राहुल गांधी ने सीएम डॉ मोहन यादव को लिखा पत्र, 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग, कमलनाथ ने BJP पर किया हमला
इंदौर में आयोजित छात्रों की गूँज कार्यक्रम में राहुल गांधी के सामने छात्रों ने 27 % OBC आरक्षण लागू नहीं होने से 13 प्रतिशत नियुक्तियां होल्ड पर रहें की समस्या बताई थी, राहुल गांधी ने इसे लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है, उधर कमलनाथ ने राहुल गांधी के पत्र को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी ने उठाया 27 % OBC आरक्षण का मुद्दा
राहुल गांधी ने कल 22 सितम्बर को लिखे पत्र को आज सोशल मीडिया पर साझा किया उन्होंने X पर लिखा – ” मुख्यमंत्री जी, इंदौर में छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश के अनेक छात्रों ने शिक्षा, रोज़गार और अपने भविष्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। इनमें OBC आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से रुकी हुई नियुक्तियों के कारण वे लगातार अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। इन युवाओं ने परीक्षा पास कर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली है, फिर भी 87:13 व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण से जुड़े 13% पदों को होल्ड पर रखा गया है और इन पदों पर चयनित अभ्यर्थी 2022 से आज तक नियुक्ति का इंतज़ार कर रहे हैं।
सभी दलों ने सर्वसम्मति से 27% OBC आरक्षण को समर्थन दिया था, फिर भी इस मुद्दे का समाधान अब तक नहीं हुआ है। इसी देरी के कारण अभ्यर्थी आरक्षण के क्रियान्वयन और अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। आपसे अनुरोध है कि छात्रों के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी बात सुनें और जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान करें। इस देरी के कारण अभ्यर्थी पहले ही अपना बहुत कीमती वक्त गंवा चुके हैं। अब बिना किसी देरी के 27% OBC आरक्षण लागू कर 13% होल्ड पदों के सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएं।
कमलनाथ ने प्रदेश की BJP सरकार को घेरा
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राहुल गांधी के पत्र को X पर साझा किया है, उन्होंने लिखा – हमारे नेता राहुल गांधी ने एकदम सही सवाल पूछा है। मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में प्रदेश के OBC वर्ग को 27% आरक्षण दिया गया था लेकिन उसके बाद बनी भाजपा सरकारों ने ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से आरक्षण पर अघोषित रोक लगा रखी है। वर्षों से कभी हाई कोर्ट में तो कभी सुप्रीम कोर्ट में सरकार मामले को टालती रहती है। सरकारी वकील कभी तैयारी से नहीं जाते तो कभी अगली तारीख माँगते हैं। OBC आरक्षण लागू ना कर भाजपा ने अपना OBC विरोधी चेहरा ख़ुद बेनक़ाब कर लिया है।
हमारे नेता @RahulGandhi जी ने एकदम सही सवाल पूछा है। मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में प्रदेश के OBC वर्ग को 27% आरक्षण दिया गया था लेकिन उसके बाद बनी भाजपा सरकारों ने ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से आरक्षण पर अघोषित रोक लगा रखी है।
वर्षों से कभी हाई कोर्ट में तो कभी सुप्रीम कोर्ट में सरकार… https://t.co/T6skdgHh0m
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) September 23, 2026
Merchant Discount Rate नहीं, Merchant Tax Rate कहिए! भोपाल में व्यापारियों का ‘No UPI Day’, 60 सेकंड के लिए QR Code Blackout
भोपाल। UPI पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर भोपाल के व्यापारियों ने विरोध का अलग तरीका अपनाया। CAIT के आह्वान पर व्यापारियों ने ‘No UPI Day’ मनाया और अपने प्रतिष्ठानों पर 60 सेकंड के लिए UPI QR कोड का सांकेतिक Blackout किया। व्यापारियों ने साफ किया कि उनका विरोध UPI से नहीं, बल्कि इस पर लगने वाली अतिरिक्त लागत से है।
विरोध के बीच व्यापारियों ने MDR के नाम पर भी सवाल उठाया। CAIT भोपाल के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि इसका पूरा नाम Merchant Discount Rate है, लेकिन इसमें व्यापारी को Discount कहां मिल रहा है? जब व्यापारी को शुल्क देना है तो इसे MTR यानी Merchant Tax Rate क्यों न कहा जाए?
60 सेकंड का Blackout, आगे 60 घंटे तक बढ़ सकता है विरोध
धर्मेंद्र शर्मा के मुताबिक फिलहाल UPI QR कोड का Blackout केवल 60 सेकंड के लिए किया गया है। व्यापारियों की चिंता पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो विरोध को 60 घंटे और जरूरत पड़ने पर 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
CAIT का कहना है कि व्यापारी UPI बंद करने के पक्ष में नहीं हैं। UPI का इस्तेमाल व्यापारी खुद बड़े स्तर पर करते हैं। संगठन की मांग है कि डिजिटल भुगतान जारी रहे, लेकिन MDR के रूप में व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत न डाली जाए।
₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन का उठाया मुद्दा
CAIT ने कहा कि 15 अक्टूबर 2026 से निर्धारित पात्र ₹2,000 से अधिक के P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने का प्रावधान है। ₹75,000 और उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR को आधिकारिक तौर पर टैक्स नहीं माना गया है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। व्यापारियों का विरोध इसी अतिरिक्त लागत को लेकर है।
प्रदर्शन में संदीप गोधा, कपिल करोटिया, सतेंद्र धियानी सहित CAIT भोपाल के पदाधिकारी और व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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