अमेरिका साइबर संघर्ष में उलझा, राष्ट्रीय ढांचे पर रियल-टाइम हमलों को लेकर सांसदों की चेतावनी
वाशिंगटन, 20 जनवरी (आईएएनएस)। सीनियर अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि अमेरिका अपने दुश्मनों के साथ एक सक्रिय और लगातार बढ़ते साइबर संघर्ष में उलझा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और नेशनल सिस्टम पर हमले रियल टाइम में हो रहे हैं और उन्हें पता लगाना या रोकना मुश्किल होता जा रहा है।
सीनेट की सशस्त्र सेना समिति के प्रमुख रोजर विकर ने कहा कि साइबर खतरे अब सिर्फ सैद्धांतिक नहीं रहे। उन्होंने कहा, यह कोई थ्योरेटिकल खतरा नहीं है। यह एक जारी लड़ाई है जो अभी भी चल रही है।
विकर ने कहा कि अमेरिकी साइबर कमांड साइबर डोमेन में रक्षा की पहली और आखिरी लाइन बन चुका है, जो ज्यादातर लोगों की नजर से दूर रहकर उन्नत होते दुश्मनों का सामना कर रहा है। उन्होंने चेताया कि दुश्मन ताकतें ऐसी तकनीकों में भारी निवेश कर रही हैं, जो बचने और सुरक्षा प्रणालियों को चकमा देने के लिए डिजाइन की गई हैं।
सशस्त्र सेना समिति के प्रमुख ने कहा कि हम इस चुनौती को अपने देश में देख रहे हैं, जहां हमारा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बड़े हमलों के प्रति कमजोर बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह के खतरे दुनिया भर में दिख रहे हैं, खासकर जब अमेरिका इंडो-पैसिफिक में संभावित टकराव के लिए अपनी साइबर क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
अमेरिकी साइबर कमांड का नेतृत्व करने और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) के निदेशक के तौर पर काम करने के लिए नामित लेफ्टिनेंट जनरल जोशुआ रूड ने सीनेटरों से कहा कि साइबर ऑपरेशन अब आधुनिक युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से अलग नहीं किए जा सकते। उन्होंने बताया कि एनएसए और साइबर कमांड की खुफिया और परिचालन क्षमताओं के साथ दशकों के अनुभव ने उन्हें यह सिखाया है कि मौजूदा रणनीतिक माहौल में गति, लचीलापन और सभी क्षमताओं का एकीकरण बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा, दशकों से मुझे एनएसए और साइबर कमांड की इंटेलिजेंस और ऑपरेशनल क्षमताओं का लीडर, उपभोक्ता, प्रवर्तक, जनरेटर और इंटीग्रेटर बनने का मौका मिला है।
उन्होंने साइबर को एक ऐसा डोमेन बताया जिसमें स्पीड, इंटीग्रेशन और लगातार तैयारी की जरूरत होती है। जोशुआ रूड ने कहा, मौजूदा रणनीतिक माहौल में निश्चित रूप से गति, फुर्ती और हमारी सभी क्षमताओं के इंटीग्रेशन की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि साइबर इफेक्ट्स अब मिलिट्री ऑपरेशंस में शामिल हो चुके हैं।
सीनेट समिति के रैंकिंग सदस्य जैक रीड ने चेतावनी दी कि अमेरिका एक कमजोरी की खिड़की में प्रवेश कर रहा है, खासकर तब जब चीन और रूस जैसे प्रतिद्वंद्वी देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सूचना युद्ध के साथ साइबर टूल्स को जोड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या साइबर कमांड इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है, क्योंकि बीते कुछ महीनों से उसके पास सीनेट से पुष्टि प्राप्त नेतृत्व नहीं है और वह साइबर कमांड 2.0 के नाम से जाने जाने वाले संरचनात्मक परिवर्तनों से गुजर रहा है।
जोशुआ रूड ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना एक प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा, अमेरिकी लोकतंत्र की प्रक्रिया को कमजोर करने के किसी भी विदेशी प्रयास से सुरक्षा की जानी चाहिए।
