SIR Controversy & CEC Impeachment: SIR विवाद पर EC के खिलाफ मुखर हुई कांग्रेस, CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग लाने की तैयारी
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है और अगले दो हफ्तों के भीतर संसद में इसका नोटिस दिया जा सकता है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर चुनाव आयोग को संरक्षण देने और नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
एसआईआर विवाद और चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक कलह
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के इस आक्रामक रुख के पीछे मुख्य वजह मतदाता सूची का विशेष गहन हालिया पुनरीक्षण (SIR) और आयोग के भीतर का आंतरिक विवाद है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
इन आपत्तियों में मतदाता जोड़ने और नाम हटाने जैसी संवेदनशील प्रक्रियाएं शामिल थीं, जिसके बाद विपक्ष ने आयोग के निर्णयों की पूरी पारदर्शिता और स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।
????????. ???????????????????????????? ???????????????????? ???????????????? ???????????????????????? ????????????????????????????????????????????. ????We are not going to let democracy be destroyed in India and sit silent, and the people responsible for this are going to be punished. ????The two Election Commissioners have done a wise thing, and I appreciate it. ???? Mr. Gyanesh Kumar should think seriously about the position he's in, and he should turn approver. That is my advice to him. That would be an act of nationalism. : LoP Shri @RahulGandhi
— Congress (@INCIndia) September 24, 2026
विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यदि आयोग के अन्य सदस्यों ने फैसलों पर असहमति जताई थी, तो उन आपत्तियों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि SIR समेत सभी फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति और बहुमत के आधार पर लिए गए हैं।
आयोग का तर्क है कि किसी भी संवैधानिक संस्था के भीतर वैचारिक मतभेद होना या अलग-अलग विचार सामने आना कामकाज की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
पहले भी आ चुके हैं हटाने के प्रस्ताव और संवैधानिक प्रक्रिया
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा उठाया जाने वाला यह कदम कोई पहला नहीं है। इससे पहले मार्च और अप्रैल 2026 में भी विपक्षी सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए थे, जिन पर बड़ी संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर थे।
हालांकि, तब सभापति और लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उन प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाया गया था। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के समान ही होती है, जिसके लिए संसद में कड़े संवैधानिक प्रावधानों को पूरा करना अनिवार्य होता है।
आगे की राजनीतिक रणनीति
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दो हफ्तों में संसद के भीतर नया नोटिस पेश करने की पूरी तैयारी है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस नए प्रस्ताव में कितने सांसदों के हस्ताक्षर होंगे और किन-किन नए बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। फिलहाल विपक्षी दल इस गंभीर मुद्दे पर एक साझा रणनीति तैयार करने में जुटे हैं, ताकि संसद सत्र के दौरान चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता के सवाल पर सरकार को मजबूती से घेरा जा सके।
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