AAP का दावा, सर्वे में आम आदमी पार्टी बनी गुजरात की दूसरी बड़ी पार्टी, कांग्रेस को छोड़ा पीछे
गुजरात की सियासत से बड़ी खबर सामने आई है. आम आदमी पार्टी का दावा है कि एक अहम सर्वे में उनकी पार्टी प्रदेश की दूसरी बड़ी पार्टी बन गई है. आम आदमी पार्टी गुजरात में विकल्प के रूप में उभर रही है. WeePreside और CIF की ओर से किए गए 'Pulse of Gujarat 2026' सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात की राजनीति अब भाजपा के बाद कांग्रेस नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी ने ले ली है. कांग्रेस की पकड़ प्रदेश में लगातार कमजोर होती जा रही है.
क्या है सर्वे
सर्वे के मुताबिक गुजरात में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है. जबकि वहीं कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17.3 प्रतिशत रह गया है. वहीं बीजेपी अब भी 49.5 फीसदी के साथ पहले नंबर पर है. हालांकि 8 फीसदी वोट ऐसे हैं जो अनडिसाइड हैं ऐसे में इनमें चार फीसदी भी बीजेपी के खाते में गए तो वह अपने पुराने स्थान पर ही काबिज रहेगी.
सर्वे के मुताबिक 2022 के विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो बदलाव साफ दिखाई देता है. 2022 में कांग्रेस को करीब 27 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2017 के 40 प्रतिशत के मुकाबले पहले ही काफी बड़ी गिरावट थी. अब तीन साल बाद स्थिति यह है कि कांग्रेस का वोट शेयर करीब 10 प्रतिशत और गिर गया है. आम आदमी पार्टी 2022 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ते हुए करीब 13 प्रतिशत वोट शेयर तक पहुंची थी.
आप ने तीन साल में बनाई बढ़त
सर्वे के आधार पर तीन साल में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर करीब दोगुना हो चुका है. आम आदमी पार्टी का मानना है कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट अब बड़ी संख्या में उनकी ओर शिफ्ट हो रहा है.
क्या कहते हैं क्षेत्रीय आंकड़े
आम आदमी पार्टी के मुताबिक सौराष्ट्र हो या फिर कच्छ इन इलाकों में आम आदमी पार्टी ने अपनी पकड़ बनाना शुरू की है. वहीं उत्तर और मध्य गुजरात में बीजेपी अब भी आगे है, लेकिन शहरी और मेट्रो इलाकों में आम आदमी पार्टी को कांग्रेस से कहीं ज़्यादा समर्थन मिल रहा है.
अहमदाबाद में AAP का सम्मेलन
अहमदाबाद में हुए आप के सम्मेलन में राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 2027 में गुजरात में सत्ता बदलने वाली है और आम आदमी पार्टी सत्ता परिवर्तन करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अगर और लोगों को जेल में डाला गया तो उससे डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह लड़ाई अन्याय के खिलाफ़ है और जनता इसका जवाब देगी. WeePreside और CIF का यह सर्वे बताता है कि बीजेपी अभी आगे ज़रूर है, लेकिन उसका मुकाबला अब कमजोर होती कांग्रेस से नहीं, बल्कि तेजी से मजबूत होती AAP से है.
Basant Panchami 2026: कब है बसंत पंचमी? नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं है. यह मौसम में बदलाव के नए प्रकाश का संकेत है. इस दिन हर तरफ पीले रंग की रौनक दिखाई देती है. लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं. हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में यही सवाल है कि बसंत पंचमी 22 जनवरी को मनाई जाएगी या 23 जनवरी को. चलिए आपको बताते हैं शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में.
बसंत पंचमी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 की शाम 06 बजकर 15 मिनट से हो रही है. इसका समापन 23 जनवरी 2026 की रात 08 बजकर 30 मिनट पर होगा. लेकिन उदया तिथि के नियम के अनुसार पर्व अगले दिन मनाना शुभ माना जाता है. इसलिए इस साल बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी. चूंकि 23 जनवरी की सुबह पंचमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन पूजा करना शुभ माना गया है.
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
मां सरस्वती की आराधना के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है. 23 जनवरी को पूजा के लिए यह समय शुभ रहेगा.
पूजा का समय: सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
अमृत काल: सुबह 08:45 बजे से 10:20 बजे तक
सरस्वती पूजा की आसान विधि
इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है. यह ज्ञान, शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सुबह जल्दी उठें और पीले वस्त्र पहनें. चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं. फिर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. साथ में भगवान गणेश को भी विराजमान करें. कलश रखें और दीप-धूप जलाएं. पीले फूल, चंदन, केसर और अक्षत अर्पित करें. पुस्तकें, कलम या वाद्य यंत्र मां के पास रखें. बच्चों के लिए इस दिन अक्षर अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है. भोग में पीले चावल, बूंदी के लड्डू या केसर का हलवा चढ़ाएं. अंत में आरती करें और ज्ञान का आशीर्वाद मांगें.
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी को नई शुरुआत का पर्व कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं. उनके वीणा वादन से सृष्टि में वाणी और संगीत का प्रसार हुआ. इसलिए यह दिन पढ़ाई, कला और रचनात्मकता से जुड़ा माना जाता है. इस दिन लोग अपने ज्ञान को मां के चरणों में समर्पित करते हैं.
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