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Indira Gandhi का उदाहरण देकर Rahul Gandhi ने पूछा, BJP और Modi-Shah सत्ता विरोधी लहर से कैसे बचते हैं?

गुरुवार को चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि पार्टी बार-बार उस 'एंटी-इनकंबेंसी' (सत्ता-विरोधी लहर) फैक्टर से क्यों बचती दिखती है, जो दूसरे राजनीतिक मुकाबलों में देखने को मिलता है। बीजेपी के चुनावी रिकॉर्ड पर बात करते हुए गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इंकम्बेंसी) का असर राजनीतिक पार्टियों पर दिखता है, लेकिन मोदी, शाह और बीजेपी पर ऐसा होता नहीं लगता।

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राहुल ने कहा कि मैं हाल ही में चर्चा में रही कुछ बातों पर अपनी राय रखना चाहता हूँ... मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूँ और मैंने 50 से ज़्यादा साल ऐसे ही परिवार में बिताए हैं... भारत में 'एंटी-इनकंबेंसी' (सत्ता-विरोधी लहर) नाम की एक बुनियादी ताकत होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है। यह किसी को नहीं छोड़ती। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था, वे अपनी लोकप्रियता के शिखर पर थीं, और फिर अचानक, एक-दो साल के भीतर ही, ज़बरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और भारी दबाव का सामना करना पड़ा। यही बात एक के बाद एक कई नेताओं के साथ होती है। यह कांग्रेस नेताओं के साथ होता है, क्षेत्रीय पार्टियों के साथ होता है, लेकिन न जाने क्यों, यह कभी भी नरेंद्र मोदी, शाह या बीजेपी के साथ नहीं होता।

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राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वोट चोरी के बाद कानून चोरी और उससे संस्थाओं की चोरी होती है; आज वोट चला गया है, तो कानून बनाने वाली व्यवस्था भी चली गई है। 'वोट चोरी' करके जीतने वाले सांसदों का बनाया कोई भी कानून गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस वोट का संस्थागत संरक्षक है। वोट की रक्षा करना उनकी ज़िम्मेदारी है। और फिर सब कुछ वहीं से शुरू होता है। अगर वोट ही खत्म हो जाए, तो संविधान काम नहीं करता, कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं और संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। यही वो लोग हैं जिन्होंने ऐसा किया है।

राहुल ने साफ तौर पर कहा कि मैं हवा-हवाई बातें नहीं कर रहा हूँ। मैंने इसे सबूत के साथ दिखाया है। मैं आपको बता दूँ कि इस बात को 100 प्रतिशत पक्का करने के लिए पहले से ही काफी जानकारी मौजूद है - 99 प्रतिशत नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत पक्का - कि भारतीय चुनाव, लोकसभा चुनाव, 2024 के चुनाव और विधानसभा चुनाव, सभी को खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस द्वारा महाराष्ट्र, हरियाणा में 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाना शुरू करने के बाद दो ईसी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार का विरोध करना शुरू कर दिया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि हरियाणा में 50 सालों से कभी एक पार्टी की सरकार बनती है तो कभी दूसरी की। अचानक एंटी-इनकंबेंसी (मौजूदा सरकार के खिलाफ़ नाराजगी) गायब हो जाती है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होता है; अचानक यह गायब हो जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही हाल है। कभी समाजवादी पार्टी, तो कभी BSP; और एंटी-इनकंबेंसी गायब हो जाती है। मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही होता है। गुजरात में भी। यह हमारे लिए एक बुनियादी सवाल रहा है। हम किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को तो समझ सकते हैं, लेकिन यह नहीं समझ पाते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है। सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में भी नहीं होती। दुनिया में ऐसी कोई डेमोक्रेसी नहीं है जहाँ एंटी-इनकंबेंसी न हो... वोट से ही, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, हमारे संविधान को ताकत मिलती है। संविधान से हमारे कानून बनते हैं, और कानूनों से हमारी संस्थाएँ बनती हैं। यह एक चेन है... अगर वोट ही खत्म हो गया, तो हमारा संविधान भी खत्म हो गया... अगर संविधान खत्म हो गया, तो हमारे कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं। अगर कानून गैर-कानूनी हैं, तो हमारी संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। यहाँ मुख्य सवाल यह है कि यह सिर्फ़ वोट पर हमला नहीं है; यह हर भारतीय नागरिक की सोच, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति पर हमला है। हम बार-बार यही कह रहे हैं कि वोट को लेकर कोई समस्या है।
 

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Kolkata Municipal Corporation और 6 नगर पालिकाओं के चुनाव दिवाली बाद नवंबर में संभव

कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और छह अन्य नगर पालिकाओं के चुनाव दिवाली के बाद, नवंबर में होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, सात नगर निगमों के चुनाव नवंबर के आखिरी हफ़्ते में, 27 और 28 नवंबर, 2026 के बीच होने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि चुनाव की तारीखों का ऐलान अक्टूबर में और नतीजों की घोषणा दिसंबर के पहले हफ़्ते में होने की संभावना है। ये चुनाव कोलकाता, हावड़ा, बाली, धूपगुड़ी, हल्दिया, कर्सियांग और कलिम्पोंग नगर पालिकाओं के लिए होने की संभावना है। कल ज़िला प्रशासन के साथ एक वर्चुअल मीटिंग तय है। सूत्रों से पता चला है कि अगले हफ़्ते के आखिर तक सातों नगर पालिकाओं में EVM पहुँच जाएँगी।

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों का ज़िक्र होने के बाद, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में दोबारा वोटिंग की मांग की है। साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग पर कड़ा हमला करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की गिरफ़्तारी की भी मांग की है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि SIR प्रक्रिया बंगाल पर कब्ज़ा करने और TMC सरकार को सत्ता से हटाने के लिए शुरू की गई थी। ममता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने साज़िश रचकर और चुनाव आयोग की मदद से सत्ता हासिल की। ​​उन्होंने कहा कि SIR से पहले, BJP के IT सेल की अधिकारी सीमा खन्ना ने AI की मदद से 58 लाख लोगों के नाम हटा दिए थे, और SIR प्रक्रिया के दौरान 34 लाख नाम हटा दिए गए।

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IE की रिपोर्ट से पता चला है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग (EC) में मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) से जुड़े मुद्दों पर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - ने बार-बार सवाल उठाए थे। SIR को पूरे देश में लागू करने का काम तीनों आयुक्तों की देखरेख में हुआ। लेकिन अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार (एक ही दिन में चार बार) उन फ़ैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे। विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है और आरोप लगाया है कि इससे उन वोटरों पर बुरा असर पड़ सकता है जो BJP और उसके सहयोगियों के समर्थक नहीं माने जाते।

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आंसुओं से मेडल तक का सफर...पिता को खोया, पेट पालने को कैब चलाई, अब एशियन गेम्स में रचा इतिहास

Salman Khan Struggle Story: पिता के निधन के बाद परिवार संभालने के लिए कभी दिल्ली-एनसीआर में उबर कैब चलाने वाले सलमान खान ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है. 2018 में भारतीय सेना में शामिल होकर रोइंग शुरू करने वाले सलमान ने सतनाम सिंह के साथ मिलकर पुरुष डबल स्कल्स में भारत को कांस्य पदक दिलाया. संघर्ष, समर्पण और पिता के सपने को पूरा करने की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों तो राह की हर रुकावट पार की जा सकती है. Thu, 24 Sep 2026 23:21:21 +0530

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