Ladakh हिंसा मामले में बड़ा फैसला, उपराज्यपाल ने 20 लोगों पर दर्ज केस वापस लिए
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के सिलसिले में 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने की बुधवार को घोषणा की। सक्सेना ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैंने लद्दाख में शांति, जन-शांति और सामाजिक सौहार्द के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए लेह में पिछले साल 24 सितंबर को हुई दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा से संबंधित 20 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की मंजूरी दे दी है।’’ उन्होंने कहा कि लद्दाख पुलिस ने व्यापक समीक्षा के बाद लेह थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 144/2005 में 20 लोगों के खिलाफ मामला समाप्त करने की सिफारिश की थी। उपराज्यपाल ने कहा कि इस फैसले से इन 20 लोगों को अपने जीवन और करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों के बजाय न्याय और राहत को प्राथमिकता देने से लद्दाख में अधिक शांतिपूर्ण, एकजुट और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। सक्सेना ने पीड़ितों और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में ‘‘निरंतर मार्गदर्शन और संवेदनशील रुख’’ के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी आभार व्यक्त किया। लद्दाख प्रशासन ने अगस्त में कहा था कि वह 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के बाद कुछ लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों में मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल करेगा।
यह घटनाक्रम करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के प्रतिनिधियों की लेह में गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के अगले दिन और घटना की पहली बरसी से एक दिन पहले सामने आया है। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा की पहली बरसी के उपलक्ष्य में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को लेह में एक प्रतीकात्मक पदयात्रा का नेतृत्व किया। पिछले साल हुई इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
इसके बाद केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। वांगचुक ने घोषणा की कि 24 सितंबर को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
RPF रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन के लिए तैयार करेगा EFRR डेटाबेस
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) त्योहारों, धार्मिक कार्यक्रमों और बड़े सार्वजनिक समारोहों के दौरान विभिन्न स्टेशनों पर भीड़-भाड़ वाली स्थिति का 2022 से एक डेटाबेस तैयार करेगा, ताकि ऐसे मौकों पर अधिक भीड़ के कारण भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए समय रहते उपाय किये जा सकें। इन उपायों में, स्टेशन पर समय पर कर्मियों को तैनात करना, यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करना और राज्य पुलिस के साथ तालमेल बिठाना शामिल है। भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में त्योहार, धार्मिक समागम, मेले, परीक्षाएं, भर्ती अभियान, राजनीतिक कार्यक्रम, खेल-कूद के आयोजन, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम, बड़े सार्वजनिक समारोह और पर्यटकों के आगमन का महीना आदि शामिल हैं।
‘ज्यादा भीड़-भाड़ के लिए आरपीएफ का डीएस-12 ई-अनुमान रजिस्टर’ (ईएफआरआर) नाम की यह डिजिटल प्रणाली, अधिक भीड़-भाड़ वाले अवसरों के लिए पहले से अनुमान लगाने, निगरानी करने, उस समय तक की गई कार्रवाई और कार्यक्रम के बाद के मूल्यांकन के लिए एक ही डिजिटल भंडार के तौर पर काम करेगा। आरपीएफ मुख्यालय ने 17 सितंबर 2026 को संबंधित वरिष्ठ जोनल सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ईएफआरआर को तत्काल प्रभाव से लागू करें और स्टेशनों पर अधिक भीड़ एकत्र होने की संभावना वाले आगामी त्योहारों/आयोजनों के लिए समय पर ‘डेटा एंट्री’ सुनिश्चित करें। इस आदेश से पहले, आरपीएफ के महानिदेशक ने ईएफआरआर के सभी पहलुओं, इसके उद्देश्य और इसे लागू करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताते हुए एक निर्देश जारी किया था।
इसमें कहा गया, ‘‘हाल ही में भीड़ से जुड़ी घटनाओं ने इस बात को रेखांकित किया है कि यात्रियों की अचानक बढ़ती संख्या का अनुमान लगाने और उन्हें संभालने के लिए एक व्यवस्थित, आधुनिक, आसूचना-आधारित और डेटा-संचालित प्रणाली अपनाने की जरूरत है।’’ निर्देश के अनुसार, ‘‘इसमें होली, दिवाली, छठ, क्रिसमस, बड़े धार्मिक त्योहारों और हर साल नियमित रूप से होने वाले अन्य आयोजनों के लिए एक समय-सीमा दी गई है, ताकि प्रणाली में इनकी जानकारी पहले से ही रेखांकित की जा सके और ‘‘बेहतर योजना बनाई जा सके, जो 60 दिन पहले भी की जा सकती है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘मेलों, खेल-कूद के कार्यक्रमों, परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं, राजनीतिक रैलियों/सभाओं, स्थानीय त्योहारों, प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और इस तरह के अन्य आयोजनों के लिए, जिनकी सूचना आमतौर पर पहले ही मिल जाती है, आरपीएफ की संबंधित विशेष इकाई को हरसंभव कोशिश करनी चाहिए कि यथासंभव कम से कम तीन हफ्ते पहले जानकारी मिल जाए।’’ अधिकारियों ने कहा कि ईएफआरआर को भारतीय रेलवे में अधिक भीड़-भाड़ वाली स्थितियों का पहले से अंदाजा लगाने और उन्हें संभालने की आरपीएफ की क्षमता को मजबूत करने के लिए एक अहम संस्थागत तंत्र के तौर पर देखा जा रहा है।
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