समय रैना गर्लफ्रेंड मेधा शंकर संग कार में घूमते आए नजर, एक्ट्रेस की पैप्स को देखकर उड़ी चेहरे की हवाइयां
Samay Raina-Medha Shankr: समय रैना (Samay Raina) स्टैंड अप कॉमेडी में जाना-माना नाम हैं. इन दिनों वह इंडियाज गॉट लेटेंट 2 शो में नजर आ रहे हैं. यह शो लोगों को खूब पसंद आ रहा है. अक्सर वह इस शो की वजह से सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं. हालांकि, इस बार उनके चर्चा में आने की वजह उनकी कथित गर्लफ्रेंड मेधा शंकर (Medha Shankar) हैं. वह हाल में मेधा के साथ कार में घूमते हुए नजर आए. लेकिन जब मेधा की नजर पैप्स पर पड़ी तो उनकी चेहरे की हवाइयां उड़ गई. जिसके बाद वह अपने आपको कैमरों की नजरों से बचाने के लिए वहां से भाग जाती हैं. सोशल मीडिया पर अब ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
समय रैना गर्लफ्रेंड संग कार में घूमते आए नजर
मेधा शंकर और समय रैना को लेकर काफी लंबे समय दावा किया जाता रहा है कि दोनों एक दूसरो को डेट कर रहे हैं लेकिन दोनों ने अभी भी इसकी पुष्टि नहीं की है. मेधा शंकर समय के इंडियाज गॉट लेटेंट 2 के एक एपिसोट में पैनलिस्ट के तौर पर नजर आई थीं. उस दौरान भी लोगों ने दोनों के अफेयर को लेकर चर्चा की थी. हालांकि, शो में दोनों के बीच ऐसा कुछ देखने को मिला था. लेकिन अब जो सोशल मीडिया पर वीडियो पर सामने आया है. उसने एक बार फिर दोनों के अफेयर को हवा दे दी हैं. वीडियो के मुताबिक, वह समय रैना की कार में उनके साथ घूमती हुई नजर आईं. वहीं, जब उनकी नजर पैप्स के कैमरों पर गई तो उनके चेहरे की हवाइयां उड़ गईं.
एक्ट्रेस की पैप्स को देखकर उड़ी चेहरे की हवाइयां
सोशल मीडिया वायरल इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मेधा शंकर एक काली कलर की कार से उतरती हैं. इसके साथ ही वह समय से कुछ बातें करती हैं. सोशल मीडिया पर ये भी दावा किया जा रहा है कि वह समय से जाने से पहले कहती हैं कि वह उन्हें मिस करेंगी. वहीं, जब वह कार से निकलकर जाती हैं तभी उनकी नजरें पैपराजी पर पड़ती हैं. उन्हें यकीन होता कि पैप्स ने उन्हें समय की कार से निकलते हुए देख लिया है. वह पूरी तरह चौंक जाती हैं और बिना बोले सीधे भागती हुई अंदर की चलीं जाती हैं.
शादी को लेकर उड़ी अफवाह
आपको बता दें कि समय रैना और मेधा शंकर की कथित डेटिंग की खबरें काफी लंबे समय से चल रही हैं. हाल ही में रेडिट पर एक पोस्ट काफी वायरल हुई. जिसमें दावा किया गया कि दोनों दिसंबर में शादी करने वाले हैं. इस पोस्ट पर समय रैना ने रिएक्शन दिया था. उन्होंने अपने मजाकिया अंदाज में शादी की अफवाहों को खारिज किया था. उन्होंने अपनी पोस्ट में मेधा शंकर को टैग करते हुए लिखा, 'दिसंबर में तो मेरा इंडिया टूर है, सॉरी मेधा, हमें इसको पोस्टपोन करना पड़ेगा'. वहीं मेधा शंकर ने शादी की अफवाहों को बेबुनियाद बताया था.
मेधा शंकर का वर्कफ्रंट
मेधा शंकर के वर्कफ्रंट की बात करें तो उन्होंने साल 2019 में ब्रिटिश मिनीसीरीज़ बीचम हाउस से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने फिल्म शादीस्थान (2021) और वेब सीरीज दिल बेकरार में काम किया. मेधा को सबसे बड़ी पहचान विधु विनोद चोपड़ा की ब्लॉकबस्टर '12वीं फेल' (2023) से मिली, जिसमें उन्होंने विक्रांत मैसी के अपोजिट 'श्रद्धा जोशी' का किरदार निभाया था. उन्हें इसके लिए बेस्ट फीमेल डेब्यू का ज़ी सिने अवार्ड मिला था. अपनी इस बड़ी कामयाबी के बाद वे रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म 'गिन्नी वेड्स सनी 2' (2026) में लीड किरदार निभाती हुई नजर आईं. फिलहाल उनके अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में एक अनटाइटल्ड डिटेक्टिव कॉमेडी फिल्म भी शामिल है, जिसकी शूटिंग पूरी हो चुकी है और रिलीज डेट कभी अनाउंस हो सकती है.
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ब्रिटिश काल में भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया: CM योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि उसकी ज्ञान परंपरा और बुद्धि को नष्ट करना भी था. मंदिरों पर हमले इसी सोच का हिस्सा थे. ब्रिटिश काल में तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से काटने का प्रयास किया गया. अब अपनी ज्ञान परंपरा को पहचानने, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का समय है.
ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान-सत्र को संबोधित किया. सीएम योगी ने रामायण काल में दंडकारण्य में ऋषियों के आश्रमों पर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि राक्षसी और दानवी शक्तियां हों या विदेशी आक्रांता, भारत पर हमले का उद्देश्य वैभव लूटने के साथ उसकी ज्ञान धरोहर को नष्ट करना भी रहा. उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिर को तोड़ने का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं, बल्कि सनातन परंपरा को नष्ट करना भी था.
ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया
सीएम योगी ने कहा कि ब्रिटिश काल में तरीका बदल गया. भारतीयों को अपनी भाषा, चिकित्सा पद्धति और ज्ञान परंपरा को लेकर भ्रमित किया गया. संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी और परंपरागत चिकित्सा पद्धति के स्थान पर आधुनिक चिकित्सा को महत्व दिया गया. परिणाम यह हुआ कि हम धीरे-धीरे अपनी परंपरा, मूल्यों और जड़ों से कटते गए.
1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था. आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और करीब 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे. काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप भी ज्ञान के प्रमुख केंद्र रहे. कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था. प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान अपने शोध और नवाचार पर चर्चा करते थे. भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़ रखा है.
डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा
मुख्यमंत्री ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं और उनके संरक्षण तथा डिजिटाइजेशन का कार्य चल रहा है. परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी ऐसी ज्ञान धरोहर मौजूद है. अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियां, ताम्रपत्र और शिलालेख मिले हैं.
ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा
सीएम योगी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में तीन पक्ष सामने होंगे. पहला सत्य का है, इसलिए जो भी कहें, प्रमाणित करके कहें. दूसरा विरोधियों का है, जो उसे असत्य ठहराने का प्रयास करेंगे और तीसरा दुष्प्रचार करने वालों का है, जो संशय पैदा करेंगे. तकनीक ऐसे संशय को दूर करने में बड़ी मदद कर सकती है. इसे समयानुकूल बनाकर ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा, व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, खगोल, ज्योतिष, आयुर्वेद, शिल्प और तकनीक समेत हर क्षेत्र में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा रही है. नई पीढ़ी को पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य के अर्थशास्त्र जैसी विरासत से परिचित कराना होगा. करीब तीन हजार वर्ष पहले नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषि श्रवण परंपरा से प्राप्त ज्ञान को लिपिबद्ध करने के लिए एकत्र हुए थे.
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