगांव, चौरी-चौरा और चिल्लूपार) वाला यह जिला सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए बाढ़ नियंत्रण, पूर्वांचल में रोजगार व नए निवेश, एम्स व बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसी स्वास्थ्य सेवाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और किसानों की समस्याएं बेहद निर्णायक सिद्ध होते हैं.
ऐतिहासिक रूप से गोरखपुर की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस के बीच कड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलता है. यहां का सवर्ण, पिछड़ा और दलित सामाजिक समीकरण, नाथ पीठ के प्रभाव के साथ मिलकर हर बार सत्ता की चाबी तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है. गोरखपुर की राजनीति में लंबे समय से विकास कार्य, कानून-व्यवस्था, उद्योग-व्यापार और क्षेत्रीय अस्मिता चुनावी नतीजों की दिशा तय करते आए हैं.
यहाँ के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे एम्स और स्वास्थ्य तंत्र का सुदृढ़ीकरण, गीडा में उद्योगों का विस्तार व स्थानीय रोजगार, टेराकोटा व हस्तशिल्प को बढ़ावा, राप्ती-रोहिन नदियों के कछार में बाढ़ व जलजमाव का स्थायी समाधान और किसानों को मिले बेहतर मूल्य के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर गोरखपुर जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस दल का पलड़ा भारी रहा है? और आगामी महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? आइये सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं…
2011 की जनगणना के अनुसार, गोरखपुर जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर
| विवरण | कुल | पुरुष | महिला |
| जनसंख्या | 44,40,895 | 22,77,777 | 21,63,118 |
| साक्षरता दर ) | 70.83% | 81.80% | 59.36% |
गोरखपुर की धार्मिक आबादी
| धर्म / समूह | जनसंख्या प्रतिशत |
| हिंदू | 90.28% |
| मुसलमान | 9.09% |
| ईसाई | 0.22% |
| बौद्ध | 0.06% |
| सिख | 0.05% |
| जैन | 0.01% |
| अन्य | 0.00% |
2022 विधानसभा चुनाव परिणाम
| क्र.सं. | विधानसभा सीट (Assembly Constituency) | उम्मीदवार का नाम (Candidate Name) | दल (Party) |
| 1 | कैम्पियरगंज (Campierganj - 320) |
फतेह बहादुर सिंह
काजल निषाद
आनंद निषाद
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 2 | पिपराइच (Pipraich - 321) |
महेंद्र पाल सिंह
अमरेंद्र निषाद
दीपक कुमार अग्रवाल
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 3 | गोरखपुर शहर (Gorakhpur Urban - 322) |
योगी आदित्यनाथ
सुभावती उपेन्द्र दत्त शुक्ला
ख्वाजा शम्सुद्दीन
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 4 | गोरखपुर ग्रामीण (Gorakhpur Rural - 323) |
बिपिन सिंह
विजय बहादुर यादव
दारा सिंह निषाद
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 5 | सहजनवा (Sahjanwa - 324) |
प्रदीप शुक्ला
यशपाल रावत
सुधीर सिंह
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 6 | खजनी (Khajni - 325) |
श्रीराम चौहान
रूपवती
विद्यासागर
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 7 | चौरी-चौरा (Chauri Chaura - 326) |
श्रवण कुमार निषाद
बृजेश चंद्र लाल
वीरेंद्र कुमार
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
| 8 | बांसगांव (Bansgaon - 327) |
विमलेश पासवान
डॉ. संजय कुमार
राम मिलन
|
भाजपा (BJP)
कांग्रेस / सपा गठबंधन
बसपा (BSP)
|
| 9 | चिल्लूपार (Chillupar - 328) |
राजेश त्रिपाठी
विनय शंकर तिवारी
राजेंद्र सिंह
|
भाजपा (BJP)
समाजवादी पार्टी (SP)
बसपा (BSP)
|
जानें इन सीटों के बारे में
1. कैम्पियरगंज: यह निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर के उत्तरी हिस्से में स्थित है और नेपाल सीमा के मार्ग पर पड़ता है. यहां से भाजपा के फतेह बहादुर सिंह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं, जो इस क्षेत्र के बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं.
2. पिपराइच: यह क्षेत्र मुख्य रूप से चीनी मिल और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है. 2022 के चुनाव में यहां भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने समाजवादी पार्टी के अमरेंद्र निषाद को बड़े अंतर से शिकस्त दी थी.
3. गोरखपुर शहर: यह जिले की सबसे हॉट सीट है, जहां से खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधायक हैं. गोरखपुर पीठ (गोरखनाथ मंदिर) का सीधा प्रभाव होने के कारण यह सीट दशकों से भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ रही है.
4. गोरखपुर ग्रामीण: शहर से सटे इस क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की आबादी का मिश्रण है. यहां निषाद और यादव मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है, और 2022 में भाजपा के बिपिन सिंह ने सपा के विजय बहादुर यादव को कड़े मुकाबले में हराया था.
5. सहजनवा: यह गोरखपुर का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र (GIDA) है, जो विकास और व्यापार के नजरिए से महत्वपूर्ण है. 2022 के चुनाव में यहां से भाजपा के प्रदीप शुक्ला ने जीत हासिल कर अपनी पार्टी का परचम लहराया था.
6. खजनी: यह गोरखपुर जिले की एक सुरक्षित (SC) विधानसभा सीट है, जहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या निर्णायक है. 2022 में भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री श्रीराम चौहान को यहां से मैदान में उतारकर जीत दर्ज की थी.
7. चौरी-चौरा: ऐतिहासिक रूप से यह जगह 1922 के स्वतंत्रता आंदोलन के 'चौरी-चौरा कांड' के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. राजनीतिक रूप से यह सीट निषाद और पिछड़े वर्ग के बाहुल्य वाली है, जहां 2022 में भाजपा के श्रवण कुमार निषाद ने जीत दर्ज की थी.
8. बांसगांव: खजनी की तरह यह भी एक सुरक्षित (SC) विधानसभा सीट है और बांसगांव लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यहां से भाजपा के विमलेश पासवान विधायक हैं, जिनका परिवार इस क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय है.
9. चिल्लूपार: यह सीट कभी पूर्वांचल के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी का अभेद्य किला मानी जाती थी और जिले में गैर-भाजपा राजनीति का केंद्र थी. हालांकि, 2022 के चुनाव में भाजपा के राजेश त्रिपाठी ने हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी (सपा) को हराकर इस किले को ढहा दिया था.
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