Responsive Scrollable Menu

वाशिंगटन पहुंचे शी चिनफिंग, US President Donald Trump ने खुद की अगवानी

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 24 सितंबर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग तीन दिवसीय यात्रा पर वाशिंगटन पहुंचे, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी भव्य अगवानी की। शी और चीन की प्रथम महिला पेंग लियुआन को लेकर विमान बुधवार को स्थानीय समयानुसार शाम 5:39 बजे (भारतीय समयानुसार बृहस्पतिवार तड़के तीन बजकर नौ मिनट पर) मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचा। यह छह महीने से भी कम समय में ट्रंप और शी के बीच दूसरी शिखर बैठक है।

ट्रंप और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप स्थानीय समयानुसार शाम छह बजकर एक मिनट (भारतीय समयानुसार तड़के तीन बजकर 31 मिनट) पर शी और पेंग के विमान से उतरने पर सीढ़ियों के नीचे उनका इंतजार कर रहे थे। यह 1962 के बाद पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी विदेशी नेता की हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से अगवानी की। उस वर्ष तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने हवाई अड्डे पर ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन की अगवानी की थी।

संक्षिप्त अभिवादन और स्वागत के बाद दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष और उनकी पत्नियां 100 फुट लंबे लाल कालीन पर आगे बढ़ीं। इस दौरान 21 सदस्यीय सम्मान दल सावधान की मुद्रा में खड़ा था और अमेरिकी वायुसेना के बैंड ने तोपों की औपचारिक सलामी के बीच संगीत बजाया। बैंड द्वारा अमेरिका और चीन के राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान अमेरिकी वायुसेना के दो बी-1 बमवर्षक विमानों ने हवाई अड्डे के ऊपर से उड़ान भरी।

शी और पेंग वाहनों के काफिले के साथ हवाई अड्डे से रवाना हुए, जबकि ट्रंप और मेलानिया अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस लौटने के लिए मरीन वन हेलीकॉप्टर में सवार हुए। चीनी प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और केंद्रीय समिति के सामान्य कार्यालय के निदेशक काई छी तथा केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य एवं विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं। शी और ट्रंप के बीच बातचीत में व्यापार शुल्क, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सैन्य संबंध, पश्चिम एशिया में संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध, अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे मुद्दे उठने की उम्मीद है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संवाददाताओं से कहा, ‘‘अमेरिका और चीन के बीच संबंध 21वीं सदी को परिभाषित करेंगे।’’ रुबियो ने माना कि कई मुद्दों पर चीन और अमेरिका के बीच गंभीर मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व एक-दूसरे से संवाद नहीं करते हैं तो यह ‘‘गैर-जिम्मेदाराना’’ होगा। रुबियो ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अब उच्चतम स्तर पर एक-दूसरे से संवाद करने की जिम्मेदारी है।

मुझे लगता है कि यह यात्रा इसी बात को दर्शाती है कि राष्ट्रपति का मानना है कि चीनी सरकार के साथ हमारे मतभेद और असहमतियां चाहे जो भी हों, यह कोई छोटा देश नहीं है।’’ इस राजकीय यात्रा में बृहस्पतिवार को व्हाइट हाउस में औपचारिक राजकीय रात्रिभोज भी शामिल है। इसका उद्देश्य मई में ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान किए गए भव्य औपचारिक स्वागत का प्रत्युत्तर देना है। मेलानिया ट्रंप ने बुधवार को इससे पहले कहा था कि उनके पति ने वाशिंगटन में शी के पहुंचने पर व्यक्तिगत रूप से उनका स्वागत करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं।

उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज चैनल’ के कार्यक्रम ‘फॉक्स एंड फ्रेंड्स’ को दिए साक्षात्कार में शी और उनकी पत्नी के बारे में कहा, ‘‘वह हमारी धरती पर आ रहे हैं और हमें उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत करना चाहिए।’’ बृहस्पतिवार को शी का व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत किया जाएगा और वह सलामी गारद का निरीक्षण भी करेंगे। औपचारिक रात्रिभोज से पहले दोनों नेताओं के बंद कमरे में महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करने की उम्मीद है। इस रात्रिभोज में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और स्पेसएक्स के एलन मस्क जैसे प्रौद्योगिकी जगत के प्रमुख लोग शामिल होंगे।

