ब्लोटिंग-गैस से तुरंत मिलेगा आराम! आचार्य बालकृष्ण का यह अचूक नुस्खा चुटकियों में दूर करेगा पेट की हर दिक्कत
Acharya Balkrishna Home Remedy For Bloating : खाना खाते ही पेट फूलने लगे, गैस से बेचैनी हो या थोड़ी-सी चीज खाने के बाद भी पेट भारी-भारी लगे, तो रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो जाती है. ऐसे में हर बार दवा लेने से पहले क्या रसोई में रखा एक छोटा-सा मसाला आपके काम आ सकता है? सौंफ का इस्तेमाल लंबे समय से पाचन से जुड़ी परेशानियों के लिए किया जाता रहा है. आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, सौंफ पेट की कुछ समस्याओं में उपयोगी मानी जाती है. जानिए इसे कब और कैसे लेना बेहतर माना जाता है.
Guru Pradosh Vrat 2026: आज गुरु प्रदोष व्रत पर करें भोलेनाथ को प्रसन्न, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और कथा
Guru Pradosh Vrat 2026: आज यानी २४ सितम्बर (24 सितंबर) को गुरु प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. यह व्रत देवों के देव महादेव को समर्पित होता है. इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. प्रदोष का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा ह. इसलिए, इसे गुरु प्रदोष के नाम से पुकारा जाएगा. गुरु प्रदोष व्रत के दिन महादेव की और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सफलता और सुख-समृद्धि आती है. प्रदोष व्रत में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का भय टलता है. आज जो भी साधक विधि-विधान से व्रत रखते हैं, उन्हें गुरु प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए. आइए जानते हैं प्रदोष काल का समय और कथा.
गुरु प्रदोष व्रत 2026 आज... (Guru Pradosh Vrat 2026)
आज प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. प्रदोष व्रत के लिए त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर 2026 को रात 10:50 पर शुरू हो चुकी है और यह तिथि 24 सितंबर की रात को 11 बजकर 18 तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, व्रत आज रखा जा रहा है. ऐसे में प्रदोष काल के समय को अधिक महत्व दिया जाता है. प्रदोष के दिन आपको महादेव की आराधना प्रदोष के समय करनी चाहिए.
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प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त (Guru Pradosh Vrat 2026)
ब्रह्म मुहूर्त- 04:35 से लेकर सुबह 05:23 मिनट तक
प्रातः सन्ध्या- प्रातकाल 04:59 से 06:10
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:49 से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:16 मिनट से लेकर 06 बजकर 39 मिनट तक
सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:16 से लेकर 07 बजकर 27 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात 11:49 से लेकर 12 बजकर 37 मिनट तक (25 सितंबर)
प्रदोष का समय- शाम 06 बजकर 16 मिनट से लेकर रात 08:39 तक
प्रदोष व्रत पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)
प्रदोष व्रत के दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करना है. इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें. प्रदोष के दिन सफेद रंग के वस्त्र पहने जा सकते हैं. हालांकि, गुरु प्रदोष के चलते पीले रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ फल दे सकता है. इसके बाद आपको व्रत का संकल्प लेना है और पूरे दिन व्रत रखना है. आप निराहर और फलाहार व्रत कर सकते हैं. इसके पश्चात शाम को प्रदोष काल में शिवालय जाए और वहां शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर यानी पंचामृत अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव जी की प्रतिमा के सामने बैठकर महामृत्युंजय तथा उनके अन्य मंत्रों का जाप कर सकते हैं. इसके बाद शिव जी की आरती करें.
व्रत का पारण करने से पहले आपको ब्राह्मण तथा जरूरतमंदों को दान करना है. व्रत तोड़ने के लिए महादेव का भोग सर्वप्रथम ग्रहण करें. इसके बाद जल पिएं. यदि आप अन्न का सेवन कर रहे हैं, तो उस भोजन में प्याज-लहसुन न डालें.
गुरु प्रदोष व्रत कथा (Read Guru Pradosh Vrat Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ. देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला. यह देख वृत्रासुर अत्यन्त क्रोधित हो गए और स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ. आसुरी माया से उसने अपना एक विकराल रूप धारण कर लिया. इससे सभी देवता भयभीत हो गए और गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहुंचे. बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हे वृत्रासुर का वास्तविक परिचय दे दूं.
वृत्रासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है. उसने गन्धमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न किया. पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था. एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया. वहां शिव जी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहास पूर्वक बोला- हे प्रभु! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं. किन्तु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध होकर सभा में बैठे.
चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिव शंकर हंसकर बोले- हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है. मैंने मृत्युदाता कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारण जन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!
माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुई- अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है. अत: मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा, अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे श्राप देती हूं. जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हो गया और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्रासुर बना.
वृत्रासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए गंधमादन पर्वत पर कठोर तपस्या शुरू कर दी. उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वरदान दिया. इस वरदान के कारण ही वृत्रासुर बहुत शक्तिशाली और अजेय बन गया है.
गुरुदेव बृहस्पति ने आगे बोले- वृत्रासुर बाल्यकाल से ही शिव भक्त रहा है. अत: वृत्रासुर को हराने के लिए केवल युद्ध करना काफी नहीं होगा. उन्होंने इंद्र को भगवान शिव की आराधना करने और श्रद्धा से गुरु प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी.
इंद्र ने बृहस्पति देव की बात मानी और पूरी श्रद्धा के साथ प्रदोष व्रत रखा, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की. भगवान शिव की कृपा से इंद्र को अपनी खोई हुई शक्ति वापस मिल गईं. इसके बाद इंद्र और वृत्रासुर के बीच फिर भयंकर युद्ध हुआ. इस बार इंद्र ने वृत्रासुर को पराजित कर दिया. वृत्रासुर के अंत के बाद देवताओं को राहत मिली और देवलोक में फिर से शांति स्थापित हो गई.
भगवान शिव जी की आरती (Lord Shiva Aarti Lyrics in Hindi)
ऊं जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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