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ब्रिटिश काल में भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया: CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और बुद्धि को नष्ट करना भी था. मंदिरों पर हमले इसी सोच का हिस्सा थे. ब्रिटिश काल में तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया. अब अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानने, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है. 

ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख 

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान-सत्र को संबोधित किया. सीएम योगी ने रामायण काल में दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राक्षसी और दानवी शक्तियां हों या विदेशी आक्रांता, भारत पर हमले का उद्देश्य वैभव लूटने के साथ उसकी ज्ञान धरोहर को नष्ट करना भी रहा. उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नष्ट करना भी था.

ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया

सीएम योगी ने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया. भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर भ्रमित किया गया. संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी और परंपरागत चिकित्सा पद्धति के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा को महत्व दिया गया. परिणाम यह हुआ कि हम धीरे-धीरे अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से कटते गए.

1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था. आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और करीब 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे. काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भी ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे. कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था. प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान अपने शोध और नवाचार पर चर्चा करते थे. भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़ रखा है.

डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा 

मुख्यमंत्री ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं और उनके संरक्षण तथा डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है. परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी ऐसी ज्ञान धरोहर मौजूद है. अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख मिले हैं.

ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा

सीएम योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में तीन पक्ष सामने होंगे. पहला सत्य का है, इसलिए जो भी कहें, प्रमाणित करके कहें. दूसरा विरोधियों का है, जो उसे असत्य ठहराने का प्रयास करेंगे और तीसरा दुष्प्रचार करने वालों का है, जो संशय पैदा करेंगे. तकनीक ऐसे संशय को दूर करने में बड़ी मदद कर सकती है. इसे समयानुकूल बनाकर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिल्प और तकनीक समेत हर क्षेत्र में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है. नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य के अर्थशास्त्र जैसी विरासत से परिचित कराना होगा. करीब तीन हजार वर्ष पहले नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि श्रवण परंपरा से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध करने के लिए एकत्र हुए थे.

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'2017 के पहले अभिभावक बेटियों की पढ़ाई और सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे', सपा पर CM योगी ने साधा निशाना

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर एक बार फिर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में ऐसी स्थिति थी कि कहावत चल पड़ी थी, ‘देख सपाई, बिटिया घबराई.’ अभिभावक बेटियों की पढ़ाई और सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे. तत्कालीन सरकार के गुंडों ने माहौल खराब कर रखा था. कई जिलों में बेटियों की पढ़ाई संकट में थी. सपा के शोहदे उन्हें परेशान करते थे, जबरन उठा ले जाते थे. 

5 लाख 42 हजार रुपए की लागत आई

सीएम योगी ने कहा कि पूरे प्रदेश में गुंडागर्दी, जमीन पर कब्जे और अराजकता का माहौल था, जबकि आज उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगा, भय, गुंडागर्दी और अवैध कब्जे से मुक्त है. 2017 के बाद समाज और सरकार ने एक दिशा में काम किया तो इसके परिणाम सामने आए हैं. सीएम योगी बुधवार को चरगांवा में कृषि विभाग के बीज गोदाम के समीप राजकीय महिला शरणालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे. 100 महिलाओं की क्षमता वाले सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त इस भवन के निर्माण पर 8 करोड़ 5 लाख 42 हजार रुपए की लागत आई है.

आधी आबादी को सम्मान और सुरक्षा

लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि घर छोड़ने को मजबूर किसी बेटी या घरेलू हिंसा की शिकार महिला को अब दर-दर की ठोकर नहीं खानी पड़ेगी. गोरखपुर में 100 बेड का राजकीय महिला शरणालय ऐसी महिलाओं का संबल बनेगा. आधी आबादी को सम्मान और सुरक्षा देने के साथ स्वावलंबन के पथ पर आगे बढ़ाकर विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है.

25 हजार रुपए की सहायता

उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी पढ़ाई, विवाह, सुरक्षा और स्वावलंबन तक सरकार उसके साथ खड़ी है. मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत जन्म से स्नातक तक बेटी के लिए 25 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक लाख रुपए की व्यवस्था की गई है. बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 1.60 करोड़ बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, किताब, जूते-मोजे और स्वेटर की सुविधा दी जा रही है. उन्होंने कहा कि 1.10 करोड़ परिवारों को सालाना 12 हजार रुपये पेंशन और प्रदेश में 65 लाख गरीबों को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए गए हैं.

रोजगार की नई संभावनाएं 

उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को चुनने से अच्छी सुविधाएं मिलती हैं. कोरोना काल में निराश्रित हुए बच्चों को सरकार चार हजार रुपए प्रतिमाह सहायता दे रही है. ऐसे बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए लैपटॉप भी उपलब्ध कराए गए हैं. सीएम योगी ने रोजगार को लेकर विपक्ष, खासकर सपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप गिनते जाइए, हम नौकरी बांटते जाएंगे. आप गिनते-गिनते थक जाएंगे, हम यूपी के नौजवानों को नौकरी देते-देते नहीं थकेंगे.’ मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन रोजगार के तहत अब तक साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है. अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं बन रही हैं. प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है. इनमें बड़ी संख्या में इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं. 24 हजार से अधिक स्टार्टअप के साथ उत्तर प्रदेश का युवा अब नौकरी लेने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बन रहा है.

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