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दिल्ली में 1.75 करोड़ की ठगी का खुलासा, 67 साल का इनामी आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली के द्वारका जिले में AATS ने वरिष्ठ नागरिक से करीब 1.75 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे 67 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी की पहचान ब्रह्म स्वरूप भारद्वाज के रूप में हुई है. आरोपी पर पुलिस की ओर से 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था.

फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रॉपर्टी डील का झांसा

पुलिस के मुताबिक, आरोपी और उसके पुरुष व महिला सहयोगियों ने वर्ष 2024-25 के दौरान जमीन के कई प्लॉट की खरीद-फरोख्त के नाम पर एक वरिष्ठ नागरिक को कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाया. पीड़ित सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं और तिहाड़ जेल में फार्मासिस्ट के पद पर काम कर चुके हैं. पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी संपत्ति दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पीड़ित की करीब 1.75 करोड़ रुपये की पेंशन राशि को निशाना बनाया. इस मामले में थाना रनहोला में FIR नंबर 730/25 दर्ज की गई थी.

करीब एक साल से था फरार

पुलिस ने बताया कि आरोपी के फरार होने के बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे. 3 सितंबर 2026 को पांच वांछित आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था. द्वारका जिला पुलिस के मुताबिक, फरार और इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए AATS को विशेष जिम्मेदारी दी गई थी. इसी के तहत आरोपी की सात दिनों तक तकनीकी और मैनुअल निगरानी की गई.

सोनीपत से दबोचा गया आरोपी

पुलिस टीम ने तकनीकी इनपुट और फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए आरोपी की लोकेशन सोनीपत, हरियाणा में ट्रेस की. इसके बाद 13 सितंबर 2026 को आरोपी को सोनीपत से गिरफ्तार कर लिया गया. द्वारका पुलिस के मुताबिक, ब्रह्म स्वरूप भारद्वाज प्रॉपर्टी डीलर है और कथित तौर पर प्रॉपर्टी सौदों की आड़ में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ठगी करता था. आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है.

DCP द्वारका ने क्या कहा?

DCP द्वारका कुशल पाल सिंह, IPS के निर्देश पर फरार और इनामी अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत AATS द्वारका की टीम ने आरोपी को ट्रैक कर गिरफ्तार किया. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान आरोपी के अन्य सहयोगियों और ठगी से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है.

 

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Explainer:  मोबाइल स्क्रीन पर छिड़ी अखिलेश-योगी की जंग! AI वीडियो पर चुनाव आयोग का 3 घंटे वाला सख्त फरमान

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं लेकिन इससे पहले ही प्रदेश में सियासी लड़ाई अपने पूरे चरम पर पहुंच गई है. इसका जीता जागता उदाहरण है राजनीतिक पार्टियों का बीते कुछ समय में एक-दूसरे के खिलाफ प्रचार के लिए जारी AI वीडियोज. चुनाव से पहले राज्य में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों एक-दूसरे के खिलाफ AI-जनित वीडियो जारी कर रही हैं. बता दें इन वीडियोज से अब चुनाव आयोग की चिंता भी बढ़ गई है. इन वीडियो पर आपत्ति जताते हुए रानीतिक दल अपनी-अपनी शिकायतें भी दर्ज करवा रहे हैं. 

UP Election 2027 से पहले यह AI वीडियो वॉर शुरू कैसे हुई?

इस विवाद की शुरुआत एक ऐसे वीडियो से हुई जिसमें अखिलेश यादव को नकारात्मक अंदाज में पेश किया गया था. भाजपा समर्थक बताए जा रहे कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स से शेयर हुए इस वीडियो में अखिलेश यादव को विवादित नाम से संबोधित करते हुए निशाना बनाया गया. इसके जवाब में अखिलेश यादव ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बनावटी AI वीडियो चलाकर भाजपा पर पलटवार किया.

UP Election 2027 में सपा-बीजेपी ने एक-दूसरे पर क्या आरोप लगाए हैं?

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा AI तकनीक के जरिए उनकी और उनकी पत्नी डिंपल यादव की छवि खराब करने के लिए फर्जी वीडियो और नकली सोशल मीडिया अकाउंट तैयार करवा रही है. वहीं, भाजपा प्रवक्ता की तरफ से पलटवार करते हुए कहा गया कि बार-बार झूठ फैलाने की कोशिश सफल नहीं होगी और सपा भी AI का इस्तेमाल कर भाजपा नेताओं की छवि बिगाड़ने की कोशिश में जुटी है.

AI वीडियो से दुष्प्रचार क्या सिर्फ यूपी तक सीमित है?

इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक दलों की तरफ से डीपफेक वीडियो और भ्रामक कंटेंट के इस्तेमाल को लेकर साइबर विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी. अब आगामी पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह चलन यूपी में और तेज होता दिख रहा है जहां सपा और बीजेपी दोनों प्रमुख दल इस हथियार का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

AI-जनित कंटेंट को लेकर चुनाव आयोग के मौजूदा नियम क्या हैं?

चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्रचार में इस्तेमाल होने वाली किसी भी सिंथेटिक या AI-जनित सामग्री को स्पष्ट रूप से लेबल करें. आयोग का मानना है कि डीपफेक जैसी तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल मतदाताओं को भ्रमित कर उनके फैसलों को प्रभावित कर सकता है.

फर्जी वीडियो सामने आने पर आयोग ने क्या सख्ती दिखाई है?

जानकारी के मुताबिक हाल ही में निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को साफ हिदायत दी है कि प्रचार के दौरान सोशल मीडिया पर कोई भी फर्जी या डीपफेक वीडियो सामने आने पर उसे जानकारी मिलते ही अधिकतम 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा. आयोग ने इसे लेकर सभी दलों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की सख्त हिदायत भी दी है.

अगर कोई पार्टी या नेता इस नियम का उल्लंघन करता है, तो क्या हो सकता है?

अगर तय समय सीमा में आपत्तिजनक या भ्रामक AI कंटेंट नहीं हटाया जाता तो संबंधित दल और उससे जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी कानून और मौजूदा साइबर कानूनों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है. आयोग ने साफ किया है कि लगातार निर्देशों की अनदेखी करने वाले दलों और उम्मीदवारों पर सख्ती और बढ़ाई जा सकती है.

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क्या फर्जी वीडियो बनाने वालों की पहचान और सजा को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार AI वीडियो में नेताओं के चेहरे, आवाज और यहां तक कि उनके संवाद तक बदल दिए जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद ऐसा करने वालों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. बता दें इस बारे में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया था कि उनके नेतृत्व में आयोग एक निष्पक्ष पर्यवेक्षक की बजाय पक्षकार जैसी भूमिका निभा रहा है. कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा में सीईसी को पद से हटाने के लिए औपचारिक नोटिस तक दिया जा चुका है जिसमें कथित दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

क्या इस विवाद का AI वीडियो के मामलों पर भी कोई असर पड़ सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब खुद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर ही सवाल उठ रहे हों तो AI वीडियो और डीपफेक जैसे मामलों में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है. विपक्षी दलों का कहना है कि अगर आयोग खुद ही भरोसे के संकट से जूझ रहा है तो प्रचार में हो रहे इस तकनीकी दुरुपयोग पर लगाम लगाना और मुश्किल हो सकता है.

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ये नियम आपको जानना जरूरी...

कानून के जानकारों के मुताबिक इस बारे में अलग-अलग परिस्थितियों में ये धाराएं लग सकती हैं

IT Act Section 66D (cheating by personation) में अधिकतम 3 साल की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माने की सजा है.  

IT Act Section 66C (identity theft) में अधिकतम 3 साल की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माने की सजा है.

IT Act Section 67 में अश्लील सामग्री के मामले में पहली बार 3 साल तक जेल और ₹5 लाख तक जुर्माना, दूसरे बार या दोहराने में ये जुर्माना और सजा बढ़ जाती है. 

IT Act Section 67A: (sexually explicit material) के मामले में पहली बार 5 साल तक जेल और ₹10 लाख तक जुर्माना. 

यहां स्पष्ट कर दें कि राजनीतिक AI/deepfake वीडियो के सामान्य मामले में अपराध की प्रकृति जैसे impersonation, fraud, obscene content, privacy violation या misinformation के आधार पर अलग-अलग कानून लागू होने और सजा का प्रावधान है.

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हार्दिक पंड्या ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ वनडे सीरीज से हो सकते हैं बाहर, न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 में भी खेलने पर संदेह

Hardik Pandya set to miss Aus A Series: ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या दाहिनी पिंडली में दर्द और चोट के कारण इंडिया'ए' और ऑस्ट्रेलिया 'ए' के बीच पुडुचेरी में होने वाली वनडे सीरीज से बाहर हो सकते हैं. डॉक्टर्स ने उन्हें अगले 10-15 दिनों तक आराम की सलाह दी है, जिससे 22 अक्टूबर से शुरू हो रहे न्यूजीलैंड दौरे की टी20 सीरीज में भी उनका खेलना संदिग्ध माना जा रहा है. बीसीसीआई उनके 2027 वनडे वर्ल्ड कप के महत्व को देखते हुए जल्दबाजी के मूड में नहीं है. उनकी जगह मुंबई के ऑलराउंडर सूर्यांश शेडगे को इंडिया 'ए' टीम में शामिल किया जा सकता है. Fri, 25 Sep 2026 23:40:26 +0530

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सूरत में कुत्ते का आतंक, वैन चालक पर हमला #shrots #viralnews #viralvideo #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-25T22:30:17+00:00

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