IIT Bombay Mid-Semester Exams: 26-27 सितंबर की परीक्षाएं टलीं, 10-11 अक्टूबर का नया शेड्यूल
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे ने अपनी मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं की तारीखें बदल दी हैं, जो पहले 26 और 27 सितंबर को होने वाली थीं। इंस्टीट्यूट की ओर से जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं अब 10 अक्टूबर (शनिवार) और 11 अक्टूबर (रविवार) को उसी टाइम-टेबल के साथ आयोजित की जाएंगी। सूचना में कहा गया है, आपको सूचित किया जाता है कि पहले 26 सितंबर (शनिवार) और 27 सितंबर (रविवार) को होने वाली मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं अब 10 अक्टूबर (शनिवार) और 11 अक्टूबर (रविवार) को उसी टाइम-टेबल के साथ आयोजित की जाएंगी। इससे पहले, गुरुवार को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे के मुख्य गेट के बाहर भारी सुरक्षा इंतज़ाम और पुलिस बैरिकेड्स लगाए गए थे। यह विरोध प्रदर्शन दूसरे साल के छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मौत के मामले में जवाबदेही और न्याय की मांग के लिए आयोजित किया गया था।
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वाकोडे की मौत के हालात की पूरी और स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग करते हुए, वर्षा गायकवाड़ ने बताया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्र के परिवार से बात की है और उन्हें पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया है। राहुल जी ने परिवार से बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि हम आपकी लड़ाई लड़ेंगे और साहिल को न्याय दिलाएंगे।' IIT बॉम्बे में यह कोई अकेली घटना नहीं है। ऐसी घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, और हमने पूरी जांच की मांग की थी। हम देख रहे हैं कि शिक्षा का व्यवस्थित रूप से RSS-करण किया जा रहा है, धार्मिक बंटवारे को बढ़ावा दिया जा रहा है और खुलेआम भेदभाव किया जा रहा है। जब हम यहां सवाल उठाने आते हैं, तो वे हमें चुप कराने और दबाने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल करते हैं। मेरा सवाल है: BJP ने शिक्षा व्यवस्था का क्या हाल कर दिया है? उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह दुखद घटना एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है और आरोप लगाया कि जाति और धर्म की राजनीति की जा रही है। अहम प्रशासनिक पदों और वाइस-चांसलर की राजनीतिक नियुक्तियों की आलोचना करते हुए गायकवाड़ ने कहा कि पूरी जांच ज़रूरी है और शिक्षा व्यवस्था पर वैचारिक कब्ज़े का यह सिलसिला खत्म होना चाहिए। वाइस-चांसलर से लेकर अहम प्रशासनिक पदों तक, राजनीतिक नियुक्तियां बड़े पैमाने पर हो रही हैं। गायकवाड़ ने इस घटना को महज़ एक आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया और इसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गहरी जड़ें जमा चुकी जातिवाद, सांप्रदायिकता और वैचारिक घुसपैठ के कारण हुई 'संस्थागत मौत' (institutional death) करार दिया।
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उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि RSS ने यूनिवर्सिटी और IIT में घुसपैठ कर ली है और वहां बड़े पैमाने पर जातिवाद और सांप्रदायिकता फैला रही है। हमारी नज़र में, साहिल वाकोडे की दुखद मौत जिसे आत्महत्या कहा जा रहा है। असल में आत्महत्या नहीं है; यह एक 'संस्थागत मौत' (institutional death) है। आज इसके लिए किसी न किसी को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। अगर आप यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट और फैकल्टी के अनुपात को देखें, तो आपको साफ़ तौर पर बड़े पैमाने पर भेदभाव और असमानता दिखाई देगी। हर कोई जानता है कि जातिगत भेदभाव क्या है और इसकी वजह से स्टूडेंट्स को क्या-क्या झेलना पड़ता है।" गायकवाड़ ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों की आलोचना की और IIT बॉम्बे के स्टूडेंट साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के बाद न्याय की मांग कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की सख़्त कार्रवाई और सुरक्षा बलों के कड़े रवैये पर सवाल उठाए।
पंचांग मत देखिए सूखे पर Assembly का विशेष सत्र बुलाइए, Maharashtra सरकार से बोले Uddhav Thackeray
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि वह तुरंत तालुका-स्तर पर सूखे की घोषणा करे, राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए और किसानों के लिए राहत उपायों की जानकारी देने वाला एक डैशबोर्ड बनाए। उन्होंने कहा कि सरकार को अच्छे अनुमानों या आकलन का इंतज़ार करने के बजाय "सूखे की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए"। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठाकरे ने राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात को लेकर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की और फसल के नुकसान के आकलन, मुआवज़े, कर्ज़ माफ़ी और पानी की आपूर्ति के उपायों की रफ़्तार पर सवाल उठाए। ठाकरे ने कहा पंचांग मत देखिए, सूखे को देखिए। सरकार को तालुका-स्तर पर इसकी घोषणा करनी चाहिए। दूसरे हफ़्ते में जल्द ही सत्र बुलाइए। इसकी बहुत ज़रूरत है।
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उन्होंने मांग की कि सरकार सूखे से निपटने के लिए एक खास डैशबोर्ड बनाए, जिसमें घोषित और बांटी गई मदद, फसल के नुकसान का आकलन, कर्ज माफी और पानी व चारे की उपलब्धता की जानकारी हो। उन्होंने कहा, "सूखे के लिए एक डैशबोर्ड होना चाहिए। इसमें यह जानकारी दी जानी चाहिए कि पिछले साल कितने किसानों का कर्ज माफ किया गया और इस साल किसानों के कर्ज माफी के लिए क्या योजनाएं हैं। अब तक कितने पंचनामे किए गए हैं? कितने किसानों को कितनी मदद मिली है? पिछले साल के किसान फंड से अब तक कितने किसानों पर कितना खर्च हुआ है - यह जानकारी डैशबोर्ड के जरिए दी जानी चाहिए। ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र बेमौसम बारिश और सूखे जैसे हालात का सामना कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि किसानों की फसल और बागों को नुकसान हुआ है और वे बढ़ते कर्ज का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, महाराष्ट्र बेमौसम बारिश और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है।
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पिछले साल फसलें सड़ गई थीं और कई किसानों के बाग बर्बाद हो गए थे।" उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पिछले साल घोषित राहत पैकेज के लागू होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, "पिछले साल सरकार ने 21 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। हमें बताएं कि उसमें से असल में कितनी मदद किसानों तक पहुंची?" ठाकरे ने फसल के नुकसान के पंचनामे के समय को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि किसानों को तुरंत मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा था कि वे 5 अक्टूबर से पंचनामा शुरू करेंगे, तो इतना इंतजार क्यों? आज खबर है कि वे 2-3 दिनों में कैबिनेट में फैसला लेंगे, तो फिर इतना समय क्यों ले रहे हैं? क्या आपको किसानों के दर्द से कोई लेना-देना है या नहीं?
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