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वांसे सम्मेलन: जब हिटलर के सबसे क्रूर सहयोगी की अगुवाई में लिखी गई खौफनाक कहानी

नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में मौजूद वांसे झील के किनारे स्थित एक आलीशान विला में 20 जनवरी 1942 को नाजी शासन की वह बैठक हुई, जिसने मानव इतिहास के सबसे भयानक अपराध को एक सुनियोजित प्रशासनिक नीति का रूप दे दिया। इस बैठक को इतिहास में “वांसे सम्मेलन” के नाम से जाना जाता है। यहीं पर यूरोप के यहूदियों के सामूहिक नरसंहार, जिसे बाद में “होलोकॉस्ट” कहा गया, को व्यवस्थित रूप से लागू करने की योजना पर अंतिम मुहर लगाई गई थी।

वांसे सम्मेलन की अध्यक्षता नाजी नेता और एसएस अधिकारी राइनहार्ड हाइड्रिख ने की, जो हिटलर के सबसे क्रूर और प्रभावशाली सहयोगियों में गिने जाते थे। बैठक में नाजी शासन के विभिन्न मंत्रालयों और सुरक्षा एजेंसियों के लगभग 15 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें गृह मंत्रालय, न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और एसएस के शीर्ष अधिकारी थे। यह तथ्य स्वयं में बताता है कि यह नरसंहार केवल कट्टरपंथी हिंसा नहीं, बल्कि राज्य की पूरी मशीनरी द्वारा समर्थित और संचालित अपराध था।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य तथाकथित “यहूदी प्रश्न के अंतिम समाधान,” यानी फाइनल सॉल्यूशन को स्पष्ट करना था। हालांकि इससे पहले भी यहूदियों के उत्पीड़न, गेट्टो में बंदीकरण और सामूहिक हत्याएं शुरू हो चुकी थीं, लेकिन वान्जी सम्मेलन ने इन कार्रवाइयों को एक संगठित, कानूनी और प्रशासनिक ढांचे में ढाल दिया। बैठक में यूरोप के विभिन्न देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ 10 लाख यहूदियों की सूची तक प्रस्तुत की गई, जिन्हें नाजी योजना के तहत निशाना बनाया जाना था।

वांसे सम्मेलन की सबसे भयावह बात यह थी कि इसमें किसी भी तरह की नैतिक बहस नहीं हुई। यहूदियों की हत्या को एक “प्रशासनिक समस्या” की तरह देखा गया—किसे कहां भेजना है, परिवहन कैसे होगा, श्रम शिविरों में किसे रखा जाएगा और किसे सीधे मौत के घाट उतार दिया जाएगा। ऑशविट्ज, ट्रेब्लिंका और सोबिबोर जैसे मृत्यु शिविरों में बाद में जो औद्योगिक स्तर की हत्याएं हुईं, उनकी नींव इसी सोच में निहित थी।

इतिहासकार मानते हैं कि वांसे सम्मेलन होलोकॉस्ट की शुरुआत नहीं था, लेकिन यह उसका निर्णायक मोड़ अवश्य था। इसके बाद नरसंहार और अधिक तेज, संगठित और व्यापक हो गया।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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नेहा कक्कड़ ने पर्सनल-प्रोफेशनल जिम्मेदारी से लिया ब्रेक:बोलीं- पता नहीं मैं वापस लौटूंगी या नहीं, पैपराजी और फैंस से फोटो न खींचने की अपील की

सिंगर नेहा कक्कड़ ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया है कि वह कुछ समय के लिए लाइमलाइट से दूर जा रही हैं। नेहा ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बताया कि वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ, यहां तक कि रिश्तों से भी ब्रेक ले रही हैं। हालांकि, कुछ ही देर बाद उन्होंने ये स्टोरी अपने अकाउंट से डिलीट कर दीं। सोमवार को शेयर की गई पोस्ट में नेहा ने लिखा, “अब जिम्मेदारियों, रिश्तों, काम और हर उस चीज से ब्रेक लेने का वक्त है, जिसके बारे में मैं अभी सोच सकती हूं। पता नहीं मैं वापस आऊंगी या नहीं। धन्यवाद।” इसके बाद नेहा ने एक और स्टोरी पोस्ट कर पैपराजी और फैंस से उन्हें क्लिक न करने की अपील की। उन्होंने लिखा, “मैं पैपराजी और फैंस से गुजारिश करती हूं कि मेरी बिल्कुल भी फोटो न खींचे। मेरी प्राइवेसी का सम्मान करें और मुझे शांति से जीने दें। नो कैमरा प्लीज।” गौरतलब है कि हाल ही में नेहा कक्कड़ और उनके भाई टोनी कक्कड़ को उनके गाने ‘कैंडी शॉप’ को लेकर जबरदस्त ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने गाने के डांस मूव्स को ‘सस्ते’ और ‘अश्लील’ बताते हुए के-पॉप की नकल करने के आरोप लगाए थे। इससे पहले साल 2025 में नेहा उस वक्त भी सुर्खियों में आई थीं, जब मेलबर्न कॉन्सर्ट के दौरान स्टेज पर रोते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ था। आरोप था कि वह कॉन्सर्ट में तीन घंटे देरी से पहुंचीं, जिसके बाद दर्शकों ने नाराजगी जताई। हालांकि नेहा ने आयोजकों पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया था। नेहा कक्कड़ के करियर की बात करें तो वो काफी संघर्ष भरा रहा है। उन्होंने महज चार साल की उम्र में धार्मिक आयोजनों में भजन गाकर अपने परिवार की आर्थिक मदद शुरू की थी। बाद में वह इंडियन आइडल सीजन 2 में नजर आईं, जहां वह टॉप 10 तक पहुंचीं। नेहा ने ‘आंख मारे’, ‘दिलबर’, ‘हौली हौली’, ‘मोरनी बांके’ जैसे कई हिट गाने दिए हैं और वह म्यूजिक रियलिटी शो में जज के तौर पर भी दिखाई देती रही हैं।

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