Explainer: फिल्म के 'वर्ल्डवाइड कलेक्शन' में किन-किन देशों की कमाई की जाती है शामिल? समझिए पूरा गणित
How is Movie Global Revenue Calculated: जब भी कोई बडे़ बजट की फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होती है, तो उसकी कमाई को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा 'वर्ल्डवाइड कलेक्शन' को लेकर होती है. अगर किसी फिल्म ने100 करोड़, 500 करोड़ या 1000 करोड़ रुपये कमाए, यह आंकड़ा बॉक्स ऑफिस पर उसके परफॉर्मेंस को दिखाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस 'वर्ल्डवाइड कलेक्शन' में आखिर किन-किन देशों की कमाई जोड़ी जाती है? क्या दुनिया के हर देश में बिकने वाली टिकटों की कमाई इसमें शामिल होती है? वहीं, भारत और विदेशों की कमाई को जोड़कर यह कलेक्शन कैसे कैलकुलेट किया जाता है. आइए यहां पर आसान भाषा में समझते हैं 'वर्ल्डवाइड कलेक्शन' का पूरा गणित.
वर्ल्डवाइड कलेक्शन किसे कहते हैं?
'वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन' का मतलब किसी फिल्म की दुनिया भर के सिनेमाघरों से हुई कुल होती है. इंडियन फिल्मों के मामले में इसे दो हिस्सों में समझा जाता है. पहला है भारत में फिल्म की कमाई और दूसरा है भारत के बाहर हुई कमाई, जिसे ओवरसीज कलेक्शन कहा जाता है. इन दोनों को जोड़ने के बाद फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन निकलकर सामने आता है.
यानी अगर किसी फिल्म ने भारत में 500 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया और विदेशों से 300 करोड़ रुपये की कमाई की, तो उसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 800 करोड़ रुपये होगा. हालांकि अलग-अलग ट्रेड रिपोर्ट्स में आंकड़ों की गणना और करेंसी कन्वर्जन के तरीके के कारण थोड़ा अंतर भी देखने को मिल सकता है.
सिर्फ टिकटों की कमाई होती है शामिल
यहां सबसे बात यह समझना जरूरी है कि वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और फिल्म की कुल कमाई एक ही चीज नहीं हैं. वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस में सिनेमाघरों में टिकट बेचकर मिलने वाला पैसा शामिल होता है. फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डिजिटल राइट्स बेचने से कितने पैसे मिले और सैटेलाइट राइट्स कितने में बिके या म्यूजिक राइट्स से कितनी कमाई हुई, यह सब बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में नहीं जोड़ा जाता है.
यानी अगर किसी फिल्म ने सिनेमाघरों से 500 करोड़ रुपये कमाए और बाद में उसके ओटीटी राइट्स 100 करोड़ रुपये में बिके, तो वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस में ओटीटी के 100 करोड़ रुपये नहीं जोड़े जाएंगे. बॉक्स ऑफिस का आंकड़ा केवल थिएट्रिकल कमाई से होता है.
ग्रॉस और नेट कलेक्शन में क्या होता है फर्क?
'वर्ल्डवाइड कलेक्शन' को समझने के लिए ग्रॉस और नेट कलेक्शन को भी समझाना जरूरी है. दर्शक जब सिनेमाघर में टिकट खरीदता है, तो टिकट की कीमत में टैक्स भी लगता है. टिकटों से हुई कुल कमाई को ग्रॉस कलेक्शन कहा जाता है. टैक्स और चीजों को हटाने के बाद नेट कलेक्शन बनाता है. इंडिया में ट्रेड रिपोर्टिंग के दौरान घरेलू बॉक्स ऑफिस पर नेट कलेक्शन की काफी बात होती है. वहीं वर्ल्डवाइड आंकड़े आम तौर पर ग्रॉस कलेक्शन के मुताबिक बताए जाते हैं. इसकी वजह यह है कि अलग-अलग देशों में टैक्स सिस्टम और टिकट बिक्री के रूल्स अलग होते हैं. इसलिए पूरी दुनिया की कमाई को एक साथ जोड़कर दिखाने के लिए ग्रॉस आंकड़ा ज्यादा सही होता है.
कौन-कौन से देश वर्ल्डवाइड कलेक्शन में किए जाते हैं शामिल?
अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि ओवरसीज कलेक्शन में आखिर कौन-कौन से देशों को शामिल किया जाता है. बता दें कि इसका कोई एक छोटा या तय ग्रुप नहीं है. फिल्म जहां-जहां सिनेमाघरों में रिलीज होती है और वहां टिकट बिक्री होती है, उन मार्केट्स से आया थिएट्रिकल रेवेन्यू उसके ग्लोबल बॉक्स ऑफिस आंकड़े में शामिल किया जाता है. इंडियन फिल्मों के लिए अमेरिका और कनाडा बड़े ओवरसीज मार्केट हैं. यहां इंडियन रूट्स के लोगों की बड़ी आबादी होने के कारण हिंदी, तमिल, तेलुगु और दूसरी इंडियन फिल्मों को अच्छा को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है. इसी तरह यूनाइटेड किंगडम भी इंडियन फिल्मों के लिए अहम मार्केट है.
गल्फ देशों से भी आती है बड़ी कमाई
इंडियन फिल्मों के ओवरसीज बिजनेस में गल्फ मार्केट को भी जोड़ा जाता है. संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन जैसे देशों में इंडियन फिल्मों की बड़ी ऑडियंस है. खास तौर पर यूएई में बॉलीवुड और इंडियन फिल्मों के लिए काफी दिलचस्पी देखी जाती है. दुबई और अबू धाबी जैसे बड़ी सिटी में बॉलीवुड और साउथ इंडियन फिल्मों के लिए अच्छी टिकट बिक्री होती है. इन देशों से हुई थिएट्रिकल कमाई भी फिल्म के ओवरसीज कलेक्शन में जुड़ती है.
यूरोप के कई देशों को किया जाता है शामिल
यूनाइटेड किंगडम के अलावा जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स और स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में भी इंडियन फिल्मों की रिलीज होती है. किसी फिल्म को जिस देश में सिनेमाघरों में रिलीज किया जाता है, वहां टिकट बिक्री से मिलने वाली रकम उसके ओवरसीज बिजनेस का हिस्सा बनती है. फिल्म की भाषा, स्टार कास्ट और वहां मौजूद ऑडियंस के आधार पर अलग-अलग देशों में कमाई का लेवल अलग हो सकता है. इसलिए हर फिल्म का ओवरसीज ब्रेकअप एक जैसा नहीं होता.
चीन, जापान और एशिया के देशों होती है कमाई
एशिया में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट भी फिल्मों के अहम हैं. किसी इंडियन फिल्म को चीन में रिलीज की अनुमति मिलती है और वहां सिनेमाघरों से कमाई होती है, तो वह रकम उसके इंटरनेशनल बॉक्स ऑफिस में शामिल होती है. आमिर खान की 'दंगल' और 'सीक्रेट सुपरस्टार' जैसी फिल्मों को चीन में काफी शानदार रिस्पॉन्स मिला था. इसी तरह जापान में भी कुछ इंडियन फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. हालांकि हर इंडियन फिल्म को इन सभी देशों में रिलीज नहीं किया जाता. इसलिए किसी फिल्म के वर्ल्डवाइड कलेक्शन में वही उन्हीं देशों को शामिल किया जाता है, जहां फिल्म रिलीज हुई हो.
दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया भी अहम
मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भी इंडियन फिल्मों की रिलीज होती है. खासकर तमिल और तेलुगु फिल्मों के लिए मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में पसंद की जाती हैं. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी इंडियन फिल्मों की मजबूत मार्केट है. सिडनी, मेलबर्न और ऑकलैंड जैसे सिटी में इंडियन फिल्मों को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है. इन देशों से हुई टिकट बिक्री भी ओवरसीज कलेक्शन का हिस्सा बनती है.
क्या दुनिया के हर देश की कमाई जुड़ती है?
इस सवाल का जवाब थोड़ा ध्यान से समझना होगा. वर्ल्डवाइड कलेक्शन का मतलब यह नहीं है कि दुनिया के हर देश से कोई न कोई कमाई जरूर शामिल होगी. फिल्म जिस देश में रिलीज ही नहीं हुई, वहां से बॉक्स ऑफिस कलेक्शन आने का सवाल नहीं है. इसी तरह अगर किसी देश में फिल्म रिलीज हुई लेकिन वहां बहुत कम शोज हुए या टिकट बहुत ही कम बिके तो उस मार्केट का योगदान भी कम होगा. इसलिए 'वर्ल्डवाइड' का मतलब पूरी दुनिया में हुई थिएट्रिकल कमाई से होता है, न कि दुनिया के हर देश की कमाई को जोड़ा जाता है.