इस बात पर भी बहस हुई कि क्या अमेरिका को अधिक स्पष्ट आक्रामक साइबर रुख अपनाना चाहिए। सीनेटर डैन सुलिवन ने तर्क दिया कि बचाव के लिए सिर्फ डिफेंस काफी नहीं है। उन्होंने पूछा, क्या हमला करना ही सबसे अच्छा बचाव नहीं है? उन्होंने कहा कि दुश्मनों को लगातार साइबर हमलों के लिए बहुत कम नतीजे भुगतने पड़ते हैं।
रूड ने कहा कि साइबर कमांड को डिफेंस और अटैक दोनों में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आक्रामक साइबर टूल्स को डिप्लॉय करने का फैसला सिविलियन लीडरशिप के पास होगा।
दूसरे सीनेटरों ने रूड पर अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ साइबर और इंटेलिजेंस टूल्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सेफगार्ड्स के बारे में सवाल किए। सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन ने पूछा कि क्या वह बिना किसी विदेशी कनेक्शन के अमेरिकियों के खिलाफ एनएसए की क्षमताओं का इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश को खारिज करेंगे।
--आईएएनएस
डीसीएच/एएस
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बिहार में अपराधियों की नहीं चलेगी चालाकी! नीतीश सरकार खोल रही 6 नई फॉरेंसिक लैब
Bihar News: बिहार सरकार राज्य में अपराध पर लगाम लगाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बिहार में फॉरेंसिक जांच की व्यवस्था को तेजी से मजबूत किया जा रहा है. इसी कड़ी में राज्य के छह नए जिलों में आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब खोलने की तैयारी शुरू हो गई है.
यहां स्थापित होंगे फॉरेंसिक साइंस लैब
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में जल्द ही फॉरेंसिक साइंस लैब की स्थापना की जाएगी. अभी बिहार में केवल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में ही ये लैब काम कर रही हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दरभंगा और रोहतास में भी मार्च 2026 तक फॉरेंसिक लैब शुरू हो सकती है. ऐसा होने पर पूरे राज्य में कुल 12 फॉरेंसिक लैब हो जाएंगी, जिससे केस की जांच रिपोर्ट जल्दी मिलेगी और कोर्ट में मामलों का निपटारा भी तेज होगा.
56 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच पूरी हो चुकी है
1 जुलाई 2024 से देश में नए आपराधिक कानून लागू हुए हैं. इन कानूनों के तहत जिन अपराधों में 7 साल या उससे ज्यादा की सजा है, उनमें फॉरेंसिक और डिजिटल सबूत देना जरूरी कर दिया गया है. इसी वजह से फॉरेंसिक जांच का महत्व और बढ़ गया है. पुलिस के मुताबिक साल 2025 में अब तक करीब 11 हजार मामलों से जुड़े 56 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच पूरी हो चुकी है.
साइबर अपराध से निपटने के लिए भी उठाया कदम
सरकार साइबर अपराध से निपटने के लिए भी कदम उठा रही है. पटना और राजगीर में मार्च तक विशेष साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू की जाएगी, जिससे ऑनलाइन ठगी और साइबर क्राइम के मामलों को सुलझाने में मदद मिलेगी.
गृह विभाग को भेजा बजट
फॉरेंसिक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार ने गृह विभाग को करीब 163 करोड़ रुपये का बजट भेजा है. पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में नई डीएनए जांच यूनिट भी बनाई जाएंगी. इसके अलावा राज्य में अभी 51 मोबाइल फॉरेंसिक वाहन काम कर रहे हैं और 50 नए वाहन खरीदने की भी योजना है. कुल मिलाकर, बिहार में अब अपराध की जांच और ज्यादा वैज्ञानिक और मजबूत होने जा रही है.
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