Box Office Collection: हनुमान अंश पर भारी पड़ी द पैराडाइज, नानी की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कर रही बंपर कमाई
Box Office Collection: आज सिनेमाघरों में तेलुगु स्टार नानी की फिल्म 'द पैराडाइज' (The Paradise) रिलीज हुई है. इस फिल्म ने अपनी रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है. जहां बॉक्स ऑफिस पर इससे पहले हनुमान अंश (Hanuman Ansh) एक एकछत्र राज रखी थी. अब नानी की पैराडाइज इस पर भारी पड़ गई है. खबर लिखे जाने तक, सैक्निल्क के लाइव आकंड़ों के मुताबिक, द पैराडाइज ने 10 करोड़ रुपये से ज्यादा कलेक्शन कर लिया है. वहीं, हनुमान अंश ने 48वें दिन सिर्फ 4 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. इसके साथ ही 'वाइब' और 'दायरा' की कमाई में भी छठे दिन गिरावट देखने को मिली. आइए यहां पर इन सभी फिल्मों के कलेक्शन के बारे में जानते हैं.
हनुमान अंश पर भारी पड़ी द पैराडाइज
नानी की द पैराडाइज ने अपनी रिलीज से पहले ही 50 करोड़ रुपये की कमाई कर ली थी. इसके साथ ही नानी के करियर की ये सबसे बड़ी फिल्म बन गई है. जिसने इतने बड़े रिकॉर्ड की कमाई की है. वहीं, इसने हनुमान अंश को टक्कर देते हुए. अब तक 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर लिया है. इस समय नानी और राघव जुयाल की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर धमाका मचा रही है, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि ये फिल्म पहले दिन काफी अच्छी ओपनिंग कर सकती है.
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— VED PRAKASH PANDEY (@Quantumved0) September 23, 2026
हनुमान अंश ने 48वें दिन किया 4 करोड़ का कलेक्शन
'हनुमान अंश' के लिए 48वां दिन भी कमाई के लिहाज से अहम रहा. लेकिन इसकी कमाई पैराडाइज के मुकाबले कम रही. फिल्म ने 7,358 शोज के साथ 48वें दिन 4 करोड़ रुपये की नेट कमाई की. वहीं, इससे एक दिन पहले फिल्म ने 4.90 करोड़ रुपये कमाए थे, यानी इसकी कमाई में गिरावट देखने के लिए मिल रही है. हालांकि, इसके बावजूद 48वें दिन 4 करोड़ रुपये का कलेक्शन फिल्म की लंबी बॉक्स ऑफिस पारी को दिखाता है.
इंडिया में फिल्म की कुल ग्रॉस कमाई अब 336 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि नेट कलेक्शन 284 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. ओवरसीज मार्केट से 48वें दिन फिल्म ने 1 करोड़ रुपये का कारोबार किया. इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 35.75 करोड़ रुपये हो गया है. भारत और ओवरसीज कलेक्शन को मिलाकर 'हनुमान अंश' का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 372.20 करोड़ रुपये हो गया है.
'वाइब' की कमाई में भी आई गिरावट
अब बात 'वाइब' की करें तो इसने रिलीज के छठे दिन 2,431 शोज के साथ 1 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया. इससे एक दिन पहले फिल्म ने 1.10 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. इस हिसाब से छठे दिन की कमाई में 9.1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. हालांकि यह गिरावट बहुत ज्यादा नहीं है और फिल्म ने रोजाना कमाई में 1 करोड़ रुपये का स्तर बनाए रखा है.
'वाइब' ने भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 12.48 करोड़ रुपये का किया है. जबकि इंडिया नेट कलेक्शन 10.45 करोड़ रुपये हुआ है. ओवरसीज में छठे दिन फिल्म ने 20 लाखरुपये कमाए और विदेशों की कुल ग्रॉस कमाई 1.95 करोड़ रुपये हो गई है. इसके साथ ही फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 14.43 करोड़ रुपये हो चुका है.
छठे दिन 'दायरा' की रफ्तार भी हुई धीमी
'दायरा' की बात करें तो छठे दिन फिल्म ने 1,401 शोज के साथ सिर्फ 45 लाख रुपये का नेट कलेक्शन किया. वहीं, इससे एक दिन पहले 50 लाख रुपये कमाई थे. इसलिए छठे दिन इसके कलेक्शन में 10 प्रतिशत की गिरावट आई. इंडिया में दायरा का कुल ग्रॉस कलेक्शन 7.13 करोड़ रुपये हुआ है और नेट कलेक्शन 5.95 करोड़ रुपये हो गया है. ओवरसीज में छठे दिन फिल्म ने सिर्फ 15 लाख रुपये कमाए. इसके साथ ओवरसीज मार्केट से फिल्म ने ग्रॉस कलेक्शन 2.10 करोड़ रुपये का किया है. इसी के साथ 'दायरा' का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 9.23 करोड़ रुपये हो गया है.
