CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग, Cockroach Janata Party ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
भारत के चुनाव आयोग के साथ चल रहे विवाद के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, इस राष्ट्रीय दबाव समूह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मुख्य मांग की। CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने चेतावनी दी है कि अगर कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो ग्रुप विरोध प्रदर्शन करेगा। इसके साथ ही, ग्रुप ने चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को रोकने और आने वाले सभी चुनावों पर रोक लगाने की भी मांग की है।
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अभिजीत दिपके ने कहा कि कल चुनाव आयोग के बारे में आई एक रिपोर्ट से साबित होता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े गद्दार हैं। वह देश के सबसे बड़े राष्ट्र-विरोधी हैं और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए... वह भारत के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं... जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट देगा और कौन नहीं। क्या यही लोकतंत्र है?... कुल मिलाकर, 13 करोड़ से ज़्यादा वोट हटा दिए गए हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ताधारी पार्टी (NDA) के बीच का अंतर सिर्फ़ 2% था। 13 करोड़ वोट हटाना, कुल वोटों का लगभग 13% से 14% हिस्सा हटाने के बराबर है। क्या ज्ञानेश कुमार जानबूझकर उस 2% के अंतर को बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं ताकि वे कभी सत्ता से न हटें? ऐसा क्यों किया जा रहा है? इतने सारे वोट हटाने की क्या ज़रूरत थी?
दिपके ने कहा कि बीजेपी 2024 के चुनाव में बहुमत हासिल नहीं कर पाई। जब वे बहुमत से पीछे रह गए तो हड़कंप मच गया... उन्हें तब एहसास हुआ कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें बहुत मजबूती से उभर रही हैं - चाहे वह महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे हों, एनसीपी, स्टालिन, पिनाराई विजयन, अरविंद केजरीवाल या ममता बनर्जी। इन मुख्यमंत्रियों को एक-एक करके निशाना बनाया गया और हराया गया। यह महज संयोग नहीं हो सकता; इसके पीछे एक साफ पैटर्न है... पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र से 50,000 वोट हटा दिए गए और वे लगभग 15,000 वोटों के अंतर से हार गईं। एमके स्टालिन के निर्वाचन क्षेत्र में 1,00,000 वोट हटा दिए गए और वे लगभग 45,000 वोटों से हार गए।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के निर्वाचन क्षेत्र से 40,000 वोट हटा दिए गए और वे 4,000-5,000 वोटों के अंतर से हार गए। पिनाराई विजयन जीत सकते थे, लेकिन केरल में वोट हटाए जाने के कारण वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। क्या यह कदम सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था? अब, विपक्ष या किसी खास पार्टी के प्रति हमारा कोई खास लगाव नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में, अगर आप पूरे विपक्ष को ही खत्म कर दें, तो क्या उसे लोकतंत्र कहा जा सकता है? क्या यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव है?
Imran Khan की पार्टी के मार्च से पहले Islamabad में दो महीने के लिए धारा 144 लागू
पाकिस्तान के अधिकारियों ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के राजधानी में प्रस्तावित मार्च से पहले इस्लामाबाद में दो महीने के लिए सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी है। इस्लामाबाद प्रशासन ने बुधवार को जारी आदेश में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 लागू कर दी गई है, जिसके तहत संघीय राजधानी में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, रैलियों और प्रदर्शनों पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध उच्च सुरक्षा वाले रेड जोन सहित पूरे इस्लामाबाद में लागू होगा।
इस्लामाबाद की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अनम फातिमा ने 18 सितंबर को जारी आदेश में कहा था कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 तत्काल प्रभाव से लागू की गई है और यह दो महीने तक प्रभावी रहेगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी 27 सितंबर को इस्लामाबाद में मार्च की तैयारी कर रही है। पार्टी की मुख्य मांग 2023 से विभिन्न मामलों में जेल में बंद अपने संस्थापक इमरान खान की रिहाई है।
पीटीआई नेताओं ने कहा है कि प्रदर्शन में संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन की मांग भी उठाई जाएगी। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने सोमवार को कहा था कि पार्टी 25 सितंबर को प्रदर्शन की विस्तृत योजना घोषित करेगी और देशभर से कार्यकर्ताओं को जुटाएगी। इस बीच, पंजाब सरकार ने भी पूरे प्रांत में धारा 144 लागू कर दी है और मार्च के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद के लिए रावलपिंडी, अटक, झेलम और मियांवाली में रेंजर्स की तैनाती मांगी है।
अधिकारियों ने 27 सितंबर को रावलपिंडी और अटक के कुछ इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है। साथ ही प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए सुरक्षा तैयारियां की जा रही हैं। इस्लामाबाद प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण सभा और सार्वजनिक व्यवस्था अधिनियम, 2024 के तहत भी सभाओं पर रोक लगाई गई है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने 14 सितंबर को कहा था कि कोई भी राजनीतिक दल या सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति राजधानी में सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकता और राजनीतिक प्रदर्शनों के लिए सरकारी कर्मचारियों या संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पार्टी नेताओं से मार्च पर पुनर्विचार करने की अपील की है। इस बीच, किसान इत्तेहाद नामक किसानों के समूह ने भी अपनी मांगों को लेकर इस्लामाबाद मार्च की घोषणा की है, जिसमें कृषि लागत में बढ़ोतरी से राहत की मांग शामिल है।
प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए अधिकारियों ने इस्लामाबाद और पड़ोसी रावलपिंडी में सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं।
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