चांदी में रिकॉर्ड तेजी, कीमतें पहली बार तीन लाख रुपए प्रति किलो के पार
मुंबई, 19 जनवरी (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के कारण चांदी में सोमवार को रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला, जिससे कीमतें पहली 3 लाख रुपए प्रति किलो के पार निकल गई हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी के 05 मार्च 2026 के कॉन्ट्रेक्ट का दाम दोपहर 2 बजे 15,413 रुपए या 5.36 प्रतिशत बढ़कर 3,03,175 रुपए प्रति किलो हो गया है।
इंड्रा-डे में चांदी ने 3,04,200 रुपए प्रति किलो का ऑल-टाइम हाई बनाया है, जो कि पिछले सत्र की क्लोजिंग 2,87,762 रुपए प्रति किलो से 16,438 रुपए अधिक है। हालांकि, हाजिर बाजार में चांदी की कीमत 3 लाख से नीचे बनी हुई है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी की गई कीमतों के अनुसार, चांदी का दाम 2,93,650 रुपए प्रति किलो है, जो कि पहले के 2,81,890 रुपए प्रति किलो से 11,760 रुपए अधिक है।
आईबीजेए की ओर दिन में दो बार सोने और चांदी की कीमतें जारी की जाती हैं।
24 कैरेट सोने की कीमत 2,385 रुपए बढ़कर 1,43,978 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,41,593 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।
22 कैरेट सोने का दाम 1,29,699 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,31,884 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। 18 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,07,984 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जो कि पहले 1,06,195 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। सोने का दाम 1.66 प्रतिशत बढ़कर 4,672 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 4.61 प्रतिशत बढ़कर ऑल-टाइम हाई 92.59 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।
जानकारों के मुताबिक, कीमती धातुओं में तेजी की वजह हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रमुख यूरोपीय देशों पर टैरिफ को माना जा रहा है, जिससे विश्व में अस्थिरता और बढ़ गई है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नए श्रम कानूनों से निजी बैंकों और बीमा कंपनियों का बढ़ा खर्च, तीसरी तिमाही में एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे बैंकों के ओपेक्स में उछाल
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2025 में लागू किए गए नए श्रम कानूनों (न्यू लेबर कोड्स) के चलते प्राइवेट सेक्टर के बैंकों और बीमा कंपनियों पर कर्मचारियों से जुड़ा खर्च बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में इन कंपनियों की परिचालन व्यय (ऑपरेटिंग एक्सपेंस या ओपेक्स) पहले की तुलना में ज्यादा रही है।
देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 18,770 करोड़ रुपए का परिचालन व्यय दर्ज किया, जबकि पिछले साल के इसी तिमाही में यह खर्च 17,110 करोड़ रुपए था।
एक्सचेंज फाइलिंग में एचडीएफसी बैंक ने बताया कि नए श्रम कानूनों की वजह से 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों की अवधि के दौरान कर्मचारियों की लागत में करीब 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त असर पड़ा है। यह असर लाभ और हानि खाते में जोड़ा गया है।
बैंक ने यह भी कहा कि वह केंद्र और राज्य सरकारों के नियमों और स्पष्टीकरणों पर नजर बनाए हुए है और आगे जरूरत पड़ने पर लेखांकन में बदलाव करेगा।
इसी तरह, आईसीआईसीआई बैंक ने बताया कि नए श्रम कानूनों के कारण इस तिमाही में उसके लाभ-हानि खाते पर करीब 145 करोड़ रुपए का असर पड़ा है।
यस बैंक ने भी नए नियमों की वजह से 155 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च जोड़ा है। वहीं, फेडरल बैंक ने 20.8 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है और आरबीएल बैंक ने करीब 32 करोड़ रुपए के अतिरिक्त खर्च का अनुमान लगाया है।
निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों पर भी नए श्रम कानूनों का असर पड़ा है। एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस ने कर्मचारियों से जुड़े लाभों के लिए 106.02 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जिसे कंपनी की कुल आय से घटाया गया है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने 11.04 करोड़ रुपए और आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने 53.06 करोड़ रुपए के असर का अनुमान लगाया है।
इसके उलट, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वेतन संरचना पहले से ही नए नियमों के काफी करीब थी, इसलिए उन्हें उसमें कोई बड़ा बदलाव या अतिरिक्त प्रावधान करने की जरूरत नहीं पड़ी।
विश्लेषकों के अनुसार, नए श्रम कानूनों के तहत वेतन संरचना में बदलाव होगा। इसमें बेसिक सैलरी और कुछ जरूरी भत्तों का हिस्सा बढ़ेगा। इससे नियोक्ताओं को कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन फंड में ज्यादा पैसा जमा करना पड़ेगा, जिससे कंपनियों का खर्च बढ़ेगा।
21 नवंबर 2025 को भारत सरकार ने चार नए श्रम कानूनों को अधिसूचित किया था। इनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020 शामिल हैं। इन्हें ही सामूहिक रूप से न्यू लेबर कोड्स कहा जाता है, जो पहले के 29 श्रम कानूनों को एक साथ जोड़ते हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने पिछले महीने इन नए नियमों से जुड़ा मसौदा केंद्रीय नियम और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न जारी किए थे, ताकि कंपनियां इन बदलावों के आर्थिक असर का आकलन कर सकें। इसके बाद बैंकों और बीमा कंपनियों ने अपने लाभ-हानि खातों में अतिरिक्त खर्च का अनुमान लगाया है।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
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