Cyclone Arnab | चक्रवात 'अर्नब' ने आंध्र-ओडिशा तट को किया पार! गजपति से 1,500 लोग सुरक्षित निकाले गए, 10 जिलों में स्कूल-आंगनवाड़ी बंद
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान 'अर्नब' गुरुवार को उत्तरी आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिणी ओडिशा के तटीय इलाकों को पार कर गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह चक्रवाती तंत्र कलिंगपटनम के दक्षिण-पश्चिम के पास, विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच से होकर तट से टकराया। इसके प्रभाव से दोनों राज्यों के तटीय और निचले इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। तट से टकराने के बाद तूफान के जमीन की ओर बढ़ने के साथ ही बारिश की तीव्रता और अधिक बढ़ गई है, जिसे देखते हुए ओडिशा सरकार ने छह संवेदनशील जिलों- गजपति, कोरापुट, रायगढ़ा, नबरंगपुर, कालाहांडी और गंजाम को 'रेड ज़ोन' घोषित किया है।
गजपति से 1,500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
जैसे ही चक्रवाती तूफ़ान ओडिशा तट की ओर बढ़ा, राज्य के अधिकारियों ने गजपति से लगभग 1,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। ओडिशा के मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि 1,500 से ज़्यादा लोगों को पहले ही सुरक्षित निकाला जा चुका है और राज्य सरकार ने ज़िला प्रशासन को बहुत सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि कोई भी व्यक्ति बाढ़ के पानी में फँसा न रहे।
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उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को उनके गाँवों में पानी पहुँचने से पहले जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी संवेदनशील इलाकों में एंटी-वेनम (सांप के काटने की दवा) जैसी दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।
ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज़ ने 380 टीमों को अलर्ट पर रखा
इन हालात के बीच, ओडिशा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज़ ने भारी उपकरणों और मल्टी-पर्पस फायर टेंडर्स के साथ 380 टीमों को अलर्ट पर रखा है; यह जानकारी IGP डॉ. उमाशंकर डैश ने दी। IMD ने आगे बताया कि 'डीप डिप्रेशन' (गहरे कम दबाव का क्षेत्र) के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते रहने और विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच, कलिंगपटनम के दक्षिण-पश्चिम के पास उत्तरी आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिणी ओडिशा तट को पार करने की संभावना है।
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दक्षिणी और तटीय ओडिशा में भारी बारिश
'डीप डिप्रेशन' के कारण बुधवार को दक्षिणी और तटीय ओडिशा में भारी बारिश हुई, जिसके चलते अधिकारियों को कम से कम 5,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना पड़ा। IMD (भारत मौसम विज्ञान विभाग) के एक अधिकारी ने बताया कि लैंडफॉल के बाद ओडिशा में बारिश की तीव्रता बढ़ गई है, जहां मंगलवार से ही बारिश हो रही है। कोरापुट जिले के सेमिलीगुडा में पिछले 24 घंटों में (सुबह 8.30 बजे तक) सबसे ज़्यादा 230 मिमी बारिश दर्ज की गई, इसके बाद उसी जिले के जेपोर में 161 मिमी बारिश हुई।
उन्होंने बताया कि राज्य में 16 से ज़्यादा जगहों पर 10 सेमी से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है। गहरे डिप्रेशन (deep depression) को देखते हुए, राज्य सरकार ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की 33 टीमें तैनात की हैं।
इस बीच, ओडिशा सरकार ने 10 जिलों में शिक्षण संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उन्हें संभावित स्थिति को देखते हुए मुख्यालय में ही रहने को कहा गया है।
साथ ही, संवेदनशील इलाकों के सभी अस्पतालों को पर्याप्त आपातकालीन दवाएं स्टॉक करने का निर्देश दिया गया है, और संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि वे गर्भवती महिलाओं को निचले इलाकों से सुरक्षित स्थानों जैसे पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) या 'मां गृहों' (Maa Gruhas) में पहुंचाएं।
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India Pacific Relations | भारत को PIF में मिला 'रणनीतिक साझेदार' का दर्जा, प्रशांत महासागरीय देशों के साथ सहयोग होगा मजबूत, जयशंकर ने बताया बड़ा कदम
