नोएडा DM मेधा रूपम को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गौतम बुद्ध नगर की ज़िला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम से जुड़े मामले में अपने आदेश में बदलाव किया और साफ़ किया कि छात्रा आकृति चौधरी को उनकी हिरासत के मामले में मिली राहत पर कोई रोक नहीं है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें DM रूपम को अप्रैल में नोएडा में हुए मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत छात्रा को हिरासत में लेने के लिए अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था। बुधवार को बेंच ने कहा कि मामले के गुण-दोष के आधार पर विचार होने तक, हाई कोर्ट के फ़ैसले खासकर पैराग्राफ 27 से 33—के अमल पर रोक लगी रहेगी। अदालत ने आदेश दिया, पक्षों के सीनियर वकीलों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत का मानना है कि जब तक मामले पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक विवादित फ़ैसले खासकर पैराग्राफ 27 से 33—के अमल पर रोक लगी रहेगी।
इसे भी पढ़ें: Yamuna Expressway Bus Fire | कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस में लगी भीषण आग, महिला समेत 9 यात्रियों की जलकर मौत
मामला क्या है?
यह मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री में ग्रेजुएट 25 साल की चौधरी से जुड़ा है, जिन्हें अप्रैल में नोएडा में हुए वर्कर्स के प्रोटेस्ट के सिलसिले में NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपनी हिरासत को चुनौती दी थी। 2 सितंबर को हाई कोर्ट ने उनकी 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को मंज़ूरी दे दी और नज़रबंदी के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही, यह निर्देश भी दिया कि अगर किसी दूसरे मामले में उनकी ज़रूरत न हो, तो उन्हें रिहा कर दिया जाए। हाई कोर्ट ने चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह रकम रूपम (जिन्होंने नज़रबंदी का आदेश जारी किया था) और इस प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों की सैलरी से वसूली जाए। कोर्ट ने अधिकारियों के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी की और निर्देश दिया कि डॉसियर तैयार करने में शामिल ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी को उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। हाई कोर्ट ने हिरासत का आधार बनी राज्य की कहानी को मनगढ़ंत बताया और गलत रास्ते पर चल रही नौकरशाही के लगातार "तानाशाही" वाले व्यवहार के खिलाफ चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश एक ऑर्वेलियन डिस्टोपिया (एक ऐसी दमनकारी जगह जहाँ सरकार का पूरा नियंत्रण हो) में बदल सकता है।
इसे भी पढ़ें: Yamuna Expressway Bus Fire | FIR में बड़ा खुलासा, यात्रियों की चेतावनी के बावजूद स्लीपर बस दौड़ाता रहा ड्राइवर, एक गलती निगल गयी 9 लोगों की जिंदगी
इसमें यह भी कहा गया था कि नौकरशाहों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी "वफ़ादारी संविधान के प्रति है, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति" और सरकारी अधिकारी जनता की सेवा करते हैं, जो लोकतंत्र में मालिक होती है। यह मामला नोएडा के उन कर्मचारियों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है जो ज़्यादा वेतन की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ़्तार किए गए कई कार्यकर्ताओं में चौधरी और एक्टिविस्ट-पत्रकार सत्य वर्मा भी शामिल थे। इसके बाद, 13 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन दोनों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा दिया।
DIY Amla Hair Oil: झड़ते और कमजोर बालों के लिए बनाएं ये खास आंवला तेल, तरीका बेहद आसान
Homemade Amla Hair Oil: झड़ते और कमजोर बालों से परेशान हैं? घर पर आसानी से बनाएं आंवला हेयर ऑयल। जानें आंवला तेल बनाने की आसान रेसिपी, लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां, जिससे बालों की बेहतर देखभाल करना हो सकता है आसान।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi
Asianetnews









