पंचांग मत देखिए सूखे पर Assembly का विशेष सत्र बुलाइए, Maharashtra सरकार से बोले Uddhav Thackeray
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि वह तुरंत तालुका-स्तर पर सूखे की घोषणा करे, राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए और किसानों के लिए राहत उपायों की जानकारी देने वाला एक डैशबोर्ड बनाए। उन्होंने कहा कि सरकार को अच्छे अनुमानों या आकलन का इंतज़ार करने के बजाय "सूखे की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए"। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात को लेकर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की और फसल के नुकसान के आकलन, मुआवज़े, कर्ज़ माफ़ी और पानी की आपूर्ति के उपायों की रफ़्तार पर सवाल उठाए। ठाकरे ने कहा पंचांग मत देखिए, सूखे को देखिए। सरकार को तालुका-स्तर पर इसकी घोषणा करनी चाहिए। दूसरे हफ़्ते में जल्द ही सत्र बुलाइए। इसकी बहुत ज़रूरत है।
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उन्होंने मांग की कि सरकार सूखे से निपटने के लिए एक खास डैशबोर्ड बनाए, जिसमें घोषित और बांटी गई मदद, फसल के नुकसान का आकलन, कर्ज माफी और पानी व चारे की उपलब्धता की जानकारी हो। उन्होंने कहा, "सूखे के लिए एक डैशबोर्ड होना चाहिए। इसमें यह जानकारी दी जानी चाहिए कि पिछले साल कितने किसानों का कर्ज माफ किया गया और इस साल किसानों के कर्ज माफी के लिए क्या योजनाएं हैं। अब तक कितने पंचनामे किए गए हैं? कितने किसानों को कितनी मदद मिली है? पिछले साल के किसान फंड से अब तक कितने किसानों पर कितना खर्च हुआ है - यह जानकारी डैशबोर्ड के जरिए दी जानी चाहिए। ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र बेमौसम बारिश और सूखे जैसे हालात का सामना कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि किसानों की फसल और बागों को नुकसान हुआ है और वे बढ़ते कर्ज का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र बेमौसम बारिश और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है।
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पिछले साल फसलें सड़ गई थीं और कई किसानों के बाग बर्बाद हो गए थे।" उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पिछले साल घोषित राहत पैकेज के लागू होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, "पिछले साल सरकार ने 21 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। हमें बताएं कि उसमें से असल में कितनी मदद किसानों तक पहुंची?" ठाकरे ने फसल के नुकसान के पंचनामे के समय को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि किसानों को तुरंत मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा था कि वे 5 अक्टूबर से पंचनामा शुरू करेंगे, तो इतना इंतजार क्यों? आज खबर है कि वे 2-3 दिनों में कैबिनेट में फैसला लेंगे, तो फिर इतना समय क्यों ले रहे हैं? क्या आपको किसानों के दर्द से कोई लेना-देना है या नहीं?
बेहद गंभीर! शशि थरूर ने ECINet सॉफ़्टवेयर को 'विनाशकारी' बताया, रोलबैक की कर दी मांग
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनाव आयोग के ECINet सॉफ़्टवेयर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के दौरान इसके कामकाज के बारे में आई एक रिपोर्ट को बेहद गंभीर बताया है। थरूर की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार की आलोचना के एक दिन बाद आई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को नए वोटर जोड़ने और नाम हटाने के बारे में अंधेरे में रखा। ताज़ा विवाद ECINet से जुड़ा है, जिसका इस्तेमाल वोटर्स ने SIR प्रोसेस के दौरान फ़ॉर्म और डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए किया था। बाद में चुनाव अधिकारियों ने जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स को प्रोसेस करने के लिए इस पोर्टल का इस्तेमाल किया।
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चुनाव आयोग ने इस साल जनवरी में ECINet ऐप लॉन्च किया था, जबकि इसके बीटा वर्शन का टेस्ट पिछले साल नवंबर में बिहार चुनावों के दौरान किया गया था। वेबसाइट और ऐप जनता को चुनाव नतीजों के बारे में रियल-टाइम अपडेट देते हैं और चुनाव अधिकारी भी इनका इस्तेमाल करते हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ECINet के सेंट्रलाइज़ेशन और प्रोसेस से राज्य-स्तर के अधिकारियों को हटाने को लेकर संधू और जोशी ने जो चिंताएं जताई थीं, वे गोवा में देखने को मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में यह मामला इसलिए भी अहम हो गया क्योंकि वोटर लिस्ट से नाम हटने पर राज्य की कई ऐसी स्कीमों के लिए पात्रता पर असर पड़ सकता है, जिनमें पात्रता तय करने के लिए वोटर लिस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
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रिपोर्ट में गोवा मेडिक्लेम स्कीम का ज़िक्र किया गया है। यह स्कीम सुपर-स्पेशियलिटी इलाज के लिए फ़ंडिंग देती है, जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होते; इनमें डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ओपन-हार्ट सर्जरी, ट्रांसप्लांट, कीमोथेरेपी और कॉक्लियर इम्प्लांट शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्कीम सिर्फ़ राज्य के वोटरों के लिए उपलब्ध है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि SIR के तहत गोवा में फ़ाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से चार दिन पहले, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सात दिनों में आठवीं बार दिल्ली में चुनाव आयोग को पत्र लिखा। इसके साथ 97 वोटरों की एक लिस्ट जुड़ी थी, जिनकी बात गोवा के ही इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) ने सुनी थी, उनकी जांच की थी और सुप्रीम कोर्ट की तय प्रक्रिया के तहत उन्हें योग्य पाया था। ईमेल में कहा गया कि उन्हें हटाने के पुराने फैसलों को पलटना होगा। लेकिन EROs सॉफ्टवेयर (ECINet) के ज़रिए उन फैसलों को पलट नहीं सके। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी वजह यह थी कि ऐसा करने की इजाज़त दिल्ली से कंट्रोल होती थी। रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने कहा कि यह मामला नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और ज़रूरी सुविधाओं तक उनकी पहुँच से जुड़ा है।
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