Pitru Paksha 2026: श्राद्ध में कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन क्यों कराया जाता है? जानें पंचबलि का महत्व
Pitru Paksha 2026: सनातन धर्म में एक ऐसी अवधि भी आती है, जब हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में हमारे आस-पास आते हैं. इस दौरान पूर्वज पितृ लोक से धरती पर आते हैं और अपने परिवारजनों से तर्पण की इच्छा रखते हैं. इस अवधि को पितृपक्ष कहा जाता है. हर साल पितृपक्ष भाद्रपद मास के पूर्णिमा तिथि से शुरू होते हैं और आश्विन मास की अमावस्या तिथि तक रहते हैं. इस वर्ष पितृपक्ष का प्रारंभ 26 सितंबर से हो रहा है. ये 15 से 16 दिनों की एक अवधिल होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि के अनुसार, उनका श्राद्ध करते हैं. इस दौरान पंचबलि का खास महत्व होता है. चलिए इस बारे में जानते हैं.
क्या हैं पंचबलि?
हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पंचबलि कर्म किया जाता है. इस विधान में श्राद्ध या भोजन बनाते समय पांच अलग-अलग जीवों तथा देवताओं के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसके बिना श्राद्ध कर्म पूरा नहीं माना जाता है और इसी के जरिए पितरों तक भोजन पहुंचता है. पंचबलि के पांच हिस्से होते हैं. इन्हें किस तरह निकाला जाता है, यहां जानिए.
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पंचबलि के पांच भाग किस-किस के लिए निकाले जाते हैं?
1.गौ बलि (गाय)- भोजन का पहला हिस्सा गाय के लिए निकाला जाता है. गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है.
2.कुक्कुर बलि (कुत्ता)- भोजन का दूसरा हिस्सा कुत्तों के लिए निकाला जाता है. ये हिस्सा यमराज और भैरव के सेवक यानी कुक्कुर का माना जाता है.
3.काक बलि (कौआ)- भोजन का तीसरा भाग कौवे के लिए निकाला जाता है. कौवे पितरों के दूत माने जाते हैं.
4.देवादि बलि (देवता)- भोजन का चौथा हिस्सा देवताओं और सभी दिशाओं की ऊर्जाओं को समर्पित किया जाता है.
5.पिपीलिकादी बलि (चींटी)- भोजन का पांचवां हिस्सा चीटियों और अन्य सूक्ष्म जीवों के लिए होता है.
पंचबलि का महत्व क्या है?
पंचबलि का महत्व अलग-अलग होता है. गाय, कौवे से लेकर कुत्ते को भोजन कराने का महत्व यहां समझें-
गाय को क्यों करवाया जाता है भोजन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. गाय को भोजन कराने से गुरु-शुक्र बलवान होते हैं और पितरों को सीधे-सीधे भोजन प्राप्त होता है. गाय के माध्यम से जो भोजन पूर्वजों तक जाता है, जो उससे उनका आशीर्वाद मिलता है. वंशजों के ऊपर भी पूर्वजों की कृपा रहती है. आप इन सोलह दिनों की अवधि में नियमित रूप से पहली रोटी गाय के लिए निकाल सकते हैं.
कौवे को भी पितृपक्ष में भोजन खिलाया जाता है?
कौवे को यम का संदेशवाहक और पूर्वजों का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि, कौए द्वारा ग्रहण किया गया भोजन सीधे उनके पूर्वजों तक पहुंच जाता है. कौए को तृप्त करने से शनि दोष और पितृ दोष भी शांत होते हैं. अगर आपके घर में पितृ दोष है तो आप नियमित रूप से कौवे के लिए भोजन निकालना चाहिए. ये पितृ दोष से बाहर निकलने में मदद करता है.
कुत्तों को भोजन करवाने का महत्व
कुत्तों को यमराज और भगवान भैरव की सवारी कहा जाता है. शास्त्रों में इसका संबंध केतु ग्रह से होता है. पितृ पक्ष के दौरान आप यदि कुत्ते को भोजन करवाते हैं तो केतु के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है. पितृ दोष करने के लिए भी कुत्ते को खाना खिलाया जाता है. श्राद्धा के दौरान भोजन में तीसरी रोटी रोज कुत्ते के नाम से निकाला जाता है. ऐसा करने से आपके ऊपर पूर्वजों की कृपा बनी रहेगी.
चींटियों के लिए भोजन क्यों निकाला जाता है?
सनातन धर्म और पितृ पक्ष के पंचबलि कर्म में चींटियों के लिए भोजन निकालने के पीछे गहरे आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं. चींटियां भी पितरों का प्रतीक माना जाता है. राहु-केतु के दोषों को कम करने के लिए चींटियों की सेवा करें. काले रंग की चींटियों को भोजन देने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि की साढ़ेसाती से कष्टों से राहत मिलती है. कर्ज से मुक्ति पाने के लिए भी नियमित रूप से चींटियों की शक्कर मिला आटा देना चाहिए.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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