Pitru Paksha 2026: श्राद्ध में कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन क्यों कराया जाता है? जानें पंचबलि का महत्व
Pitru Paksha 2026: सनातन धर्म में एक ऐसी अवधि भी आती है, जब हमारे पूर्वज किसी न किसी रूप में हमारे आस-पास आते हैं. इस दौरान पूर्वज पितृ लोक से धरती पर आते हैं और अपने परिवारजनों से तर्पण की इच्छा रखते हैं. इस अवधि को पितृपक्ष कहा जाता है. हर साल पितृपक्ष भाद्रपद मास के पूर्णिमा तिथि से शुरू होते हैं और आश्विन मास की अमावस्या तिथि तक रहते हैं. इस वर्ष पितृपक्ष का प्रारंभ 26 सितंबर से हो रहा है. ये 15 से 16 दिनों की एक अवधिल होती है, जिसमें लोग अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि के अनुसार, उनका श्राद्ध करते हैं. इस दौरान पंचबलि का खास महत्व होता है. चलिए इस बारे में जानते हैं.
क्या हैं पंचबलि?
हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पंचबलि कर्म किया जाता है. इस विधान में श्राद्ध या भोजन बनाते समय पांच अलग-अलग जीवों तथा देवताओं के लिए भोजन का अंश निकाला जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसके बिना श्राद्ध कर्म पूरा नहीं माना जाता है और इसी के जरिए पितरों तक भोजन पहुंचता है. पंचबलि के पांच हिस्से होते हैं. इन्हें किस तरह निकाला जाता है, यहां जानिए.
ये भी पढ़ें- Ganesh Visarjan 2026: 24 या 25 सितंबर, कब होगा बप्पा का विसर्जन? यहां दूर करें डेट का कन्फ्यूजन
पंचबलि के पांच भाग किस-किस के लिए निकाले जाते हैं?
1.गौ बलि (गाय)- भोजन का पहला हिस्सा गाय के लिए निकाला जाता है. गाय में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है.
2.कुक्कुर बलि (कुत्ता)- भोजन का दूसरा हिस्सा कुत्तों के लिए निकाला जाता है. ये हिस्सा यमराज और भैरव के सेवक यानी कुक्कुर का माना जाता है.
3.काक बलि (कौआ)- भोजन का तीसरा भाग कौवे के लिए निकाला जाता है. कौवे पितरों के दूत माने जाते हैं.
4.देवादि बलि (देवता)- भोजन का चौथा हिस्सा देवताओं और सभी दिशाओं की ऊर्जाओं को समर्पित किया जाता है.
5.पिपीलिकादी बलि (चींटी)- भोजन का पांचवां हिस्सा चीटियों और अन्य सूक्ष्म जीवों के लिए होता है.
पंचबलि का महत्व क्या है?
पंचबलि का महत्व अलग-अलग होता है. गाय, कौवे से लेकर कुत्ते को भोजन कराने का महत्व यहां समझें-
गाय को क्यों करवाया जाता है भोजन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. गाय को भोजन कराने से गुरु-शुक्र बलवान होते हैं और पितरों को सीधे-सीधे भोजन प्राप्त होता है. गाय के माध्यम से जो भोजन पूर्वजों तक जाता है, जो उससे उनका आशीर्वाद मिलता है. वंशजों के ऊपर भी पूर्वजों की कृपा रहती है. आप इन सोलह दिनों की अवधि में नियमित रूप से पहली रोटी गाय के लिए निकाल सकते हैं.
कौवे को भी पितृपक्ष में भोजन खिलाया जाता है?
कौवे को यम का संदेशवाहक और पूर्वजों का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि, कौए द्वारा ग्रहण किया गया भोजन सीधे उनके पूर्वजों तक पहुंच जाता है. कौए को तृप्त करने से शनि दोष और पितृ दोष भी शांत होते हैं. अगर आपके घर में पितृ दोष है तो आप नियमित रूप से कौवे के लिए भोजन निकालना चाहिए. ये पितृ दोष से बाहर निकलने में मदद करता है.
कुत्तों को भोजन करवाने का महत्व
कुत्तों को यमराज और भगवान भैरव की सवारी कहा जाता है. शास्त्रों में इसका संबंध केतु ग्रह से होता है. पितृ पक्ष के दौरान आप यदि कुत्ते को भोजन करवाते हैं तो केतु के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है. पितृ दोष करने के लिए भी कुत्ते को खाना खिलाया जाता है. श्राद्धा के दौरान भोजन में तीसरी रोटी रोज कुत्ते के नाम से निकाला जाता है. ऐसा करने से आपके ऊपर पूर्वजों की कृपा बनी रहेगी.
चींटियों के लिए भोजन क्यों निकाला जाता है?
सनातन धर्म और पितृ पक्ष के पंचबलि कर्म में चींटियों के लिए भोजन निकालने के पीछे गहरे आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज किसी भी रूप में धरती पर आ सकते हैं. चींटियां भी पितरों का प्रतीक माना जाता है. राहु-केतु के दोषों को कम करने के लिए चींटियों की सेवा करें. काले रंग की चींटियों को भोजन देने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि की साढ़ेसाती से कष्टों से राहत मिलती है. कर्ज से मुक्ति पाने के लिए भी नियमित रूप से चींटियों की शक्कर मिला आटा देना चाहिए.
ये भी पढ़ें- Guru Pradosh Vrat 2026: आज गुरु प्रदोष व्रत पर करें भोलेनाथ को प्रसन्न, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और कथा
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
VIDEO: सागर शराब कांड का मुख्य आरोपी का शॉर्ट एनकाउंटर, पैर में लगी गोली
Sagar Liquor Scandal: सागर शराब कांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी मनीष लोढ़ी को पुलिस ने कथित मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस के मुताबिक, मनीष पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था. उसके साथ उसके सहयोगी आशीष साहू को भी गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस के अनुसार, मनीष लोढ़ी के नोनीयां जंगल में अपने साथी के साथ छिपे होने की सूचना मिली थी. इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को घेर लिया. पुलिस का दावा है कि टीम ने मनीष को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी. आरोपी ने कथित तौर पर दो राउंड गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की.
पैर में लगी गोली
पुलिस की जवाबी फायरिंग में मनीष लोढ़ी के पैर में गोली लगी. इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया. घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. उसके साथी आशीष साहू को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है.
पूरी खबर के लिए देखिए वीडियो...
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