प्रशांत महासागरीय क्षेत्र (Pacific Region) में भारत के कूटनीतिक और विकासात्मक संबंधों को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई मिली है। भारत को 'प्रशांत द्वीप समूह फोरम' (Pacific Islands Forum - PIF) में आधिकारिक रूप से ‘‘रणनीतिक साझेदार श्रेणी’’ (Strategic Partner Category) में शामिल कर लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर आयोजित भारत-एफआईपीआईसी (FIPIC - Forum for India-Pacific Islands Cooperation) विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने इस घटनाक्रम को एक अत्यंत "सकारात्मक विकास" करार दिया और विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत के रिश्ते और अधिक प्रगाढ़ व मजबूत होंगे।
बैठक में जयशंकर ने कहा कि उन्हें प्रशांत द्वीप समूह फोरम (पीआईएफ) के महासचिव बैरन वाका का पत्र प्राप्त कर खुशी हुई, जिसमें उन्हें बताया गया है कि ‘‘भारत को पीआईएफ में रणनीतिक साझेदार श्रेणी में शामिल किया गया है। यह एक सकारात्मक घटनाक्रम है और मुझे विश्वास है कि इससे हमारे सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।’’ वर्ष 1971 में स्थापित पैसिफिक आइलैंड्स फोरम में 18 सदस्य हैं।
इनमें ऑस्ट्रेलिया, कुक आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, फिजी, फ्रेंच पोलिनेशिया, किरिबाती, नाउरू, न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नियू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, मार्शल आइलैंड्स गणराज्य, समोआ, सोलोमन आइलैंड्स, टोंगा, तुवालु और वानुआतु शामिल हैं। बैठक में जयशंकर ने नेताओं के साथ 2023 में आयोजित तीसरे एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति पर चर्चा की। इसमें फोरम के ढांचे के तहत विकास साझेदारी के साथ-साथ भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के तहत हुई प्रगति शामिल थी।
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उन्होंने कहा कि दोनों ढांचों के तहत कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह रेखांकित करना चाहता हूं कि भारत ब्लू पैसिफिक महाद्वीप के लिए 2050 की रणनीति का पूरी तरह सम्मान और समर्थन करता है।’’
उन्होंने उस रूपरेखा का जिक्र किया, जो एक क्षेत्र के रूप में तथा प्रशांत क्षेत्र के देशों और क्षेत्रों, समुदायों और लोगों के रूप में मिलकर काम करने के लिए प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को निर्धारित करती है। जयशंकर ने फिजी में 100 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। भारत को 12 सदस्य देशों से 20 समुद्री एंबुलेंस की मांग मिली है।
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जयशंकर ने विश्वास जताया कि ‘‘मार्च 2027 तक हम इन्हें उपलब्ध कराने की स्थिति में होंगे।’’ फिजी में अगले महीने कृत्रिम अंग लगाने के लिए एक शिविर आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है। इससे जरूरतमंद करीब 650 मरीजों को लाभ मिलेगा। भारत ने 14 प्रशांत द्वीपीय देशों में 2,800 घरों में सौर ऊर्जा की सुविधा उपलब्ध कराने का काम पूरा कर लिया है और 70 महिला सौर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया है।
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण लगातार मांग-आधारित, विकास-केंद्रित और जन-केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में भारत की विकास परियोजनाएं आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के हमारे साझा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।’’
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित कार्ययोजना के संबंध में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अल नीनो के प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करने का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत इस प्राकृतिक घटना के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद करने के लिए तैयार है।
उन्होंने अंतरिक्ष, टिकाऊ तटीय और महासागरीय अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। भारत ने सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इन दोनों पहलों के तहत कई परियोजनाएं पहले से जारी हैं।
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