आने वाले वर्षों में चालू खाता घाटा और एफटीए से पैदा हुए अवसरों से रुपया होगा मजबूत: आरबीआई डिप्टी गवर्नर
नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रुपया 31 मार्च, 2025 से 16 सितंबर, 2026 तक संचयी रूप से 13.1 प्रतिशत (प्वाइंट-टू-प्वाइंट आधार पर) कमजोर हुआ है। ऐसे में भारतीय मुद्रा के मौजूदा स्तर से न केवल स्थिर होने, बल्कि मजबूत होने की भी पर्याप्त जगह है। यह बयान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने दिया।
उन्होंने कहा, “अगर कुछ कहा जाए तो ऐसा लगता है कि रुपए के मौजूदा स्तर से केवल स्थिर होने ही नहीं, बल्कि शायद मजबूत होने की भी पर्याप्त गुंजाइश है। जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी इसी तरह की उम्मीद जताई थी।”
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा (सीएडी) और कम होना चाहिए। इसकी वजह अर्थव्यवस्था की पारंपरिक मजबूती के साथ-साथ नई ताकतों का उभरना है, जिसमें वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता भी शामिल है।
गुप्ता ने मुंबई में एसबीआई के एक सम्मेलन में कहा, “आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसके पास कई दशकों के सीएडी या भुगतान संतुलन (बीओपी) के शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।”
भारत परंपरागत रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप भुगतान संतुलन (बीओपी) सकारात्मक रहा है।
जीडीपी के प्रतिशत के रूप में भारत का सीएडी समय के साथ कम हुआ है, जिससे भुगतान संतुलन को मजबूती मिली है।
गुप्ता ने विस्तार से बताया, “इसके अलावा, सीएडी का स्तर उन स्तरों से काफी नीचे रहा है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित माना जाता है। शुद्ध सेवा निर्यात और प्रेषण भारत की बड़ी संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं। दोनों मिलकर इतने बड़े और मजबूत हैं कि वस्तुओं के व्यापार घाटे को संतुलित कर सकें और सीएडी को जीडीपी के 1 प्रतिशत से नीचे बनाए रख सकें।”
हाल में तेल और सोने की कीमतों में आए झटकों ने अस्थायी रूप से सीएडी को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में पूंजी खाते का अधिशेष सीएडी से कम रहा है। इसके परिणामस्वरूप 2024-25 में करीब 5.0 अरब डॉलर और 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर का नकारात्मक बीओपी दर्ज हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल और देश में अपने तेल भंडार खोजने के प्रयासों के चलते भारत की आयातित तेल पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे जीडीपी के प्रतिशत के रूप में तेल की मांग में लंबे समय से जारी गिरावट की प्रवृत्ति को और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा, “यह उस स्थिति के अतिरिक्त होगा जब संघर्ष समाप्त होने के साथ ही तेल की कीमतें भी स्थिर हो जाएंगी। साथ ही हाल के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के सकारात्मक प्रभाव सामने आने और अनुकूल विनिमय दर के साथ यह मजबूती आगे भी जारी रहेगी।”
--आईएएनएस
एबीएस
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आग की लपटों के बीच 'बस रोको-बस रोको' चिल्लाते रहे यात्री, ड्राइवर ने नहीं सुनी..., जिससे गई लोगों की जान
यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसे याद कर बस में सवार यात्री सिहर उठते हैं. दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में अचानक आग लग गई जिसमें 9 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई है. हादसे से बाल-बाल बचे यात्रियों ने अपनी आपबीती सुनाई जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप जाएगी.
Yamuna Expressway Bus Accident कब और कहां हुआ?
जानकारी के मुताबिक यह हादसा रात करीब साढ़े 11 बजे यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट से करीब 32 किलोमीटर आगे जेवर थाना क्षेत्र में हुआ है. बताया जा रहा है कि राज कल्पना ट्रैवल्स की यह स्लीपर बस दिल्ली से महोबा की तरफ जा रही थी जिसमें करीब 30 से 35 यात्री सवार थे.
'धक्का देकर किसी तरह बाहर निकला', यात्री ने बताई आपबीती
पीछे की सीट पर सोए एक यात्री ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "मैं गहरी नींद में था, अचानक पता चला कि बस में आग लग गई है. जिस वक्त मैं जागा, चारों तरफ इतना धुआं भर चुका था कि कुछ साफ दिखाई ही नहीं दे रहा था. बस पूरी तरह यात्रियों से भरी थी और हर कोई एक साथ बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. मैं सबसे पीछे बैठा था और आग सामने की तरफ लगी थी इसलिए मुझे लोगों को धक्का देते हुए किसी तरह रास्ता बनाना पड़ा. घबराहट और भीड़ के बीच बस यही सोच रहा था कि जैसे भी हो, बाहर निकल जाऊं."
रिंकी ने बताया 'जूते तक नहीं पहन पाई, सिर्फ फोन लेकर भागी'
एक और यात्री रिंकी राजपूत ने बताया कि रात में अपने घर जाते हुए वह बस में सो रही थीं. उन्होंने कहा "अचानक किसी ने गेट पर जोर से आवाज़ की तभी मेरी नींद खुली. जब तक मैं उठकर कुछ समझ पाती, बस में भगदड़ मच चुकी थी. मैं अपना सामान तक नहीं उठा पाई. जूते पहनने का तो वक्त ही नहीं मिला, बस अपना फोन उठाया और किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश करने लगी।"
#WATCH | Greater Noida | A passenger says, "...I was asleep when someone banged on the door. When I woke up, there was already a huge crowd. I didn't pick up any of my belongings; I didn't even put on my shoes. I just grabbed my phone and stepped out. It was so crowded that… https://t.co/udoxnMaZrk pic.twitter.com/41N7aaXZZi
— ANI (@ANI) September 24, 2026
लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे
रिंकी ने आगे बताया, "अंदर लोग एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे. धुआं इतना घना था कि सांस लेना भी मुश्किल हो रही थी. ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मुझे ठीक से याद भी नहीं कि मैं बाहर कैसे निकली, बस इतना याद है कि किसी ने मुझे खींचकर बाहर निकाला।" रिंकी ने बताया कि आग सबसे पहले बस के अगले हिस्से में ड्राइवर की सीट के आसपास लगी थी और बहुत कम लोग ही समय रहते बाहर निकल पाए. रिंकी के मुताबिक पुलिस को मौके तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया.
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