हालांकि, ऐसी उम्मीद कम है कि इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में कोई बड़ा बदलाव आएगा। शुक्रवार को शी और पेंग व्हाइट हाउस में ट्रंप दंपति के साथ चाय पर निजी मुलाकात करेंगे और इसके बाद वे वाशिंगटन स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार के दौरे पर उनके साथ जाएंगे। व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस दौरान दोनों देशों के संबंधों को रेखांकित करने वाले ऐतिहासिक दस्तावेज उन्हें दिखाए जाएंगे।

Continue reading on the app

S Jaishankar और Marco Rubio की न्यूयॉर्क में वार्ता, Russia Sanctions पर रखे भारत के हित

(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 24 सितंबर भारत और अमेरिका ने रूस तथा ईरान के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर लगाए जा सकने वाले ‘‘प्रतिबंधों’’ पर चर्चा की और इस दौरान अमेरिका ने कहा कि वह क्षेत्रीय साझेदारों की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए तैयार है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘रुबियो और जयशंकर ने पश्चिम एशिया और उससे आगे के घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

दोनों ने उन देशों पर लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों पर भी चर्चा की, जो रूस और ईरान के साथ आर्थिक रूप से जुड़े हैं।’’ रूबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों को उनकी ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए बेहतर स्थिति में है। दोनों राजनयिकों ने सुरक्षित, संरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने में अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका की पुष्टि की। बैठक में जयशंकर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए गए रूस प्रतिबंध कानून को लेकर भारत के ‘‘हितों और चिंताओं’’ को दोहराया तथा अमेरिका के साथ खाड़ी और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलकर अच्छा लगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून (एसआरआईए) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। खाड़ी और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।’’ इससे पहले रुबियो ने कहा था कि न्यूयॉर्क में जयशंकर से मिलकर ‘‘बहुत अच्छा लगा।’’ रुबियो ने कहा, ‘‘हम साथ मिलकर अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं और प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर समन्वय कर रहे हैं।’’ पिछले शुक्रवार को ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून, 2026’ पर हस्ताक्षर किए। यह कानून रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, शुल्कों और प्रतिबंधात्मक प्रावधानों को अधिकृत तथा विस्तारित करता है और ईरान पर लागू मौजूदा प्रतिबंधों को जारी रखता है।

इस कानून का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने वाले प्रतिबंध विधेयक का प्रस्ताव दिया था। संयुक्त राष्ट्र में मंगलवार को विश्व के नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ‘‘शक्तिशाली नए कानून’’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उन्हें रूस के तेल के बड़े खरीदारों पर ‘‘अत्यधिक नए शुल्क लगाने के अधिकार’’ प्रदान करता है। इन देशों में भारत और चीन शामिल हैं।

ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस में कहा, ‘‘यदि जरूरी हुआ तो मुझे इनका इस्तेमाल करना पड़ेगा। अब हत्या रोकने का समय आ गया है।’’ भारत ने कहा है कि वह अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए वह विविध स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति जारी रखेगा।

Continue reading on the app

  Sports

Asian Games 2026: सलमान खान ने दिलाया मेडल, सतनाम सिंह के साथ मिलकर 36 साल के सिलसिले को रखा बरकरार

सलमान खान ने सतनाम सिंह के साथ मिलकर एशियन गेम्स में कमाल किया है. दोनों ने एक बदले हुए इवेंट में देश के लिए मेडल जीतकर दिखाया. ऐसा करते हुए उन्होंने 36 साल से चले आ रहे सिलसिले को भी बरकरार रखा. Thu, 24 Sep 2026 08:04:47 +0530

  Videos
See all

Saudi Arabia War Update: सऊदी में उतरी पाक सेना, हूतियों ने खदेड़ा? जीत गया ईरान! Saudi Pakistan #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-24T04:15:32+00:00

Yamuna Expressway Bus Fire: ड्राइवर केबिन के पास से लगी थी आग? FIR में यात्रियों ने लगाए आरोप #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-24T04:07:34+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers