नियमों की अनदेखी पड़ी भारी: IRADI की ICICI लोम्बार्ड के खिलाफ कार्रवाई, 1 करोड़ का जुर्माना ठोका
इंश्योरेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस पर भारतीय बीमा नियामक IRDAI ने बड़ी कार्रवाई की। नियामक ने कंपनी पर नियमों के पालन में लापरवाही के चलते 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया।
IRDAI के मुताबिक कंपनी से जुड़ी कई कमियां जांच में सामने आई थीं। इनमें आउटसोर्सिंग, वेंडर के चयन और उसकी जांच, रिकॉर्ड संभालने, इंटरनल कंट्रोल और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियम शामिल हैं। यह कार्रवाई सितंबर 2019 में हुई कंपनी की ऑनसाइट जांच के बाद शुरू हुई प्रक्रिया के आधार पर की गई है।
जांच के निष्कर्षों पर कंपनी से जवाब लिया गया। इसके बाद दो पूर्णकालिक सदस्यों वाले पैनल के सामने कंपनी की व्यक्तिगत सुनवाई भी हुई। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद कुछ उल्लंघन साबित हुए।
आउटसोर्सिंग और वेंडर जांच में मिली खामियां
IRDAI ने बताया कि कंपनी ने आउटसोर्स की गई गतिविधियों और वेंडर से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया। वेंडर के चयन और उसकी उचित जांच यानी ड्यू डिलिजेंस से जुड़े मामलों में भी कमियां मिलीं। इसके अलावा रिकॉर्ड रखने, आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था और कंपनी के गवर्नेंस से जुड़े नियमों के पालन में भी खामियां पाई गईं।
नियामक ने यह जुर्माना इंश्योरेंस एक्ट, 1938 की धारा 102 के तहत लगाया है। इसमें आईआरडीएआई के 2017 के आउटसोर्सिंग ऑफ एक्टिविटीज बाय इंश्योरर रेगुलेशन और बीमा कंपनियों के लिए कॉरपोरेट गवर्नेंस गाइडलाइंस से जुड़े नियमों का उल्लंघन शामिल है।
कुछ मामलों में कंपनी को चेतावनी भी
सिर्फ जुर्माने तक मामला सीमित नहीं रहा। IRDAI ने कुछ दूसरी कमियों को लेकर ICICI Lombard को एडवाइजरी भी जारी की है। इनमें अनअलोकेटेड प्रीमियम और फ्री-लुक कैंसिलेशन के अनुरोधों को तय समय में प्रोसेस नहीं करने जैसे मामले शामिल हैं।
बोर्ड के सामने रखना होगा आदेश
आईआरएडीआई ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश को अपनी बोर्ड मीटिंग में रखे। कंपनी को उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट भी तय समय में नियामक को देनी होगी।
IRDAI ने कहा कि ऐसी कार्रवाई का मकसद बीमा कंपनियों में बेहतर गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। साथ ही पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा भी नियामक की प्राथमिकता है। नियामक ने साफ किया है कि जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी।
(प्रियंका कुमारी)
US Iran War: अमेरिका-ईरान संघर्ष का खर्च पहुंचा 45.1 अरब डॉलर, पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी रिपोर्ट
US Iran conflict cost: अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का ईरान के साथ चल रहा संघर्ष आर्थिक रूप से बेहद महंगा साबित हो रहा है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने शुक्रवार को अमेरिकी कांग्रेस को एक अनुमानित रिपोर्ट सौंपी है, जिसके मुताबिक इस संघर्ष का कुल खर्च 45.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस ताजा आंकड़े में 3 सितंबर तक के युद्ध से जुड़े 43.6 अरब डॉलर और अतिरिक्त ईंधन के लिए खर्च किए गए 1.5 अरब डॉलर शामिल हैं।
हालांकि, पेंटागन का यह आकलन इस संघर्ष के पूरे वित्तीय खर्च का पूर्ण लेखा-जोखा नहीं है। सीएनएन के सूत्रों के मुताबिक, इस आंकड़े में क्षतिग्रस्त हुए अमेरिकी सैन्य अड्डों और इमारतों की मरम्मत का खर्च शामिल नहीं है। इसके अलावा, इसमें कांग्रेस को प्रत्यक्ष सैन्य अभियानों के अप्रत्यक्ष खर्चों का विस्तृत ब्योरा भी नहीं दिया गया है।
पेंटागन के आंकड़े पहले के अनुमानों से अधिक
पेंटागन का यह नवीनतम अनुमान, कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) द्वारा 1 अगस्त तक के लिए लगाए गए 38 अरब डॉलर के अनुमान से काफी अधिक है। साथ ही, यह जुलाई में आए पेंटागन के 37.5 अरब डॉलर के शुरुआती आंकड़े से भी ज्यादा है। CBO ने अपनी 15 सितंबर की रिपोर्ट (Estimating the Cost of Combat Operations Against Iran) में बताया था कि रक्षा विभाग को 1 अगस्त तक लगभग 38 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ा है।
बजट कार्यालय के अनुसार, इस खर्च में परिचालन, रसद और रखरखाव की लागत शामिल है, जिसमें युद्ध में नष्ट हुए गोला-बारूद और उपकरणों की भरपाई, उड़ान के घंटों में वृद्धि, अन्य सैन्य अभियान और अधिक ईंधन लागत शामिल हैं। सीएनएन के अनुसार, CBO ने चेतावनी दी थी कि रक्षा विभाग द्वारा जानकारी मांगने पर जवाब न दिए जाने के बाद उसका यह अनुमान सरकारी डेटाबेस और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है, जिस वजह से इसमें काफी अनिश्चितता बनी हुई है।
आगे और बढ़ सकता है युद्ध का खर्च
CBO का अनुमान है कि लड़ाई की तीव्रता के आधार पर संघर्ष की लागत भविष्य में और बढ़ सकती है। बजट कार्यालय का आकलन है कि यदि हिंसा का स्तर मई और जून जैसा रहता है, तो संघर्ष का हर अगला महीना लगभग 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च लाएगा। यदि लड़ाई जुलाई जैसी तीव्रता पर पहुंचती है, तो मासिक खर्च 3 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, मिसाइल-रक्षा इंटरसेप्टर पर भारी खर्च ने रक्षा विभाग के सामने रक्षा उपकरणों की कमी की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आने वाले कई वर्षों तक सूची प्रभावित रह सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर
प्रत्यक्ष सैन्य खर्च के अलावा, इस संघर्ष ने व्यापक आर्थिक प्रभाव भी डाले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से तेल और प्राकृतिक गैस की शिपिंग में बाधाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है। CBO का अनुमान है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों से उपभोक्ता महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। एजेंसी ने अनुमान जताया है कि 2027 की पहली तिमाही में पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) मूल्य सूचकांक, फरवरी 2026 के अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक अधिक रहेगा, जबकि कोर PCE महंगाई 0.3 प्रतिशत अंक अधिक रहने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, प्रशासन ने जून में 87.6 अरब डॉलर के अतिरिक्त वित्तपोषण का अनुरोध किया था, जिसमें रक्षा विभाग के लिए 67.1 अरब डॉलर शामिल थे। पेंटागन द्वारा शुक्रवार को कानून निर्माताओं को दी गई इस ताजा रिपोर्ट के बाद संघर्ष का कुल आधिकारिक खर्च 45.1 अरब डॉलर आंका गया है, जबकि कई संभावित खर्च अभी भी इस आंकड़े से बाहर हैं।
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