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Kal Ka Mausam: बंगाल की खाड़ी से टकराएगा चक्रवात अर्नब, यूपी दिल्ली से लेकर बिहार तक IMD का अलर्ट
कल का मौसम, 25 सितंबर: बंगाल की खाड़ी में उठा मौसमी बवंडर अब एक भयानक रूप ले चुका है और इसका असर पूरे देश में साफ दिखाई देने लगा है. भारतीय मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार यह गहरा दबाव अब चक्रवात अर्नब बनकर आगे बढ़ रहा है. समुद्र के ऊपर तेजी से मजबूत होता यह तंत्र अपने साथ तेज हवाएं और मूसलाधार बारिश लेकर आ रहा है. इस चक्रवाती तूफान के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की आशंका है. तटीय राज्यों से लेकर मैदानी और पहाड़ी इलाकों तक हर जगह मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ चुका है. मौसम विभाग ने कई राज्यों में अचानक बाढ़ आने, पेड़ टूटने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की चेतावनी जारी की है.
तटीय इलाकों में चक्रवात अर्नब का सबसे बड़ा खतरा
चक्रवात अर्नब का सबसे भयानक और सीधा असर ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और झारखंड पर पड़ने जा रहा है. आंध्र प्रदेश के गुंटूर, काकीनाडा, विशाखापत्तनम, विजयनगरम, एलुरु और पूर्वी गोदावरी जैसे जिलों में 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चलने की आशंका है. वहीं ओडिशा के पुरी, बालासोर, मयूरभंज, भुवनेश्वर, जाजपुर और भद्रक में 65 किलोमीटर की गति से आंधी के साथ भारी बरसात का अलर्ट है. पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, दुर्गापुर और दार्जिलिंग में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी. समुद्र में उठी ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों को तटों से दूर रहने के कड़े निर्देश दिए गए हैं. निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने को कहा गया है.
उत्तर भारत और राष्ट्रीय राजधानी में मौसम का मिजाज
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी इस मौसमी उठापटक का असर साफ देखा जाएगा. दिल्ली में 25 सितंबर को हल्की से मध्यम बारिश के साथ 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है. शहर में दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री रहेगा, लेकिन भारी उमस लोगों को परेशान कर सकती है. पंजाब के अमृतसर, लुधियाना, बठिंडा और चंडीगढ़ जैसे शहरों में 60 किलोमीटर की रफ्तार से झोंकेदार हवाओं के साथ जोरदार बारिश हो सकती है. राजस्थान के जयपुर, कोटा, बाड़मेर, जैसलमेर और भरतपुर में भी 50 किलोमीटर की रफ्तार वाली हवाओं के साथ मध्यम से भारी बरसात की संभावना बनी हुई है.
यूपी और बिहार में झमाझम बारिश और आंधी की तैयारी
उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में चक्रवात के असर से मौसम अचानक बदल रहा है. लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या, मेरठ, आगरा और गाजियाबाद समेत करीब तीन दर्जन जिलों में 45 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से आंधी चलने और मूसलाधार बारिश का अलर्ट है. लखनऊ में तापमान गिरकर 23 डिग्री तक आ सकता है. दूसरी तरफ बिहार के पटना, गया, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा और मुजफ्फरपुर के आसपास 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार वाली हवाएं चलेंगी और जमकर पानी बरसेगा. दोनों राज्यों के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में जलजमाव की विकट स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे किसानों और आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है.
मध्य भारत में तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब का तगड़ा दबाव देखने को मिलेगा. छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और धमतरी जैसे इलाकों में 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार आंधी और बादलों की गर्जना के साथ जोरदार पानी बरसने का अंदेशा है. मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, कटनी, होशंगाबाद और रतलाम में 55 से 60 किलोमीटर की गति से आंधी चलने का पूर्वानुमान है. महाराष्ट्र में भी चक्रवाती बादलों का जमावड़ा बना हुआ है. मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक और ठाणे में 50 से 60 किलोमीटर की रफ्तार वाली हवाओं के साथ तेज बारिश की संभावना है. मुंबई में तापमान 32 डिग्री के करीब रहेगा, लेकिन समुद्री हवाओं के कारण मौसम बेचैन करने वाला रहेगा.
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और आंधी का बढ़ा संकट
पहाड़ी राज्यों में इस बिगड़े मौसम के कारण हालात और भी नाजुक हो सकते हैं. उत्तराखंड के नैनीताल, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, ऋषिकेश और चमोली में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना है. भारी बारिश के कारण पर्वतीय सड़कों पर चट्टानें गिरने और भूस्खलन का बड़ा खतरा बना हुआ है. हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, मंडी, मनाली और किन्नौर में 40 से 50 किलोमीटर की तूफानी हवाएं चलेंगी, जहां मनाली का न्यूनतम तापमान 2 डिग्री तक लुढ़क सकता है. जम्मू-कश्मीर के पुंछ, रियासी, शोपियां और रामबन में भी आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है. प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.
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