ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की मांग, अटॉर्नी जनरल को लिखा गया पत्र
West Bengal में सरकार का बड़ा एक्शन! 250 से अधिक मदरसों पर लटकेगा ताला, 2500 अन्य जांच के घेरे में आये
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुचारू बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में बुधवार को कम छात्र नामांकन (Enrollment) और खस्ताहाल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते लगभग 250 सरकारी मान्यता प्राप्त प्राइवेट मदरसों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन मदरसों को चालू शैक्षणिक सत्र यानी दिसंबर 2026 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी गई है, ताकि वर्तमान में अध्ययनरत कम संख्या वाले छात्रों की शिक्षा में अचानक कोई व्यवधान न आए। सत्र समाप्त होते ही इन्हें औपचारिक रूप से बंद कर दिया जाएगा।
यह ताज़ा फैसला राज्य सरकार की उस बड़ी कवायद के तहत लिया गया है, जिसमें पूरे पश्चिम बंगाल में चल रहे मदरसों के कामकाज, इंफ्रास्ट्रक्चर और मंज़ूरी की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के राज्य-व्यापी सर्वे के बाद सरकार पहले ही सैकड़ों संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर चुकी है।
250 मदरसे क्यों बंद होने जा रहे हैं?
अधिकारियों के मुताबिक, चरणबद्ध तरीके से बंद किए जाने वाले 250 मदरसों में से ज़्यादातर में या तो बहुत कम छात्र हैं या एनरोलमेंट न के बराबर है। इन संस्थानों में ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी पाई गई है। कैबिनेट ने फैसला किया है कि ये मदरसे दिसंबर तक काम करना जारी रख सकते हैं क्योंकि वहां अभी भी छात्र पढ़ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र खत्म होने के बाद इन्हें बंद करने की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि दुर्गा पूजा के त्योहारों से पहले संबंधित संस्थानों से रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। आगे की कार्रवाई से पहले ये रिपोर्ट प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होंगी।
252 मदरसों को पहले ही बंद करने का आदेश दिया जा चुका है
इस ताज़ा फैसले को इस महीने की शुरुआत में 252 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ की गई कार्रवाई से अलग देखा जाना चाहिए। राज्य सरकार ने ज़मीनी स्तर पर किए गए सर्वे में कई संस्थानों के पास ज़रूरी मंज़ूरी और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर न पाए जाने के बाद उन्हें बंद करने का आदेश दिया था। मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मंज़ूरी की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम की जांच के लिए जून की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के ज़िलों में यह सर्वे किया गया था। इसके बाद सरकार ने 252 संस्थानों को बंद करने का नोटिस और लगभग 100 अन्य संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा था कि ज़रूरी मंज़ूरी वाले मदरसों को काम जारी रखने की इजाज़त दी जाएगी। सरकार ने कारण बताओ नोटिस पाने वाले संस्थानों से जवाब भी मांगा है और अगर उनके स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाते हैं तो आगे कार्रवाई की जाएगी। लगभग 2,500 बिना रजिस्ट्रेशन वाले मदरसों की जांच हो रही है
सरकार की समीक्षा के बाद आगे और कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पश्चिम बंगाल में बिना सरकारी रजिस्ट्रेशन के चल रहे लगभग 2,500 मदरसों को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा सकता है।
इसलिए, कैबिनेट का हालिया फैसला, जिसमें 250 और संस्थानों को बंद करने की बात है, एक बड़ी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस प्रक्रिया में वे संस्थान शामिल हैं जहां छात्रों की संख्या कम है, बुनियादी ढांचे की कमी है, मंज़ूरी से जुड़ी समस्याएं हैं या अन्य अनियमितताएं हैं। सरकार ने 100 और मदरसों को 'कारण बताओ नोटिस' (show-cause notices) जारी करने की मंज़ूरी भी दी है।
कैबिनेट ने 1.51 लाख सरकारी भर्तियों को मंज़ूरी दी
मदरसों से जुड़े फैसलों के साथ-साथ, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने अलग-अलग सरकारी विभागों में लगभग 1.51 लाख कर्मचारियों की भर्ती के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। भर्ती योजना में पश्चिम बंगाल पुलिस में 12,000 और कोलकाता पुलिस में 4,000 पद शामिल हैं, जिससे पुलिस में कुल प्रस्तावित भर्तियां 16,000 हो जाएंगी। सरकार ने कहा है कि इसका मुख्य मकसद भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाना और खाली पदों को भरना है ताकि सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी पर कोई असर न पड़े।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभागों को उन समस्याओं की पहचान करने और उन्हें हल करने का निर्देश दिया गया है जिनकी वजह से भर्ती में देरी हो रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी विभागों को निर्देश दिया है कि वे भर्ती से जुड़ी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करें और यह सुनिश्चित करें कि बजट का इस्तेमाल तय योजनाओं के अनुसार हो।
पूर्ब मेदिनीपुर में नए सुधार गृह (correctional home) को मंज़ूरी
कैबिनेट ने पूर्ब मेदिनीपुर ज़िले के निमतौरी में एक नया सुधार गृह बनाने के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी। यह फैसला कैबिनेट बैठक में मंज़ूर किए गए अन्य प्रशासनिक उपायों में से एक था। सरकार ने आयुष (AYUSH) के लिए अलग विभाग का दर्जा और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पुस्तकालय अनुदान योजना के तहत आश्रम हॉस्टलों के लिए अनुदान को 1,800 रुपये से बढ़ाकर 3,300 रुपये करने को भी मंज़ूरी दी।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









