Myanmar Drone Camp मामले में दिल्ली कोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों को दी Default Bail
(तीसरे पैरा में कुछ शब्द जोड़ते हुए) नयी दिल्ली, 23 सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने म्यांमा में जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण शिविर के मामले में गिरफ्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों को बुधवार को ‘डिफॉल्ट’ जमानत दे दी। इस मामले की जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कर रहा है। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने छह यूक्रेनी नागरिकों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि नकद जमा करने की शर्त पर जमानत दे दी।
अदालत ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) द्वारा अपराधों का निपटारा किए जाने को ध्यान में रखते हुए, यूक्रेनी नागरिकों को आप्रवास और विदेशियों विषयक अधिनियम, 2025 की धारा 21 (बिना अनुमति प्रवेश के लिए दंड) और धारा 23 (वीजा की अवधि से अधिक समय तक रहने तथा अन्य सामान्य उल्लंघनों के लिए दंड) के तहत भी आरोपमुक्त कर दिया। एफआरआरओ ने इससे पहले प्रत्येक आरोपी पर 5.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर इन अपराधों का निपटारा कर दिया था। यूक्रेनी नागरिक पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक और इवान सुकमैनोवस्की को 13 मार्च को लखनऊ हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।
तीन अन्य यूक्रेनी नागरिकों मारियान स्टेफनकीव, मक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की को उसी दिन दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि ये छह नागरिक भाड़े के सैनिकों के रूप में काम कर रहे थे। इस बीच, अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक की जमानत की शर्त में भी बदलाव किया जिसे 18 सितंबर को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉण्ड पर ‘डिफॉल्ट’ जमानत दी गई थी।
वैन डाइक की अमेरिका लौटने की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। अदालत ने बुधवार को प्रत्येक को केवल एक लाख रुपये का मुचलका जमा करने का निर्देश दिया। एनआईए ने यूक्रेनी नागरिकों और वैन डाइक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 (साजिश रचने) के तहत मामला दर्ज किया था।
अदालत से समयसीमा मोहलत मिलने के बाद एनआईए ने इस मामले में यूएपीए के तहत 180 दिन तक जांच की। हालांकि, आठ सितंबर को दाखिल अपने पहले आरोपपत्र में एजेंसी ने आप्रवास और विदेशियों विषयक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए और कहा कि यूएपीए के तहत जांच अभी जारी है। एजेंसी ने कहा था कि यूएपीए के तहत अपराधों की जांच लंबित है और यदि आतंकवाद रोधी कानून के तहत अपराध साबित होता है, तो वह पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है।
एनआईए के अनुसार, आरोपी वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमा में दाखिल हुए थे। आरोप है कि उन्होंने म्यांमा के सैन्य शासन जुंटा को निशाना बनाने वाले वहां के जातीय सशस्त्र समूहों के लिए ड्रोन युद्ध, ड्रोन संचालन, ड्रोन संयोजन और उन्हें निष्क्रिय करने की तकनीक से जुड़े पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
Ladakh हिंसा मामले में बड़ा फैसला, उपराज्यपाल ने 20 लोगों पर दर्ज केस वापस लिए
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के सिलसिले में 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लेने की बुधवार को घोषणा की। सक्सेना ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैंने लद्दाख में शांति, जन-शांति और सामाजिक सौहार्द के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए लेह में पिछले साल 24 सितंबर को हुई दुर्भाग्यपूर्ण हिंसा से संबंधित 20 व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की मंजूरी दे दी है।’’ उन्होंने कहा कि लद्दाख पुलिस ने व्यापक समीक्षा के बाद लेह थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 144/2005 में 20 लोगों के खिलाफ मामला समाप्त करने की सिफारिश की थी। उपराज्यपाल ने कहा कि इस फैसले से इन 20 लोगों को अपने जीवन और करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों के बजाय न्याय और राहत को प्राथमिकता देने से लद्दाख में अधिक शांतिपूर्ण, एकजुट और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण में मदद मिलेगी। सक्सेना ने पीड़ितों और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में ‘‘निरंतर मार्गदर्शन और संवेदनशील रुख’’ के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भी आभार व्यक्त किया। लद्दाख प्रशासन ने अगस्त में कहा था कि वह 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के बाद कुछ लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों में मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल करेगा।
यह घटनाक्रम करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) और लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) के प्रतिनिधियों की लेह में गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के अगले दिन और घटना की पहली बरसी से एक दिन पहले सामने आया है। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान 24 सितंबर 2025 को हुई हिंसा की पहली बरसी के उपलक्ष्य में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को लेह में एक प्रतीकात्मक पदयात्रा का नेतृत्व किया। पिछले साल हुई इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
इसके बाद केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। वांगचुक ने घोषणा की कि 24 सितंबर को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
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