आरएआरआई पटना ने आयुर्वेद दिवस पर पारंपरिक भोजन और मिलेट्स पर मिनी एक्सपो का किया आयोजन
नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को पटना के अगमकुआं स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) में प्रदर्शनी-सह-मिनी एक्सपो और पारंपरिक खाद्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय के तहत मनाया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद, पारंपरिक एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों, मोटे अनाज (श्री अन्न) और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी आदतों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन आईसीएमआर-आरएमएनआईएचआर के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडे ने किया। आरएआरआई के प्रभारी डॉ. बनमाली दास ने आयुर्वेद में वर्णित पारंपरिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला और संतुलित आहार में स्थानीय, मौसमी और विविधतापूर्ण खाद्यान्नों की भूमिका पर जोर दिया।
मिनी एक्सपो में स्थानीय खाद्य सामग्री, श्री अन्न (मिलेट्स) और स्वास्थ्यवर्धक घटकों से तैयार पारंपरिक व पौष्टिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। आगंतुकों को उनके पोषण संबंधी महत्व, स्वास्थ्य लाभों और दैनिक आहार में उनके उचित उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों के लिए स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परीक्षण भी किए गए। आवश्यकता के अनुसार आयुर्वेदिक दवाएं वितरित की गईं। इसके अलावा आयुर्वेद, पोषण, रोगों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित पुस्तकों तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री का भी वितरण किया गया।
प्रतिभागियों को संतुलित पोषण, नियमित दिनचर्या, उचित खान-पान, योग और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुरूप मौसम और व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार आहार तथा जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
आयुर्वेद दिवस के नोडल अधिकारी डॉ. बालाजी पोतभारे, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. रितिका मिश्रा, अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. कुमारी अर्चना तथा संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम के आयोजन में योगदान दिया।
कार्यक्रम में मरीजों, उनके परिजनों और आम लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे पौष्टिक एवं संतुलित भोजन, पारंपरिक आहार पद्धतियों और आयुर्वेद आधारित स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिला।
--आईएएनएस
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हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत की संवेदनशील सोच ने छुआ मुख्यमंत्री धामी का दिल, घर पहुंचा टैब
किसी विद्यार्थी के सपने को पंख देने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, कई बार एक संवेदनशील सोच और किसी की जरूरत को समझने की भावना भी बड़ा बदलाव ला सकती है. ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने जब अपनी जरूरत से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने रखी, तो उसकी यह संवेदनशील सोच मुख्यमंत्री के मन को छू गई.
लवप्रीत ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह विषय रखा था कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध होने चाहिए, ताकि संसाधनों के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करने वाली लवप्रीत की सोच ने मुख्यमंत्री श्री धामी को प्रभावित किया.
टैबलेट उपलब्ध कराने की घोषणा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के दौरान ही विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की घोषणा की थी. इस योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को टैबलेट की सुविधा DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल संसाधनों की कमी किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा और प्रतिभा के विकास में बाधा न बने.
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने लवप्रीत द्वारा कार्यक्रम के दौरान रखी गई आवश्यकता का भी व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लिया. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारी लवप्रीत के घर पहुंचे और उसे टैब प्रदान किया.
लवप्रीत के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी
घर पर जब शिक्षा विभाग के अधिकारी टैब लेकर पहुंचे तो लवप्रीत के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी. उसे शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई उसकी बात इतनी जल्दी अमल में भी आएगी. टैब मिलने पर उसने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए आत्मीयता से ‘थैंक्यू’ कहा.
पढ़ाई को नई गति देने का माध्यम
लवप्रीत के लिए यह टैब केवल एक डिजिटल डिवाइस नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई को नई गति देने का माध्यम है. ऑनलाइन अध्ययन, शैक्षिक सामग्री तक आसान पहुंच और डिजिटल माध्यम से सीखने के अवसरों के साथ यह सुविधा उसकी शिक्षा को और बेहतर बनाने में सहायक होगी. साथ ही, लवप्रीत की कहानी यह भी संदेश देती है कि जब युवा केवल अपनी चिंता न कर समाज और अपने साथ पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में सोचते हैं, तो उनकी संवेदनशीलता बदलाव का माध्यम बन सकती है.
सरकार लगातार कार्य कर रही
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का प्रत्येक विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा और आवश्यक संसाधनों से जुड़ सके. आर्थिक या अन्य किसी कारण से संसाधनों की कमी विद्यार्थियों की प्रतिभा और उनके सपनों के आड़े न आए, इसके लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़कर उनके लिए सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.
विद्यार्थियों की चिंता करना यह दर्शाता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि लवप्रीत जैसी बेटियों की संवेदनशील सोच उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की पहचान है. अपनी जरूरत से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करना यह दर्शाता है कि हमारे युवाओं में केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना भी है. उन्होंने कहा कि ऐसे युवा ही विकसित और समर्थ उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
विभिन्न माध्यमों से जुड़ने में सुविधा मिलेगी
राज्य सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से टैबलेट उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य शिक्षा में डिजिटल संसाधनों की पहुंच को व्यापक बनाना है. इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री और ज्ञान के विभिन्न माध्यमों से जुड़ने में सुविधा मिलेगी. सरकार का प्रयास है कि गांव से लेकर शहर तक प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिल सके.
प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर दिया
‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में लवप्रीत की कही गई बात और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता इस कार्यक्रम की उस भावना को भी सामने लाती है, जिसमें युवाओं को केवल अपनी बात रखने का मंच ही नहीं, बल्कि उनकी सोच और सुझावों को शासन की प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर दिया जा रहा है. लवप्रीत के घर पहुंचा यह टैब इसी संवाद और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण है-जहां एक छात्रा ने दूसरों की चिंता रखी, मुख्यमंत्री ने उस भावना को समझा और उसे सहायता के रूप में जमीन पर उतारने की पहल की.
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